अयोध्या मामला: …तो क्या श्री श्री रविशंकर को मध्यस्थ बनाना RSS को भी नहीं आया रास?, पढ़ें- क्या है पूरा मामला?

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सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामला शुक्रवार (8 मार्च) को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। सर्वोच्च अदालत ने मध्यस्थता के जरिए इस मसले को सुलझाने का आदेश दिया है। न्यायालय ने अयोध्या के राम जन्म भूमि बाबरी मस्जिद जमीन विवाद को मध्यस्थता के जरिये सुलझाने का आदेश दिया तथा एक कमेटी का गठन भी किया।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमें इस मसले को सुलझाने के लिए मध्यस्थता का रास्ता अपनाने में कोई कानूनी बाधा नजर नहीं आती है। संविधान पीठ ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एफ एम कलिफुल्ल के नेतृत्व में तीन सदस्यी मध्यस्थता समिति गठित की है। समिति में सामाजिक कार्यकर्ता और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता राम पंचू शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय पैनल में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर को शामिल किए जाने पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमिन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बाद अब खबरों की मानें तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी पैनल में उन्हें शामिल करने पर आपत्ति जताई है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आरएसएस और अखाड़ा परिषद श्रीश्री रविशंकर को अयोध्या विवाद में मध्यस्थ नियुक्त करने के खिलाफ हैं। इन संस्थाओं का कहना है कि श्रीश्री हिंदू संप्रदाय के संतों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

समय लाइव की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आरएसएस चाहता है कि यदि मध्यस्थ ही बनाना है तो अखाड़ा परिषद की सलाह पर किसी संत को बनाया जा सकता है, क्योंकि बिना अखाड़ा परिषद की सहमति के अयोध्या विवाद का हल नहीं सकता। बता दें कि अयोध्या विवाद में निर्मोही अखाड़ा पार्टी भी है।

समय लाइव के मुताबिक, संतों की तरफ से श्रीश्री का विरोध हो रहा है। गत 8, 9 और 10 मार्च को इंदौर में हुई आरएसएस की प्रतिनिधि सभा में राममंदिर निर्माण पर विस्तार से चर्चा हुई, जहां श्रीश्री रविशंकर के पैनल में शामिल होने पर भी चर्चा हुई।

रविशंकर पर असदुद्दीन ओवैसी भी जता चुके हैं आपत्ति

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय पैनल में रविशंकर को शामिल किए जाने पर असदुद्दीन ओवैसी पहले ही आपत्ति जता चुके हैं। ओवैसी ने शुक्रवार को कहा था कि श्री श्री रविशंकर को सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थ बनाया है, लेकिन उनका पहले का एक बयान सबके सामने है, जिसमें वह कहते हैं कि अगर मुसलमान अयोध्या पर अपना दावा नहीं छोड़ते हैं तो भारत सीरिया बन जाएगा।

AIMIM चीफ ने कहा, ”श्री श्री रविशंकर जिन्हें मध्यस्थ नियुक्त किया गया है, उन्होंने इससे पहले एक बयान में कहा था कि अगर मुसलमान अयोध्या पर अपना दावा नहीं छोड़ेंगे तो भारत सीरिया बन जाएगा। अच्छा होता कि अगर सुप्रीम कोर्ट एक किसी तटस्थ व्यक्ति को (अयोध्या मामले में मध्यस्थता की) जिम्मेदारी सौंपता।”

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री श्री रविशंकर ने कहा कि सदियों से जारी संघर्ष को समाप्त करना ही हम सबका लक्ष्य होना चाहिए। श्री श्री ने ट्वीट कर कहा, ‘सबका सम्मान करना, सपनों को साकार करना, सदियों के संघर्ष का सुखांत करना और समाज में समरसता बनाए रखना- इस लक्ष्य की ओर सबको चलना है।’

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि मध्यस्थता की प्रक्रिया फैजाबाद में होगी, जिसकी रिपोर्टिंग मीडिया नहीं कर सकेगा। पीठ ने कहा कि यह प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी हो जानी चाहिए। न्यायालय ने कहा कि मध्यस्थता कार्यवाही की सफलता सुनिश्चित करने के लिए ‘‘अत्यंत गोपनीयता’’ बरती जानी चाहिए और प्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस कार्यवाही की रिपोर्टिंग नहीं करेगा।

 

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