दहेज उत्पीड़न मामले में अब पति और ससुराल वालों की हो सकती है तुरंत गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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दहेज उत्पीड़न कानून (498 A) पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (14 सितंबर) को एक अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व के अपने फैसले में बड़ा बदलाव करते हुए पति और ससुराल वालों की तुरंत गिरफ्तारी का रास्ता साफ कर दिया है।
अब इस कानून के तहत महिला की शिकायत पर उसके पति और ससुराल वालों की गिरफ्तारी में ‘परिवार कल्याण समिति’ की कोई भूमिका नहीं होगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि शिकायतों के निपटारे के लिए परिवार कल्याण समिति की जरूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट
file photo

शीर्ष अदालत ने ऐसे मामलों में गिरफ्तारी हो या नहीं ये तय करने का अधिकार पुलिस को वापस दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर राज्य के DGP इस मुद्दे पर पुलिस अफसरों व कर्मियों में जागरुकता फैलाएं और उन्हें बताया जाए कि सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर जो सिद्धान्त दिया है वो क्या है। मामले में आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि पीड़ित की सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है।

कोर्ट ने आगे कहा कि आरोपियों के लिए अग्रिम जमानत का विकल्प खुला है। अदालत ने पहले कहा था कि दहेज के मामलों में महिला के पति और ससुराल वालों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी और उनके पास अग्रिम जमानत लेने का विकल्प भी रहेगा। कोर्ट ने पिछले साल ऐसे मामलों के लिए ‘परिवार कल्याण समिति’ बनाने की बात की थी। लेकिन अदालत ने अब अपने ताजा फैसले में इस समिति की भूमिका को खारिज कर दिया है।

समाचार एजेंसी वार्ता के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज होने के तुरंत बाद अब पीड़ित महिला के पति और उसके ससुरालियों की गिरफ्तारी की जा सकेगी। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने शुक्रवार को शीर्ष अदालत के ही पूर्व के फैसले में बड़ा बदलाव करते हुए परिजनों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा समाप्त कर दी।

दहेज उत्पीड़न मामले में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि पीड़ित की सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है। खंडपीठ ने कहा कि मामले की शिकायत की जांच के लिए परिवार कल्याण कमेटी की जरूरत नहीं है। पुलिस को यदि जरूरी लगता है तो वह आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर सकती है। आरोपियों के लिए अग्रिम जमानत का विकल्प खुला है। न्यायालय ने इसी साल अप्रैल में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

गौरतलब है कि गत वर्ष 27 जुलाई को न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल एवं न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने दहेज उत्पीड़न निरोधक कानून के दुरुपयोग की शिकायतों को देखते हुए ऐसे मामलों में पति या ससुराल वालों की तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति मिश्रा ने आज के अपने फैसले में कहा कि ऐसा लगता है कि 498ए के दायरे को हल्का करना महिला को इस कानून के तहत मिले अधिकार के खिलाफ जाता है और दो-सदस्यीय खंडपीठ के फैसले के जरिये दी गई कानूनी सुरक्षा से वह सहमत नहीं हैं। तीन-सदस्यीय पीठ ने मामले में अधिवक्ता वी. शेखर को न्याय-मित्र बनाया था।

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