मैं अपनी गाय नहीं बेच सकती, इसलिए अपनी लड़की को बेच रही हूं

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जबरदस्त सूखे की मार झेल रहे मराठवाड़ा में गायों को बेचने में असमर्थ परिवारों ने लड़कियों को बेचना शुरू कर दिया हैं। सूखे की चपेट में आए मराठवाड़ा के उस्मानाबाद की बेसहारा कमालीबाई ने एक राष्ट्रीय दैनिक से बात करते हुए बताया कि- मैं धन्यवाद करती हूं कि गोमांस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, अब कोई भी गाय नहीं खरीदना चाहता, इसलिए मैं अपनी बेटी कावेरी को बेचने के लिए लाई हूं।

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कमालीबाई कि और से दिया गया ये बयान आज के दौर का सबसे ज्वलंत कटांक्ष है जो पिछले दो सालों में मोदी सरकार की राष्ट्रविरोधी नीतियों के लागू होने पर उपजा है।

कावेरी को माता येलम्मा के चरणों में अर्पित कर दिया गया है ;बेच दिया गया हैद्ध जहां वैसे भी ऊंची जाति के लोगों द्वारा नीची जाति की लड़कियों को दासी के रूप में रख लिया जाता है। बाद के दिनों में वो लड़कियां क्या तो वेश्वावृत्ति में आ जाती है या फिर सड़कों पर भीख मांगने के लिये इनका प्रयोग किया जाता है।

प्रधानमंत्री की बेटी बचाओ, सेल्फी विद डाॅटर जैसी योजनाए सिर्फ एक बयानबाजी मात्र रह जाती है जब 9 से 10 साल की इन लड़कियों को ऐसी नीतिया होने के बावजूद देह व्यापार में उतारा जाता है। उनके 56 इंच के सीने में एक भी दर्द ऐसी बच्चियों के लिए नहीं दिखता।

लापरवाही की हद तब और भी ज्यादा दिखती है जब अधिकारिक तौर पर सरकार के नुुमाइन्दें खुद ऐसी कृत्यों के समर्थन में आते है। बेलगाम जिला अधिकारी एम के कुलकर्णी का इस घटना पर कहना है कि देवदासी का मामला पूरी तरह से धार्मिक प्रथा है हमें ऐसी किसी भी शिकायत में नहीं पड़ना है। लेकिन हम मंदिर के पुजारियों को जागरूग करते है कि बच्चों से जुड़ी कोई अप्रिय घटना पर तुरन्त हमसे सम्पर्क करें।

मोदी सरकार 26 मई पर अपने 2 साल पूरे करने की खुशी में महिमामंडन का नाटक शुरू करने वाली है, जिसमें लघू फिल्मों के माध्यम से अपनी उपलब्धियों को गिनवाएगी। लेकिन सरकार भूल जाएगी कि लागों लोग भुखमरी के कगार पर है। एक प्रधानमंत्री कभी ये जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है कि मवेशियों की जगह पर लोग अपनी बच्चियों को बेच रहे है, और सरकारी मशीनरी ऐसी घटनाओं की रोकथाम पर पूरी तरह से विफल है।

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