मैं अपनी गाय नहीं बेच सकती, इसलिए अपनी लड़की को बेच रही हूं

0

जबरदस्त सूखे की मार झेल रहे मराठवाड़ा में गायों को बेचने में असमर्थ परिवारों ने लड़कियों को बेचना शुरू कर दिया हैं। सूखे की चपेट में आए मराठवाड़ा के उस्मानाबाद की बेसहारा कमालीबाई ने एक राष्ट्रीय दैनिक से बात करते हुए बताया कि- मैं धन्यवाद करती हूं कि गोमांस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, अब कोई भी गाय नहीं खरीदना चाहता, इसलिए मैं अपनी बेटी कावेरी को बेचने के लिए लाई हूं।

455605-daughters
कमालीबाई कि और से दिया गया ये बयान आज के दौर का सबसे ज्वलंत कटांक्ष है जो पिछले दो सालों में मोदी सरकार की राष्ट्रविरोधी नीतियों के लागू होने पर उपजा है।

Also Read:  'आप' नेताओं ने की 18 महीनों में 10 विदेश यात्राएं, कांग्रेस ने साधा केजरीवाल सरकार पर हमला

कावेरी को माता येलम्मा के चरणों में अर्पित कर दिया गया है ;बेच दिया गया हैद्ध जहां वैसे भी ऊंची जाति के लोगों द्वारा नीची जाति की लड़कियों को दासी के रूप में रख लिया जाता है। बाद के दिनों में वो लड़कियां क्या तो वेश्वावृत्ति में आ जाती है या फिर सड़कों पर भीख मांगने के लिये इनका प्रयोग किया जाता है।

प्रधानमंत्री की बेटी बचाओ, सेल्फी विद डाॅटर जैसी योजनाए सिर्फ एक बयानबाजी मात्र रह जाती है जब 9 से 10 साल की इन लड़कियों को ऐसी नीतिया होने के बावजूद देह व्यापार में उतारा जाता है। उनके 56 इंच के सीने में एक भी दर्द ऐसी बच्चियों के लिए नहीं दिखता।

Also Read:  उत्तर प्रदेश: मेरठ में PM मोदी का बनेगा भव्य मंदिर, स्‍थापित होगी 100 फीट ऊंची प्रतिमा

लापरवाही की हद तब और भी ज्यादा दिखती है जब अधिकारिक तौर पर सरकार के नुुमाइन्दें खुद ऐसी कृत्यों के समर्थन में आते है। बेलगाम जिला अधिकारी एम के कुलकर्णी का इस घटना पर कहना है कि देवदासी का मामला पूरी तरह से धार्मिक प्रथा है हमें ऐसी किसी भी शिकायत में नहीं पड़ना है। लेकिन हम मंदिर के पुजारियों को जागरूग करते है कि बच्चों से जुड़ी कोई अप्रिय घटना पर तुरन्त हमसे सम्पर्क करें।

Also Read:  INDvsNZ कानपुर टेस्ट : भारत की शानदार जीत, 197 रनों से जीत के साथ भारतीय टीम ने जीता 500वां ऐतिहासिक टेस्ट

मोदी सरकार 26 मई पर अपने 2 साल पूरे करने की खुशी में महिमामंडन का नाटक शुरू करने वाली है, जिसमें लघू फिल्मों के माध्यम से अपनी उपलब्धियों को गिनवाएगी। लेकिन सरकार भूल जाएगी कि लागों लोग भुखमरी के कगार पर है। एक प्रधानमंत्री कभी ये जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है कि मवेशियों की जगह पर लोग अपनी बच्चियों को बेच रहे है, और सरकारी मशीनरी ऐसी घटनाओं की रोकथाम पर पूरी तरह से विफल है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here