आम आदमी की जेब पर डाका, मिनिमम बैलेंस नहीं रखने वाले 27 करोड़ खाता धारकों से SBI ने मई में वसूले 235 करोड़ रुपये

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नोटबंदी के बाद व्यापार की मार सह रहे आम आदमी पर सरकार के जीएसी टी ने हमला बोला इसके बाद भी एक आम आदमी की जेब से हर तरीके से पैसे निकाले जा रहे, चाहे वो पेट्रोल में बढ़ी कीमतें हो, गिरती विकास दरों का भय हो या अन्य कारण। ताजा मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने मिनिमम औसत बैलेंस (MAB) से कम बैलेंस रखने वाले खातों पर पैनल्टी लगाकर 235 करोड़ रुपए की कमाई की है।

235 करोड़

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने कहा कि वह उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया मिलने के बाद मासिक औसत बैलेंस बरकरार नहीं रखने पर लगने वाले शुल्क की समीक्षा कर रहा है। बैंक के प्रबंध निदेशक (राष्ट्रीय बैंकिंग समूह) रजनीश कुमार ने समाचार एजंेसी भाषा से बात करते हुए कहा कि, ‘‘हमें इस संबंध में उपभोक्ताओं की प्रतिक्रियाएं मिली हैं और हम उनकी समीक्षा कर रहे हैं।

बैंक उन्हें ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगा। उन्होंने आगे कहा, हम आंतरिक विमर्श कर रहे हैं कि क्या वरिष्ठ नागरिकों या विद्यार्थियों जैसे उपभोक्ताओं की कुछ निश्चित श्रेणी के लिए शुल्क में सुधार की जानी चाहिए या नहीं। ये शुल्क कभी भी पत्थर की लकीर नहीं होते हैं।

बैंक की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक जून तिमाही के दौरान यह कमाई की गई है। बैंक के मुताबिक उसके करीब 40 करोड़ बचत खातों में से करीब 27 करोड़ खातों पर MAB की शर्त लागू है और इन खातों में से जिनमें तय लिमिट से कम बैलेंस पाया गया है उनपर पैनेल्टी से यह कमाई की गई है।

SBI ने पांच साल के अंतराल के बाद इस साल अप्रैल में मासिक औसत बैलेंस बरकरार नहीं रखने पर शुल्क को फिर से लागू किया था। इसके तहत खाते में मासिक औसत नहीं रख पाने पर 100 रुपये तक के शुल्क और माल एवं सेवा कर जीएसटी का प्रावधान किया गया था। शहरी इलाकों में मासिक औसत बैलेंस पांच हजार रुपये तय किया गया था। इसके 50 प्रतिशत कम हो जाने पर 50 रुपये और जीएसटी का तथा 75 प्रतिशत कम हो जाने पर 100 रुपये और जीएसटी का प्रावधान था।

ग्रामीण इलाकों के लिए मासिक औसत बैलेंस 1000 रुपये तय किया गया था तथा इससे बरकरार नहीं रखने पर 20 से 50 रुपये और जीएसटी का प्रावधान किया गया था।

कुमार ने कहा कि बैंक के पास 40 करोड़ से अधिक बचत खाते हैं। इनमें से 13 करोड़ बैंक खाते बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट या प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत हैं। इन दोनों खातों को मासिक औसत बैलेंस की शर्त से बाहर रखा गया था। उन्होंने कहा कि शेष 27 करोड़ खाताधारकों का 15-20 प्रतिशत मासिक औसत बैलेंस मेंटेन नहीं करते हैं। बैंक ने मई महीने के लिए मासिक औसत बैलेंस की शर्त को लेकर 235 करोड़ रुपये का शुल्क वसूला था।

1 COMMENT

  1. दुनिया मे कहीं भी ऐसा नियम नहीं है सिर्फ भारत में है कयों भारत चोरों की सरकार है और बैंक खासकर SBI के निर्देशक चोरों का चोर है जनता पैसे रखने जाती है जनता के रखे हुए पैसे से bank Business करती है और जनता पर ही धाँधली करती है.

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