मक्का मस्जिद ब्लास्ट: असीमानंद सहित 5 आरोपियों को बरी करने वाले जज बोले- ‘RSS से जुड़ने का मतलब सांप्रदायिक या समाज विरोधी नहीं’

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हैदराबाद की मक्का मस्जिद धमाके के मामले में असीमानंद समेत 5 आरोपियों को बरी करने वाले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के स्पेशल जज के रविंदर रेड्डी ने सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर एक अहम टिप्पणी की थी। जज रेड्डी ने एनआईए द्वारा कोर्ट में दिए तर्क को खारिज करते हुए कहा था कि आरएसएस से जुड़ाव का यह मतलब नहीं है कि वह शख्स सांप्रदायिक या फिर समाज विरोधी है। इस दौरान उन्होंने सीबीआई को भी विश्वसनीय नहीं माना था। 

नवभारत टाइम्स के मुताबिक फोर्थ एडिशनल मेट्रोपॉलिटन सेशंस जज ऐंड स्पेशल जज (एनआईए मामले) रविंदर रेड्डी ने NIA के आरोप पर बहस के दौरान अभियोजन पक्ष से कहा कि क्या देवेंदर गुप्ता इसलिए सांप्रदायिक थे, क्योंकि वह एक आरएसएस प्रचारक थे?

जज ने 140 पेज के फैसले में लिखा, ‘आरएसएस कोई गैरकानूनी रूप से काम करने वाला संगठन नहीं है। अगर कोई व्यक्ति इसके लिए काम करता है तो इसके कारण उसके सांप्रदायिक या असामाजिक होने की गुंजाइश नहीं होती है।’ अपने फैसले में जज रेड्डी ने मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस को 18 पॉइंट्स में सीमित कर दिया और हर एक पर विस्तार से चर्चा की।

बता दें कि मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में असीमानंद समेत पांच आरोपियों को बरी करने के कुछ घंटों बाद ही जज रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हाई कोर्ट ने जज रेड्डी का इस्तीफा नामंजूर करते हुए उन्हें तुरंत ड्यूटी पर लौटने को कहा है। रेड्डी ने अपने इस्तीफे के लिए निजी कारणों का हवाला देते हुए कहा था कि इसका मक्का ब्लास्ट के फैसले से कोई लेना-देना नहीं है।

स्‍वामी असीमानंद सहित 5 आरोपी बरी

गौरतलब है कि सोमवार (16 अप्रैल) को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने 2007 मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में स्‍वामी असीमानंद सहित पांच आरोपियों को बरी कर दिया था। करीब 11 साल पहले हुए इस विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई थी और 58 अन्य लोग घायल हुए थे। मामले में 10 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

बहरहाल, उनमें से केवल पांच लोगों देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, स्वामी असीमानंद उर्फ नब कुमार सरकार, भरत मोहनलाल रतेश्वर उर्फ भारत भाई और राजेंद्र चौधरी को गिरफ्तार कर उनपर मुकदमा चलाया गया। मामले के दो अन्य आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कलसांगरा फरार हैं और एक अन्य आरोपी सुनील जोशी की मौत हो चुकी है। अन्य दो आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है।

सुनवाई के दौरान 226 चश्मदीदों से पूछताछ की गई और करीब 411 दस्तावेज पेश किए गए। स्वामी असीमानंद और भारत मोहनलाल रातेश्वर जमानत पर हैं जबकि तीन अन्य इस समय न्यायिक हिरासत में केेंद्रीय जेल में हैं। राजस्थान की एक अदालत ने अजमेर दरगाह विस्फोट मामले में मार्च 2017 में गुप्ता और अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

 

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