सबरीमाला के मुख्य पुजारी ने महिलाओं से की मंदिर नहीं आने की अपील

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केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश को लेकर घमासान जारी है। भगवान अयप्पा के दर्शन करने पहुंचीं महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से रोका जा रहा है और अब तक किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया गया। इस बीच मंदिर के मुख्य पुजारी कंदारू राजीवारू ने 10 से 50 साल की महिलाओं से सन्निधानम नहीं आने और समस्या नहीं पैदा करने की अपील की है।

Photo: HT

हालांकि सबरीमाला (सबरीमला) के मुख्य पुजारी कंदारू राजीवारू ने गुरुवार को इन खबरों को खारिज कर दिया कि पूजा अर्चना के लिए एक विशेष आयु वर्ग की महिलाओं के भगवान अयप्पा मंदिर में प्रवेश करने पर इस मंदिर को तंत्री परिवार द्वारा बंद कर देने की योजना है।

राजीवारू ने सोशल मीडिया पर इस बारे में कुछ खबरों व्यापक रूप से साझा किए जाने के बाद मंदिर परिसर, सन्निधानम में यह कहा। साथ ही मुख्य पुजारी ने 10 से 50 आयुवर्ग की महिलाओं से सन्निधानम नहीं आने और समस्या नहीं पैदा करने की अपील की।

गौरतलब है कि इस आयुवर्ग में रजस्वला की स्थिति को लेकर 10-50 वर्ष की उम्र वाली महिलाओं के मंदिर में प्रवेश का विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘मासिक पूजा एवं अनुष्ठान करना हमारा कर्तव्य और जिम्मेदारी है। हम परंपरा नहीं तोड़ेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। लेकिन, श्रद्धालुओं की भावनाओं और मंदिर की परंपरा एवं रीति रिवाज पर विचार करते हुए मैं आपसे (युवतियों से) सबरीमला नहीं आने का विनम्र अनुरोध करता हूं।’

राजीवारू ने हर किसी से यह अनुरोध किया कि वे मंदिर परिसर को रणक्षेत्र में तब्दील नहीं करें। इस बीच, पलक्कड़ जिले के वीएन वासुदेवन नंबूदरी को सबरीमला भगवान अयप्पा मंदिर का अगले एक साल के लिए नया मुख्य पुजारी चुना गया है। वह फिलहाल बेंगलुरु में अयप्पा मंदिर में पुजारी के तौर पर सेवा दे रहे हैं। चेंगन्नूर के रहने वाले एमएन नारायणन नंबूदरी मलिकाप्पुरम मंदिर के नए पुजारी होंगे। दोनों पुजारी 17 नवंबर से अपना कामकाज संभालेंगे।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटाए जाने के बाद केरल के मशहूर सबरीमाला मंदिर के कपाट बुधवार (17 अक्टूबर) शाम को मासिक पूजा के लिए खोले गए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 10 से 50 साल उम्र की कोई भी महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकी और उन्हें रास्ते से ही लौटना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को अपने ऐतिहासिक फैसले के माध्यम से केरल के सबरीमाला स्थित अय्यप्पा स्वामी मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश का रास्ता साफ कर दिया। शीर्ष न्यायालय के 4:1 के बहुमत से अपने फैसले में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की इजाजत देते हुए कहा कि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लैंगिक भेदभाव है और यह परिपाटी हिंदू महिलाओं के अधिकारों का हनन करती है। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले का सभी ने स्वागत किया है।

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