केरल लव जिहाद मामला: हादिया ने सुप्रीम कोर्ट में मांगी आजादी, कोर्ट ने पढ़ाई पूरी करने के लिए भेजा कॉलेज, जनवरी के तीसरे हफ्ते में होगी अगली सुनवाई

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केरल के बहुचर्चित ‘लव जिहाद’ मामले में हादिया बन चुकीं अखिला अशोकन सोमवार (27 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के कोर्टरूप में पेश हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा है कि हादिया को उसके माता-पिता अपने कब्जे में न रखें। कोर्ट ने हादिया को सीधे तमिलनाडु के सेलम के होमियोपैथिक मेडिकल कालेज ले जाने और इंटर्नशिप पूरी कराने का आदेश दिया है। कालेज और सरकार हादिया के एडमिशन और हॉस्टल मे रहने की व्यवस्था करेगी। मामले की अगली सुनवाई जनवरी के तीसरे हफ्ते में होगी। हादिया ने सुप्रीम कोर्ट में साफ तौर पर कहा कि मुझे अपनी आजादी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने हादिया से पूछा, ‘क्या आप सरकारी खर्चे पर अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहेंगी?’ हादिया ने जवाब दिया, ‘मैं पढ़ाई जारी रखना चाहती हूं लेकिन सरकारी खर्चे पर नहीं। मेरे पति मेरा ख्याल रख सकते हैं।’ हदिया के पति शफीन जहां के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि ये हदिया की ज़िंदगी है उसको फैसला लेने का अधिकार है। अगर ये भी मान भी लिया जाए कि हदिया ने जिस से निकाह किया वह गलत इंसान है, लेकिन फिर भी अगर वह उसके साथ रहना चाहती है कि उसकी मर्जी है।

सिब्बल ने कहा कि, ‘हादिया यहां हैं, कोर्ट को उन्हें सुनना चाहिए, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को नहीं, उन्हें अपनी जिंदगी का फैसला करने का अधिकार है।’ वहीं, हादिया के पिता ने कहा कि उनकी जान को खतरा है, बंद कमरे में सुनवाई कीजिए। जबकि NIA ने कहा कि हादिया को सम्मोहित किया गया है। NIA ने सुप्रीम कोर्ट में 100 पेज की जांच रिपोर्ट पेश की है।

बता दें कि शीर्ष अदालत ने पिछली सुनवाई में कहा था कि वह हादिया से बातचीत कर उनकी मानसिक स्थिति का शुरुआती आकलन करेगा। गौरतलब है कि केरल हाई कोर्ट ने हादिया की मुसलमान लड़के के साथ शादी को ‘रद्द’ घोषित करते हुए उसे पिता के हवाले करने का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट के सामने पेशी के लिए रवाना होने से पहले हादिया ने केरल में शनिवार को एक बार फिर दोहराया कि किसी ने भी उसे इस्लाम में धर्मांतरण के लिए मजबूर नहीं किया था। वह अपने 25 वर्षीय पति शफीन जहां के पास जाना चाहती है।

बता दें कि शीर्ष न्यायालय ने 30 अक्तूबर को निर्देश दिया था कि महिला (अखिला उर्फ़ हदिया) को 27 नवंबर को खुली अदालत में बातचीत के लिए पेश किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने हदिया की सहमति को महत्वपूर्ण बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि अगर लड़की बालिग है, तो ऐसे मामलों में उसकी सहमति सबसे ज्यादा अहमियत रखती है।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने 16 अगस्त को कहा था कि इस मामले में अंतिम निर्णय करने से पहले महिला से बंद कमरे में बात की जाएगी। लेकिन बाद में इस आदेश में सुधार कर दिया गया। इसमें कहा गया, हम यह जोड़ रहे हैं कि यह न्यायालय बंद कमरे के बजाए खुली अदालत में बात करेगा।

शीर्ष अदालत ने पहले टिप्पणी की थी कि वयस्क की स्वेच्छा से विवाह के लिये सहमति के बारे में जानकारी प्राप्त करनी होगी। इसके जवाब में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का कहना था कि सिखाया पढ़ाया गया व्यक्ति विवाह के लिये स्वेच्छा से सहमति देने में असमर्थ होता है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मनोवैज्ञानिक अपहरण का जिक्र करते हुये कहा था कि सिखाया पढ़ाया गया व्यक्ति स्वेच्छा से सहमति देने में असमर्थ हो सकता है। उसने भी कहा था कि केरल में एक सुनियोजित तंत्र लोगों को सिखाने-पढ़ाने और कट्टरता की गतिविधियों में संलिप्त है और इस तरह के 89 मामले सामने आ चुके हैं।

क्या है मामला?

बता दें कि अखिला अशोकन उर्फ हादिया ने कथित रूप से धर्म परिवर्तन कर शफीन जहां नाम के एक मुस्लिम शख्स से निकाह किया था। इस निकाह का विरोध करते हुए लड़की के पिता के. एम. अशोकन ने केरल हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर शादी रद्द करने की गुहार लगाई थी। इस याचिका पर केरल हाई कोर्ट ने मुस्लिम युवक के हिंदू युवती के साथ विवाह को लव जिहाद का नमूना बताते हुए इसे अमान्य घोषित कर दिया था।

शादी ‘रद्द’ किए जाने के केरल हाईकोर्ट के फैसले को शफीन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। युवक का दावा है कि महिला ने स्पष्ट किया है कि उसने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म कबूल किया है, लेकिन हाई कोर्ट के 24 मई के आदेश के बाद से उसे उसकी मर्जी के खिलाफ पिता के घर में नजरबंद करके रखा गया है।

24 वर्षीय हदिया शफिन का जन्म केरल के हिंदू परिवार में हुआ था और उसका नाम अखिला अशोकन था। उसने कथित तौर पर परिवार की इजाजत के बिना मुस्लिम युवक से विवाह किया था। जबकि युवक का कहना है कि यह विवाह आपसी सहमति से हुई थी। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

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