“पप्पू का नाम लेकर गप्पू अपनी नैया पार करने के जुगाड़ में है, भक्त अपने भगवान के प्रचार में जुट गए हैं”

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‘पप्पू’ के नाम पर गप्पू की योजना, साथियों इस वक़्त देश पप्पू और गप्पू के बीच फंसा हुआ है… पप्पू का नाम लेकर गप्पू अपनी नैया पार करने के जुगाड़ में है… भक्त अपने भगवान के प्रचार में जुट गये हैं। सारे गुनाहों के बाद भी कहा जा रहा है इनका कोई विकल्प नही है, जी हां पिछले कुछ महीने से भक्तों ने एक नया जुमला शुरू कर दिया है, इनका कोई विकल्प नहीं, हिंदुस्तान धार्मिक मान्यताओं और आस्था का देश है।

PM Narendra Modi (PTI Photo/File)

ग़रीब हो या अमीर हर व्यक्ति बड़े से बड़े कष्ट को ये कहकर बर्दाश्त कर लेता है कि “जो कुछ भी हो रहा है भगवान की मर्ज़ी” क्या आपको नहीं लगता है कि ऐसा ही कुछ इस समय देश की जनता के साथ हो रहा है? क्या आपको ‘शोले’ फ़िल्म का वो दृश्य नहीं याद आ रहा है जिसमें अमिताभ बच्चन अपने दोस्त धर्मेन्द्र की हर बुराई गिनाने के बाद कहता है तो फिर मौसी बसंती के साथ वीरू का रिश्ता पक्का समझू?

मौसी ने तो जय को मना कर दिया था पता नही आप मना कर पाएंगे या एक बार फिर गप्पू के चक्कर में फंस जाएंगे? राजशाही व्यवस्था में भी राजा के कारिंदे ग़रीबों को यही समझाया करते थे तुम्हारे जीवन में जो भी कष्ट है वो तुम्हारे पिछले दिनो का पाप है जनता भी यही मानकर बैठ जाती थी। हमारी भुखमरी, ग़रीबी, आशिक्षा में राजा का कोई दोष नहीं, ये सब तो पिछले जन्म का पाप है। ऐसा ही कुछ इस वक़्त देश में हो रहा है।

मोदी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल का निष्पक्ष मूल्यांकन करना हो तो 2014 के चुनाव में मोदी जी द्वारा किये गये वादे और आज की हक़ीक़त को ध्यान से देखिये कहा गया था:-

1. इतना काला धन लायेंगे हर आदमी के खाते में 15 लाख रुपये जमा हो जायेगा। आज तक 15 पैसे भी किसी के खाते में नहीं आये, हां स्विस बैंक में कालाधन ज़रूर दोगुना हो गया।

2. कहा गया युवाओं को 2 करोड़ रोज़गार देंगे, 84 प्रतिशत रोज़गार घटा है मोदी जी के राज में। अब तो रोज़गार का आंकड़ा भी आना बंद हो गया।

3. बेटियों को सुरक्षा देने की बात कहकर मात्र 15 पैसे प्रति महिला प्रतिदिन ख़र्च का प्रावधान बजट में रखा गया। भाजपा के तमाम मंत्री विधायक और नेता बलात्कार और हत्या के मामले में लिप्त पाये गये।

4. महंगाई कम करने का वादा करके 85 रुपये लीटर पेट्रोल और 75 रु लीटर डीज़ल बेचा गया। प्याज़, आलू और चीनी के दाम समय-समय पर बढ़ाये गये।

5. डालर का दाम 40 रुपये करने की बात कहकर 71 रु पहुंचा दिया गया।

6. नोटबंदी का तुग़लकी फ़रमान जारी कर दिया गया। 99.3 फीसदी पैसा बैंकों में वापस आ गया। न काला धन ख़त्म हुआ, न आतंकवाद। हां 150 जिंदगियां लाइन में लगकर ज़रूर ख़त्म हो गई। देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई। GDP नीचे गिर गई जिससे लगभग 2.25 लाख करोड़ का घाटा हुआ।

7. One Nation One Tax के नाम पर GST लागू कर One Nation Multiple Tax का फ़ार्मुला लगा दिया गया। आज व्यापारी अपना धंधा करने के बजाय दिन रात हिसाब किताब में परेशान रहता है।

8. किसान आत्महत्याएं करने को मजबूर हैं। आज़ादी के बाद पहली बार अपनी फ़सल का उचित दाम न मिलने व क़र्ज़ माफ़ न किये जाने के विरोध में किसानो ने PMO के सामने नग्न प्रदर्शन करके अपना मलमूत्र तक पिया। अपनी उपज को खेतों में जलाकर और सड़कों पर नष्ट करके अपना विरोध दर्ज कराया।

9. विदेशी यात्राओं पर पानी की तरह पैसा बहाकर इन्वेस्टमेंट के नाम पर दिखावा किया गया।

10. राष्ट्रीय सुरक्षा और देश भक्ति की दुहाई देने वाली सरकार के राज में पाकिस्तान द्वारा सबसे अधिक सीमा का उल्लंघन किया गया। डोकलाम में लगातार तनाव की स्थिति बनी हुई है।

11. एक के बदले 10 सिर काटने की बात कहकर नवाज़ शरीफ़ के बर्थडे का केक काटा गया। ISI से पठानकोट की जांच कराई गई। पाकिस्तान को टक्कर देने की बात कहकर वहां से शक्कर मंगाई गई, अब तो पाकिस्तान की सेना के साथ साझा युद्ध अभ्यास का शर्मनाक फ़ैसला भी ले लिया गया है।

12. 500 करोड़ के बजाय 1600 करोड़ का जहाज़ ख़रीदकर राफ़ेल रक्षा सौदे में हज़ारों करोड़ की दलाली खाई गई। चेहरे पे जो लाली है राफ़ेल की दलाली है।

13. अफ़ज़ल गुरु पर रोज सवाल पूछने वालों ने अफ़ज़ल गुरु को शहीद मनाने वाली PDP के साथ सरकार बनाई।

14. बैंकों में जमा जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा बड़े-बड़े उद्योगपतियों को रेवड़ी की तरह क़र्ज़ के रूप में बांट दिया गया। चंद उद्योगपतियों पर 8.55 लाख करोड़ का क़र्ज़ बाक़ी है। इन बेइमानों से पैसा वापस लाना तो दूर 2100 करोड़ का क़र्ज़ा लेकर ललित मोदी भाग गया। 9 हज़ार करोड़ रुपये लेकर विजय मल्ल्या भाग गया। 21 हज़ार करोड़ लेकर निरव मोदी भी भाग गया और हमको काला धन लाने का सपना दिखाया जा रहा है।

15. लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकारों को राज्यपाल और उपराज्यपाल के ज़रिये अस्थिर करके लोकतन्त्र और संविधान का माखौल उड़ाया गया।

इन तमाम झूठे जुमलों के साथ जनता को मूर्ख बनाने का काम जारी है। देश में साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का काम भी ख़ूब चल रहा है। मुसलमानो और दलितों के ख़िलाफ़ जमकर नफ़रत फेलाई जा रही है। एक लाख से लेकर पहलू खान तक गाय के नाम पर इंसान की जान ली जाती रही, लेकिन मोदी जी के मुंह से समय पर एक शब्द भी न निकला। हां लिंचिंग करके इंसान की जान लेने वाले क़ातिलों को मोदी जी के मंत्री ने माला पहनाकर स्वागत ज़रूर किया।

उना से लेकर उत्तर प्रदेश तक दलितों पर अत्याचार जारी है। उनकी हत्यायें भी की जा रही हैं, लेकिन मोदी जी ख़ामोश हैं। दरअसल असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिये हमको आपको इन नक़ली मुद्दों पर उलझाये रखा गया जिससे सारे गुनाह छिपायें जा सकें।

मोदी जी का बौधिक ज्ञान भी माशाअल्लाह है… कुछ बातें हंसने के लिये, याद कीजिये….

1. मोदी जी ने तक्षशिला को बिहार में बता दिया।

2. शहीदे आज़म भगत सिंह को अंडमान निकोबार की जेल में पहुंचा दिया।

3. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दयानंद सरस्वती से मिलवा दिया।

4. कबीर गुरुनानक देव और बाबा गोरखनाथ को एक साथ बैठा दिया, जबकि तीनों के इस दुनिया में होने के बीच सैकड़ों साल का अंतर है।

5. Strength की अंग्रेज़ी ही विदेश में जाकर बदल दी।

6. सरकारी रोज़गार देने का वादा करके पकौड़ा रोज़गार, ऑटो टैक्सी रोज़गार को अपनी उपलब्धि गिना दी।

7. पिछले दिनो नाले के गैस से चाय तक बनवा दी।

ऐसे महापुरुष आदरणीय मोदी जी की उपलब्धियों के बारे में ज़रा गम्भीरता से सोचिये। कहीं ऐसा तो नही की सिर्फ़ सोते समय ख़ामोश रहने वाले मोदी जी ने दिन रात भाषण दे-देकर आपकी सोचने समझने की शक्ति छीन ली है। क्या हर तरह से देश का बेड़ा गरक करने वाले मोदी जी का वाक़ई कोई विकल्प नही? क्या हम फिर से अपनी ज़िंदगी को जोखिम में डालने और देश को बर्बादी की कगार पर पहुंचाने के लिये तैयार हैं, क्यूँकि भाजपाईयों और गोदी मीडिया ने अपनी सारी नाकामियों को छिपाने का एक नया फ़ार्मूला खोज लिया।

“आख़िर मोदी जी का विकल्प क्या है?” “राहुल गांधी के सामने मोदी बहुत मज़बूत है” “अगर पप्पू को ही वोट देना है तो गप्पू को ही वोट दे दो” इसे कहते हैं पप्पू के नाम पर गप्पू की योजना क्या आपको वाक़ई लगता है कि इतने तरह से देश को संकट में डालने वाले महापुरुष मोदी जी का कोई विकल्प नही? न समझोगे तो मिट जाओगे…. ये हिंदुस्तान वालों तुम्हारी दांसता तक न होगी दस्तानों में।

(लेखक आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद हैं। इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति ‘जनता का रिपोर्टर’ उत्तरदायी नहीं है।)

 

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