साक्षी मलिक के कोच ने कहा- अभी तक नहीं मिले पैसे और प्रमोशन, हरियाणा सरकार ने दी थी चेक की फोटोकॉपी

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भारत की महिला फ्रीस्टाइल कुश्ती टीम के कोच कुलदीप मलिक ने भले ही रियो ओलंपिक में साक्षी मलिक की सफलता में अहम भूमिका अदा की हो लेकिन उन्हें अभी तक कोई नकद पुरस्कार या सम्मान नहीं मिला है। साक्षी के साथ रियो खेलों से लौटने के बाद हरियाणा सरकार ने उन्हें बहादुरगढ़ में सम्मान समारोह में 10 लाख रूपये के चेक की एक फोटोकॉपी भेंट की थी लेकिन एक महीने बाद साई कोच को अभी तक असली चेक नहीं मिला है।

रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु ने 29 अगस्त को जब साक्षी को खेल रत्न दिया था, तब उसे उन्हें ‘पदोन्नति का वादा’ किया था लेकिन यह भी बस मुंह के शब्द ही बने हुए हैं। कुलदीप उत्तरी रेलवे में मुख्य टिकट इंस्पेक्टर हैं, उन्होंने इस बात का खुलासा किया। उन्होंने पिछले एक महीने में हरियाणा सरकार और रेलवे खेल संवर्धन बोर्ड से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन यह बेकार ही गया है।

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भाषा की खबर के अनुसार, साक्षी को 2011 से कोचिंग देने वाले कुलदीप ने कहा, ‘साक्षी के लिये भले ही बड़े नकद पुरसकार हों और सुपर लग्जरी बीएमडब्ल्यू कार हो, लेकिन मुझे कुछ नहीं मिला, यहां तक कि वादे भी अभी पूरे नहीं हुए हैं। मुझे एक भी पैसा नहीं मिला है। मैंने बार बार चेक के लिये पूछा है लेकिन अधिकारी इसे टालते रहे हैं।’

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बता दें, रियो ओलंपिक में कांस्य पदक की बदौलत साक्षी मलिक ने नवीनतम यूडब्ल्यूडब्ल्यू (यूनाईटेड विश्व कुश्ती) रैंकिंग में शीर्ष पांच में जगह बनाई है और अब महिला 58 किग्रा वर्ग में करियर के सर्वश्रेष्ठ चौथे स्थान पर हैं। ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी साक्षी को इससे पहले कोई रैंकिंग हासिल नहीं थी।

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ओलंपिक के दौरान क्वार्टर फाइनल में घुटने की चोट के कारण बाहर हुई एक अन्य भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट 48 किग्रा वर्ग में दो स्थान के फायदे से 11वें स्थान पर पहुंच गई है। पुरुष फ्रीस्टाइल में संदीप तोमर और बजरंग पूनिया ही भारतीय पहलवानों में शीर्ष 20 में जगह बनाने में सफल रहे हैं। ओलंपिक में शुरुआती दौर में ही हारकर बाहर हुए संदीप 57 किग्रा वर्ग में 15वें जबकि बजरंग 61 किग्रा वर्ग में 18वें स्थान पर हैं।

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