बर्खास्त IPS अधिकारी संजीव भट्ट की पत्‍नी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से मांगा जवाब, बीवी ने BJP सरकार पर लगाए हैं गंभीर आरोप

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गुजरात के आईपीएस IPS अधिकारी संजीव भट्ट की पत्नी ने गुजरात की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पत्नी का आरोप है कि संजीव भट्ट को सुप्रीम कोर्ट में याचिका नहीं दायर करने दिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोप को गंभीर बताते हुए गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई चार अक्टूबर को होगी।

NDTV के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है गंभीर आरोपों पर गुजरात जवाब दे। शीर्ष अदालत ने कहा कि संजीव भट्ट की पत्नी द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर है। कोर्ट को सबसे पहले इन पर गुजरात सरकार से जवाब चाहिए। अगर किसी नागरिक की पत्नी इस तरह के आरोप लगाती है तो राज्य सरकार को बताना होगा कि क्या चल रहा है। इस मामले में अब गुजरात सरकार शुक्रवार तक जवाब दाखिल करेगी और इस मामले की अगली सुनवाई चार अक्‍टूबर को होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रंजन गोगोई व जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच ने ये भी कहा है कि आमतौर पर आरोपी खुद कोर्ट आते हैं लेकिन यहां आरोपी की पत्नी आई है। अदालत ने कहा कि हम यहां केस की मेरिट पर सुनवाई नहीं कर रहे हैं। दरअसल संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि उनके पति इस वक्त पुलिस रिमांड पर है और उन्हें पुलिस इस दौरान ना तो वकालतनामा साइन करने दे रही है और ना ही इस केस को कोर्ट में चुनौती देने दे रही है।

गुजरात CID ने संजीव भट्ट को किया है गिरफ्तार

आपको बता दें कि फिलहाल संजीव भट्ट 22 साल पुराने एक केस में पुलिस हिरासत में है। इसी महीने पांच सितंबर को पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को गुजरात सीआईडी ने 22 साल पुराने एक मामले में गिरफ्तार किया था। पूर्व आईपीएस अधिकारी और सात अन्य को 22 साल पहले कथित तौर पर मादक पदार्थ रखने के मामले में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के संबंध में पूछताछ करने के लिए हिरासत में लिया गया था।

जानकारी के अनुसार भट्ट के नेतृत्व में बनासकांठा पुलिस ने वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित को करीब एक किलोग्राम मादक पदार्थ रखने के आरोप में 1996 में गिरफ्तार किया था। उस समय बनासकांठा पुलिस ने दावा किया था कि मादक पदार्थ जिले के पालनपुर में होटल के उस कमरे से मिला था जिसमें राजपुरोहित ठहरे थे। राजस्थान पुलिस की जांच में खुलासा किया गया था कि राजपुरोहित को इस मामले में बनासकांठा पुलिस ने कथित तौर पर झूठे तौर फंसाया था ताकि उसे इसके लिए बाध्य किया जा सके कि वह राजस्थान के पाली स्थित अपनी विवादित संपत्ति हस्तांतरित करे।

साथ ही यह भी खुलासा किया गया कि राजपुरोहित को बनासकांठा पुलिस ने राजस्थान के पाली जिले में स्थित उनके आवास से कथित रूप से अगवा किया था। राजस्थान पुलिस की जांच के बाद बनासकांठा के पूर्व पुलिस निरीक्षक आई बी व्यास इस मामले को लेकर 1999 में इस मामले की गहराई से जांच के लिए गुजरात हाई कोर्ट गए। इस साल जून में याचिका की सुनवाई के दौरान गुजरात हाई कोर्ट ने इस मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी थी। हाई कोर्ट ने सीआईडी को इस मामले की जांच तीन महीने में पूरा करने को कहा।

 

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