संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से, PNB घोटाले और राफेल पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के आसार

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संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज यानि सोमवार (5 मार्च) से शुरू हो रहा है। एक तरफ पूर्वोत्तर के तीन राज्यों के चुनावी नतीजों से केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उत्साहित है। वहीं 12,700 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटालों सहित कई दूसरे मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए कमर कस ली है। इसके चलते सरकार और विपक्ष के टकराव के आसार बन रहे हैं।

File Photo: AP

हालांकि, सत्तापक्ष के पास जवाब के तौर पर कार्ति चिदंबरम का मुद्दा है। कांग्रेस पीएनबी के साथ ‘जनता का रिपोर्टर’ द्वारा खुलासा किए गए राफेल सौदे का मामला भी उठाएगी। हालांकि त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में भाजपा और उसके सहयोगियों की जीत से सत्र के दौरान विपक्ष के हमलों की धार कमजोर पड़ी है। लेकिन विपक्ष अपने आक्रामक तेवर बरकरार रखने की कोशिश करेगा।

संसद के दोनों सत्रों की बैठक आज करीब एक माह के अंतराल के बाद शुरू होने जा रही है। इस दौरान भगोड़े आर्थिक अपराधी विधेयक और तीन तलाक संबंधी विधेयक को पारित कराना सरकार के एजेंडे में शीर्ष स्थान पर होगा। हीरा व्यापारी नीरव मोदी और अन्य के 12,700 करोड़ रूपये के घोटाले और उसके बाद देश से भाग जाने के बाद सरकार ने आर्थिक अपराधियों को निशाने पर लेने संबंधी विधेयक को मंजूरी दी है।

इस विधेयक में फरार आर्थिक अपराधियों और ऋण चूककर्ताओं की संपत्तियों को कुर्क करने का प्रावधान है। विपक्ष इस बात का प्रयास करेगा कि धोखाधड़ी के लिए सरकार को घेरा जाए और उस पर हमला तेज किया जाए। विपक्ष इस बात को विशेष तौर पर उठाएगा कि नीरव मोदी से पहले शराब कारोबारी विजय माल्या भी सार्वजनिक बैंकों से करोड़ों रूपये का कर्ज लेकर देश से फरार हो गया।

हालांकि, बीजेपी दावा कर चुकी है कि पीएनबी घोटाला उस समय शुरू हुआ जब यूपीए सत्ता में थी और उसकी सरकार ने तत्परता से कार्रवाई की जिसके चलते धोखाधड़ी सामने आई। इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसद में टकराव होने के आसार हैं। बहरहाल, भाजपा इस बात के काफी उत्साहित है कि त्रिपुरा में उसकी शानदार जीत हुई है और नागालैंड और मेघालय में उसका बेहतरीन प्रदर्शन रहा जबकि कांग्रेस को बड़ी पराजय झेलनी पड़ी।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि सत्तारूढ़ दल इस बार संसद में सक्रिय मुद्रा में रह सकता है और कांग्रेस नीत सरकारों के शासनकाल में हुए घोटालों को उठा सकता है। तीन तलाक विधेयक भी, जिसमें एक बार में तीन तलाक कहने वाले पति को जेल की सजा का प्रावधान है, विवाद का एक विषय बना हुआ है।

भाजपा पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि वह इस विधेयक को संसद की मंजूरी दिलवायेगी जबकि कांग्रेस और वाम सहित अन्य दल इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। ओबीसी आयोग को संवैधानिक निकाय का दर्जा दिलवाने वाले विधेयक को संसद की मंजूरी दिलवाना भी सरकार की प्राथमिकता में रहेगा। सरकार आम बजट को भी इसी सत्र के दौरान मंजूरी दिलवाएगी।

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