मौत की सजा के लिए फांसी की जगह दूसरे विकल्पों के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

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एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार(6 अक्टूबर) को केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या फांसी के अलावा भी मौत की सजा देने का कोई दूसरा विकल्प हो सकता है जिसमें शख्स को कम दर्द हो। कोर्ट ने इस मामले में तीन हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट
file photo

सुप्रीम कोर्ट ने जिस याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है उसमे कहा गया है कि फांसी की सजा असंवैधानिक है, क्योंकि यह तकलीफदेह होती है और जीवन समाप्त करने का यह सम्मानजनक तरीका नहीं है। न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाय. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने सरकार को प्रतिक्रिया देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।

याचिका में कहा गया है कि दुनिया के कई देशों ने फांसी का इस्तेमाल बंद कर दिया है। भारत में भी ऐसा होना चाहिए। याचिकाकर्ता ने मौत के लिए इंजेक्शन देने, गोली मारने या इलेक्ट्रिक चेयर का इस्तेमाल करने जैसे तरीके अपनाने का सुझाव दिया है। बता दें कि अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 354 फांसी पर लटकाकर मौत की सजा देने की अनुमति देती है।

पीठ ने इस मामले में महान्यायवादी के.के. वेणुगोपाल से सहायता करने के लिए भी कहा है। साथ ही शीर्ष अदालत ने संसद से मौत की सजा देने के वैकल्पिक तरीकों पर विचार करने के लिए कहा है। याचिकाकर्ता वकील ने न्यायालय को बताया है कि फांसी द्वारा मौत की सजा देना संविधान के अनुच्छेद-21 का उल्लंघन है, जो सम्मान के साथ जीने का अधिकार प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि सम्मान के साथ जीने के अधिकार में बिना दर्द और तकलीफ के सम्मान के साथ मरने का अधिकार भी शामिल है। याचिका दायर करने वाले वकील द्वारा न्यायालय को कम तकलीफदेह तरीके से मौत की सजा के बारे में सुझाव देने पर न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि घातक इंजेक्शन से मौत की सजा देने के तरीके की काफी आलोचना हुई है।

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