सीलिंग तोड़ने के मामले में दिल्ली BJP अध्यक्ष मनोज तिवारी को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- ‘हम आपको सीलिंग अधिकारी बना देंगे’

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद और दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सील किए गए घर का लॉक तोड़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (25 सितंबर) को मनोज तिवारी को जमकर फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने मनोज तिवारी से कहा कि वह एक हफ्ते के भीतर हलफनामा दायर करें। इस मामले में अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी सांसद मनोज तिवारी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। इस दौरान शीर्ष अदालत ने तिवारी के सीलिंग पर मीडिया मे दिए बयान पर नाराजगी जताते हुए फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि आपने बयान दिया है कि 1000 संपत्तियां ऐसी हैं जो सील होनी चाहिए। आप लिस्ट दें हम आपको सीलिंग अधिकारी बना देंगे।

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, शीर्ष अदालत ने कहा कि सांसद होने से उन्हें कानून अपने हाथ में लेने की आजादी नहीं मिल जाती। आपको बता दें कि दिल्ली के मास्टर प्लान का उल्लंघन करते हुए चल रहे एक परिसर की सील कथित तौर पर हटाने के मामले में तिवारी को अवमानना नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के अनुरूप वह मंगलवार को अदालत में पेश हुए।

शीर्ष अदालत ने तिवारी के उस बयान पर नाराजगी प्रकट की जिसमें उन्होंने कहा था कि निगरानी समिति एक हजार अवैध भवनों को सील नहीं कर रही है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने तिवारी को दिल्ली में सीलिंग के मामले में एक समाचार चैनल से बातचीत में किए गए इस दावे पर स्पष्टीकरण देने को कहा और मामले में एक सप्ताह के अंदर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ में न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता भी शामिल हैं। पीठ ने कहा, ‘‘मिस्टर तिवारी, आप अपनी सीडी में कह रहे हैं कि एक हजार जगह ऐसी हैं जिन्हें सील किए जाने की जरूरत है। हमें इन जगहों की सूची दें। हम आपको सीलिंग अधिकारी बनाएंगे।’’ गौरतलब है कि उत्तर पूर्व दिल्ली से लोकसभा सदस्य तिवारी के खिलाफ पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने गोकलपुरी इलाके में एक परिसर की कथित तौर पर सील हटाने के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

तिवारी की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि बीजेपी नेता ने कोई सील नहीं हटाई और सांसद होते हुए उन्होंने कभी सीलिंग प्रक्रिया को बाधित नहीं किया। वकील ने कहा कि उन्हें विस्तृत जवाब देने के लिए समय चाहिए होगा।अदालत ने कहा, ‘‘हम आपसे पूछ रहे हैं, क्या आपने सीडी देखी है? सीडी में वह कह रहे हैं कि एक हजार जगहें ऐसी हैं जहां सीलिंग की जरूरत है। वह संसद सदस्य हैं। इससे उन्हें कानून हाथ में लेने की आजादी नहीं मिल जाती।’’ अदालत ने तिवारी को तीन अक्तूबर को पेश होने का निर्देश दिया जब मामले में अगली सुनवाई होगी।

क्या है मामला?

दरअसल, मनोज तिवारी पर कथित रूप से नगर निगम द्वारा सील किए गए मकान का ताला तोड़ने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रविवार (16 सितंबर) को उत्तर पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुर गांव में सीलिंग के विरोध में बुलाई गई महापंचायत में पहुंचे मनोज तिवारी लोगों की पीड़ा सुनकर भावुक हो गए थे और उन्होंने कथित तौर पर डेयरी पर लगी सील तोड़ डाली थी। मनोज तिवारी द्वारा सीलबंद घर का ताला तोड़े जाने का कथित वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया।

वायरल वीडियो फुटेज में मनोज तिवारी रविवार को गोकुलपुरी के दौरे के दौरान एक अनाधिकृत कॉलोनी में सीलबंद घर का तोला तोड़ते नजर आ रहे हैं। तिवारी को नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ विरोध करते हुए भी देखा गया। तिवारी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 और दिल्ली नगर निगम (डीएमसी) अधिनियम के 461 और 465 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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