ट्रोल होने के बाद अब संबित पात्रा ने ‘उज्ज्वला योजना’ के समर्थन में जारी किया नया वीडियो

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और ओडिशा के पुरी संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के प्रत्याशी संबित पात्रा ने पिछले दिनों अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक गरीब परिवार के साथ उनके घर पर भोजन करते हुए वीडियो साझा किया था। हालांकि, वीडियो शेयर करने के कुछ देर बाद ही उन्हें ट्विटर पर लोगों ने ट्रोल करना शुरू कर दिया। दरअसल, इस वीडियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरकार की बहुचर्चित ‘पीएम उज्ज्वला योजना’ की सफलता पर किए गए दावों की पोल खोलकर रख दी थी।

दरअसल, पात्रा द्वारा शेयर किए गए वीडियो में एक बूढ़ी औरत को पारंपरिक जलाऊ लकड़ी का उपयोग करके भोजन तैयार करते हुए दिखाया गया था, जिसके बाद उन्हें काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। उनके आलोचकों के अनुसार, पात्रा ने इस वीडियो के जरिए की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा बहुप्रचारित उज्जवला योजना की सफलता को उजागर किया था। लोगों ने पूछा था कि आखिर उज्ज्वला योजना का क्या हुआ? जो एक बुजुर्ग विधवा महिला लकड़ी के चुल्हे पर खाना बनाने को मजबूर है।

इस बीच सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के बाद बीजेपी प्रवक्ता ने अब उज्जवला योजना के समर्थन में एक नया वीडियो जारी कर सफाई दी है। अपनी चुनावी अभियानों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव के डर से पात्रा ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर उस वृद्ध महिला के साथ एक चैनल द्वारा लिए इंटरव्यू का वीडियो ट्वीट किया। पात्रा द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में एक रिपोर्टर द्वारा बूढ़ी महिला से पूछा गया कि क्या उसे मोदी सरकार की उज्जवला योजना से लाभ हुआ है?

इस पर महिला ने ‘रिपोर्टर’ को बताया कि उसके परिवार को लगभग एक महीने पहले सरकार से एलपीजी कनेक्शन मिला था, लेकिन वह पारंपरिक तरीके से जलाऊ लकड़ी का उपयोग करके खाना बनाना पसंद करती थी। उनके मुताबिक उनकी बहू खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करती है।

पात्रा ने ट्वीट किया, “कौन कहता है कि बूढ़ी माँ को उज्ज्वला योजना के माध्यम से गैस कनेक्शन नहीं मिला, माँ ने बताया कि बहू उसपर खाना बनाती है। घर मोदी ने दिया, इज्जतघर मोदी ने दिया, उज्जवला मोदी ने दिया तो 19 साल तक @bjd_odisha सरकार ने क्या किया??”

बता दें कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का दावा है कि ग्रामीण भारतीय इलाकों के करीब एक करोड़ घरों में घरेलू गैस सिलेंडर पहुंचाने की उसकी यह योजना बेहद कामयाब रही है और इसके चलते प्रदूषण फैलाने वाले घरेलू ईंधनों के इस्तेमाल में काफी कमी हुई है। पीएम मोदी अपनी चुनावी रैलियों में अक्सर यह दावा करते रहे हैं कि ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के पास गैस सिलेंडर और चूल्हे नहीं होने के कारण उन्हें धुएं में खाना पकाने के लिए मजबूर होना पड़ता था, लेकिन उनकी सरकार ने उज्जवला योजना के जरिए उनकी परेशानियों को समाप्त कर दिया है।

 

 

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