‘जियो’ के विज्ञापन में PM मोदी की तस्वीर इस्तेमाल करने पर रिलायंस को देना होगा सिर्फ 500 रूपये का जुर्माना

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पिछले दिनों रिलायंस ने ‘जियों’ के विज्ञापन में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल अपने ब्रांड प्रचारक के रूप में किया था। इस विज्ञापन को सभी प्रमुख पत्रों के मुख पृष्ठ पर छापा गया था। विपक्ष द्वारा पुछे जाने पर अब सरकार ने प्रधानमंत्री की तस्वीर का बिना इजाजत रिलायंस द्वारा प्रयोग किए जाने पर 500 रूपये की कीमत का जुर्माना लगाया है।

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पिछले दिनों इस बात पर सरकार को तीखी आलोचनाओं से गुजरना पड़ा था कि कैसे एक बड़ी कम्पनी ने अपने प्रोडक्ट लांचिंग में ब्रांड एम्बेसटर के रूप में प्रधानमंत्री की तस्वीरों का इस्तेमाल कर सकती है? सरकार से पुछा जा रहा था कि क्या सरकार ने इस तस्वीरों के इस्तेमाल की परमिशन इन कम्पनियों को दी है?

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इस पर अब सरकार की तरफ से स्पष्टीकरण दे दिया गया है। गुरुवार (1 दिसंबर) को सूचना एंव प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने लिखित में जवाब दिया कि प्रधानमंत्री मोदी की फोटोग्राफ इस्तेमाल करने से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से कोई इजाजत नहीं ली गई थी।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, सरकार से रिलायंस जियो के बारे में यह सवाल समाजवादी पार्टी से सांसद नीरज शेखर ने पूछा था। राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने उसके जवाब में माना कि सरकार को पता था कि रिलायंस ने पीएम मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल किया था। इसपर विपक्ष ने सवाल खड़ा करते हुए हंगामा किया और पूछा कि किसी निजी कंपनी के विज्ञापन में पीएम की तस्वीर कैसे इस्तेमाल हो गई?

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इसके साथ ही ‘पेटीएम’ जैसे ई-वालेट कंपनी के ऐड में भी पीएम मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल हुआ था। उसको लेकर भी सवाल पूछा गया। विपक्ष ने आगे पूछा कि क्या पीएमओ ने दोनों कंपनी के खिलाफ बिना इजाजत के फोटो इस्तेमाल करने पर कोई कार्रवाई की?

इस पर सूचना एंव प्रसारण राज्यमंत्री राठौड़ ने कहा, ‘प्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग निवारण) अधिनियम’ को खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा देखा जाता है। उन्होंने बताया था कि ऐड के खिलाफ उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली। लेकिन फिर भी हम कानून तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा देते हैं।’

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रिलायंस की कंपनी ‘जियो’ पर लगया गया ये जुर्माना साल 1950 के कानून के तहत देना होगा जिसमें राष्ट्रीय प्रतीक चिन्हों या किसी का गलत नाम इस्तेमाल किए जाने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। फिलहाल यह जुर्माना देकर वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर बिना इजाजत इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट विज्ञापनों में छापे जाने के मामले से बच जाएगी।

इसके बाद सम्भावना बन रही है कि अब ‘पेटीएम’ पर भी सरकार अपना शिंकजा कसेगी और 500 रूपये का जुर्माना प्रधानमंत्री की तस्वीरों को अपने ब्रांड के रूप में इस्तेमाल करने पर वसूलेगी।

4 COMMENTS

  1. wah etana bada jurmana . saro ko photo ka use karana chahiye. Jio ne to aadhar se desh ko jodakar aadhar k data ko surakshit kar liya h. desh chain ki nind soye. dand jyada h thoda kam karane ki guhar relin ko lagani chahiye varana to ye jurmane se barabad ho jayegi. WAH INDIA. MERA DESH MAHAN.kya dandadhikari ko svavivek ka adhikar desh hit m nahi hota??????????????

  2. Shashi Kant Goyal
    1 hr ·
    “ब्लैक मनी” का जूमला पुराना हुआ, अब नया नारा है “कैशलैस”. आप को पता है क्यों? क्योंकि इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार 30 नवम्बर तक बैंकों में करीब १२ लाख करोड़ के पुराने 500 और 1000 के नोट आ चुके हैं. ये पूरी उम्मीद है कि 30 दिसम्बर की सीमा तक बाकी के 3 लाख करोड़ भी आ जायेंगे. मतलब , 15 लाख करोड़ के पूरे 500 और 1000 के नोट वापस. इसका मतलब ये हुआ कि ” ब्लैक मनी” 500 और 1000 के नोट में था ही नहीं. समझदार लोग पहले ही उसे किसी और रूप ( ज़मीन, सोना, डायमंड ) में बदल चुके हैं. शायद, इसलिए नोट जमा करने की समय सीमा अचानक से घटा दे गयी और मोदी सरकार जो सोच रही थी कि जो नोट रिकवर नहीं होंगे उसे काला धन मान के सरकार के प्रॉफिट में जोड़ देंगे , उसका ये प्लान फेल हो गया. ये भी याद रखना है कि नए नोट छपने का खर्चा करीब 1.28 लाख करोड़ तक जाएगा. मतलब खाया पिया कुछ नहीं और गिलास तोड़ा बारह आना. जैसेजेटली जी कल कह ही चुके हैं कि ये समस्या शायद 3 महीने तक खिंचे. तो मतलब पहले 2- 3 दिन की परेशानी बनी 50 दिन , लेकिन अब 50 दिन की जगह 3 महीने. लेकिन एक्सपर्ट की राय माने तो पूरे नोट छपने में करीब 6 महीने लगेंगे और इकोनोमी रिकवर करने में सालों. लोगों की परेशानी, बीमारी , गरीबी, पैसे की कमी से बच्चे, बूढों, रोगियों का मरना, मजदूर , किराने वालों का नुकसान , वो सब तो खैर ” A Little Inconvenience” है ही. तो मोदी सरकार समझ गयी है कि हमेशा की तरह ” ब्लैक मनी” भी एक जुमला ही निकला और बहुत ज़ल्द पब्लिक ये समझ जायेगी, भले ही सरकारी भोंपू मीडिया इसे दिखाए या न दिखाए. तो नया जुमला फेंका गया ” हो जाओ cashless” . मतलब किस किस्म का भद्दा मज़ाक है ये! जिस देश में क्रेडिट कार्ड सिर्फ 2 % लोगों के पास है, खाते सिर्फ आधी जनसंख्या के पास है, अंगेजी सबकी भाषा नहीं है, जिन गाँवों में ATM तो क्या बैंक्स भी नहीं पहुंचे, आप उनसे कह रहे हो ” हो जाओ cashless”. संवेदनहीनता की भी कोई सीमा होती है. अरे जो होना होता है, वो हो जाता है, उसके लिए ज़बरदस्ती नहीं करनी पड़ती. राजीव गाँधी का सपना था घर घर टीवी लाना. उन्होंने रामानंद सागर और बी आरचोपड़ा को बुला कर ” रामायण” और ” महाभारत” टीवी पर प्रसारित करने का प्लान बनाया और घर घर टीवी हो गया. कंप्यूटर आना था, आ गया! नरसिंहराव, मनमोहन सिंह को इंडिया की खिड़कियाँ , दरवाज़े खोलने थे, उन्होंने खोल दिए और देश हमेशा के लिए बदल कर हमें एक ग्लोबल संस्कृति का हिस्सा बना दिया. करने वाले पिछले 10 साल से cashless हैं और इन्टरनेट बैंकिंग कर रहे हैं उन्हें मोदी की सलाह की ज़रुरत नहीं . लेकिन cash को फ्रीज कर के लोगों को मजबूर कर के, आप लोगों को अपग्रेड नहीं बल्कि torture कर रहे हैं. लेकिन जैसे कि शुरू में कहा, शायद ” ब्लैक मनी” का मुद्दा हाथ से जाने के बाद अब मोदी सरकार के पास ” हो जाओ cashless” नारा ही बचा. आखिरकार 6 महीने लोगों को गुमराह करना है, मजबूरी है.

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