क्या एक बार फिर जेल जाएंगे संजय दत्त, जानिए क्या है पूरा मामला?

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बंबई हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से गुरुवार(27 जुलाई) को पूछा कि 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में दोषी सिने अभिनेता संजय दत्त को पांच साल की सजा भुगतने के लिये समर्पण करने के दो महीने के भीतर ही कैसे जल्दी जल्दी पैरोल तथा एक के बाद एक फरलो दिया गया।

संजय दत्त
फाइल फोटो- अभिनेता संजय दत्त

न्यायालय ने यह भी जानना चाहा है कि एक दोषी के अच्छे आचरण और व्यवहार का कैसे पता लगाया जाता है और किस आधार एवं मानदंड पर अभिनेता को जल्दी सजा में माफी दी गयी। कोर्ट ने कहा कि दत्त ने मई 2013 को आत्मसमर्पण किया था और जुलाई में उन्होंने फरलो तथा पैरोल पर रिहा किए जाने के लिए अर्जियां दी थी।

अदालत ने कहा कि आठ जुलाई 2013 को उन्होंने फरलो के लिए अपील की तथा 25 जुलाई को पैरोल पर रिहाई की अपील की। दोनों अर्जियां स्वीकार कर ली गई और वह भी साथ-साथ। कोर्ट ने कहा कि जेल प्रशासन दोषी के आत्मसमर्पण करने के दो महीनों के भीतर कैसे अच्छे व्यवहार और आचरण का पता लगा सकता है आम तौर पर जेल अधीक्षक अर्जियों को आगे भी नहीं बढ़ाते हैं। अधिकारी आवेदन फेंक देते हैं।

सरकार की तरफ से महाधिवक्ता आशुतोष कुम्बकोनी ने अदालत को बताया कि दत्त के साथ कोई खास बर्ताव नहीं किया गया। लेकिन अगर अदालत को लगता है कि राज्य सरकार ने अभिनेता को जल्द रिहाई देकर गलती की है तो वह उन्हें वापस जेल भेज सकती है।

इस पर अदालत ने कहा कि हम समय को पीछे नहीं ले जाना चाहते। हम इस समय दा को वापस भेजने का सुझााव नहीं देते, लेकिन हम बस चाहते हैं कि ऐसे मुद्दे बुद्धिसंगत हो ताकि भविष्य में कोई सवाल ना उठें। कोर्ट ने कहा कि हम केवल यह जानना चाहते हैं कि किस आधार और कसौटी वह उन्हें अच्छे आचरण के लिये जल्दी रिहा किया गया इस अच्छे आचरण और व्यवहार का कैसे पता चलता है हमारी अंतरात्मा को संतुष्ट होना चाहिए कि ये सभी कानून के अनुसार होना चाहिए।

हाई कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में फरलो और पैरोल तब भी नहीं दी जाती जब दोषी के माता या पिता मृत्यु शया पर होते हैं। पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। अदालत शहर के निवासी प्रदीप भालेकर की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सजा काटने के समय दा को बार-बार दी गई पैरोल और फरलो पर सवाल उठाया गया है। याचिका में भालेकर ने आरोप लगाया है कि दा को जल्दी रिहा करके जेल विभाग ने उन्हें अनुचित लाभ दिया है।

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