कांग्रेस की मुंबई इकाई में कलह: मिलिंद देवड़ा के इस्तीफे पर संजय निरुपम का तंज- ‘यह इस्तीफा है या ऊपर चढ़ने की सीढ़ी?’

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लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के हफ्तों बाद भी कांग्रेस में रविवार को इस्तीफे का सिलसिला जारी रहा। राहुल गांधी के विश्वस्त ज्योतिरादित्य सिंधिया और मिलिंद देवड़ा ने पार्टी में अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। सिंधिया ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) महासचिव के तौर पर इस्तीफा दिया है। वहीं, देवड़ा ने मुंबई कांग्रेस प्रमुख पद से इस्तीफा दिया है। दोनों नेताओं ने (लोकसभा) चुनाव में अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया।

मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद मिलिंद देवड़ा अब अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर आ गए हैं।कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने मिलिंद देवड़ा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुंबई कांग्रेस का कामकाज तीन लोगों की समिति द्वारा संभाले जाने के देवड़ा के सुझाव का निरुपम ने पुरजोर विरोध किया है। निरुपम ने ट्वीट कर तंज कसते हुए कहा कि यह इस्तीफा है या ऊपर चढ़ने की सीढ़ी? पार्टी को ऐसे ‘कर्मठ’ लोगों से सावधान रहना चाहिए।

निरुपम ने बिना किसी का नाम लिए ट्वीट कर लिखा, “इस्तीफा में त्याग की भावना अंतर्निहित होती है। यहां तो दूसरे क्षण ‘नेशनल’ लेवल का पद मांगा जा रहा है। यह इस्तीफा है या ऊपर चढ़ने की सीढ़ी? पार्टी को ऐसे ‘कर्मठ’ लोगों से सावधान रहना चाहिए।”

दरअसल, देवड़ा ने कहा कि वह पार्टी को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाने की आशा करते हैं। उन्होंने इस साल के आखिर में होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव तक नगर पार्टी इकाई के कामकाज की देखरेख के लिए कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं की सदस्यता वाला एक अस्थायी सामूहिक नेतृत्व (समिति) गठित करने की सिफारिश की है।

देवड़ा ने कहा, ‘‘मैंने तीन सदस्यीय एक समिति (नगर पार्टी इकाई के कामकाज की देखरेख के लिए) का सुझाव दिया है और इस सिलसिले में उपयुक्त नामों के लिए नेता मुझसे संपर्क कर रहे हैं। मैं पार्टी को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाने की आशा करता हूं।…मैं मुंबई कांग्रेस को दिशानिर्देश देना और एकजुट करना जारी रखूंगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी को इस वक्त की जरूरत के मुताबिक भूमिकाएं निभाने के लिए तैयार होना होगा।’’ उन्होंने कहा कि 23 मई को घोषित लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक वास्तविकताएं बदल गई है। देवड़ा के कार्यालय द्वारा रविवार को एक बयान में कहा गया है कि भाजपा-शिवसेना का मुकाबला करना और ‘वंचित बहुजन आघाडी’ (प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाले मोर्चा) के प्रभाव को अस्वीकार करना महाराष्ट्र में कांग्रेस के लिए एक चुनौती है।

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद इस्तीफे की जताई थी इच्छा

देवड़ा ने 26 जून को नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद यह पद फौरन छोड़ने की इच्छा जताई थी। बयान में कहा गया है, ‘‘इस बात से अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे और के सी वेणुगोपाल को अवगत करा दिया गया है।’’ हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव से ठीक पहले देवड़ा को मुंबई कांग्रेस प्रमुख नियुक्त किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पार्टी को एकजुट करने के लिए मुंबई क्षेत्र कांग्रेस समिति(एमआरसीसी) की अध्यक्षता स्वीकार की थी। लेकिन मैंने राहुल गांधी से मिलने के बाद महसूस किया कि मुझे इस्तीफा दे देना चाहिए।’’ गौरतलब है कि हाल ही में राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष पद और कांग्रेस कार्यकारिणी समिति से इस्तीफा दे दिया था। उनका उत्तराधिकारी तय किया जाना अभी बाकी है।

देवड़ा ने लोकसभा चुनाव मुंबई-दक्षिण सीट से लड़ा था लेकिन शिवसेना के अरविंद सावंत से वह हार गए थे। भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष केशव चंद यादव ने भी चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए शनिवार को इस्तीफा दे दिया। बहरहाल, कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त होने तक पार्टी के कुछ और नेताओं के इस्तीफे देखने को मिल सकते हैं।

 

 

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