RSS के स्थापना दिवस पर बदल गई संघ कार्यकर्ताओं की ड्रेस

0

संघ के स्थापना दिवस पर हुए समारोह में संघ के कार्यकर्ताओं ने खाकी निक्करों की जगह गहरे भूरे रंग की चुस्त पतलूनें पहन रखी थी।
बीते 90 साल से चली आ रही खाकी निक्करों की जगह तो पतलूनों ने ली है लेकिन पारंपरिक बांस का लट्ठ अभी भी उनके गणवेश का हिस्सा है।

सन् 1925 में इस हिंदुत्व संगठन की स्थापना के बाद से ही इसके पूरे गणवेश में कमीजों से लेकर जूतों तक कई बदलाव आए हैं लेकिन अंग्रेजों के जमाने के सिपाहियों की वर्दी की तर्ज पर संघ की खाकी निक्करें लगातार गणपेश का हिस्सा बनी रहीं।

Also Read:  प्रणय रॉय के घर CBI का छापा, रवीश कुमार बोले- जब सब 'गोदी मीडिया' बने हुए हैं, एक ऐसा भी है जो गोद में नहीं खेलता

कार्यकर्ताओं द्वारा पहने जाने वाले मोजों का रंग भी खाकी से बदलकर गहरा भूरा कर दिया गया है. इसके अलावा अब से कार्यकर्ता गहरे भूरे रंग की पतलून के साथ सफेद रंग की कमीज और काली टोपी पहनेंगे. लट्ठ भी गणवेश का हिस्सा होगा।

RSS volunteers
Photo: Hindustan Times

उत्तरी और पूर्वी राज्यों में रहने वाले कार्यकर्ता भीषण सर्दी में गहरे भूरे रंग के स्वेटर भी पहनेंगे. ऐसे एक लाख स्वेटरों तैयार करने के लिए ऑर्डर दे दिया गया है।

Also Read:  उत्तर प्रदेश चुनाव में राजनीतिक पार्टियों ने एक वोट पर खर्च किए 750 रुपये

भाषा की खबर के अनुसार, संघ के संचार विभाग के प्रमुख मनमोहन वैद्य ने बताया, ‘‘विभिन्न मुद्दों पर संघ के साथ मिलकर काम करने के लिए समाज पहले से ज्यादा तैयार हुआ है. ऐसे में काम के दौरान कार्यकर्ताओं की सुविधा और आराम को देखते हुए गणवेश में बदलाव किया गया है. यह बदलाव बदलते वक्त के साथ कदमताल करने के लिए किया गया है.’’

Also Read:  Kerala CM blames RSS for political violence in state

उन्होंने बताया कि ऐसी आठ लाख पतलूनें देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित संघ कार्यालयों में भेजी गई हैं. इनमें दो लाख सिली हुई तैयार पतलूनें हैं जबकि दो लाख पतलूनों के कपड़े हैं।

गणवेश में बदलाव पर पहली बार साल 2009 में विचार किया गया था. साल 2015 में इस पर नए सिरे से विचार हुआ. अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने गणवेश में बदलाव का समर्थन किया था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here