निजता के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू ने कहा – राष्ट्रहित से बड़ा कुछ नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार(24 अगस्त) को बड़ा फैसला सुनाते हुए निजता के अधिकार को भारत के संविधान के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया था। निजता के अधिकार के बारे में उच्चतम न्यायालय के एक हालिया फैसले का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू ने आज कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और हित सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने यहां कहा, ‘‘मैं यहां उच्चतम न्यायालय के फैसले की आलोचना करने नहीं आया हूं। यह देश का कानून बन गया है।

किरण रिजीजू

कानून और नीतियां बनाने की प्राथमिक जिम्मेदारी संसद के पास है। हमें देश के संप्रभु लोगों ने इसके लिए अधिकृत किया है। कानून बनाने की प्राथमिक जिम्मेदारी हमारे पास है।’’ केंद्रीय गृह राज्य मंत्री साइबर सुरक्षा पर एसोचैम द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

आपको बता दे कि प्रधान न्यायाधीश जे. एस. खेहर की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीने के अधिकार) के तहत दिए गए अधिकारों के अंतर्गत प्राकृतिक रूप से निजता का अधिकार संरक्षित है।

भाषा की खबर के अनुसार, मंत्री ने कहा कि निजता काफी महत्वपूर्ण है और यह मौलिक अधिकार का एक अंतर्भूत हिस्सा है। उन्होंने कहा कि संविधान में वर्णित प्रावधानों की समीक्षा का कोई सवाल ही नहीं है और इसमें कोई संदेह नहीं है। इसके साथ ही निजता बिना शर्त नहीं हो सकती। राष्ट्रीय हित भी एक चीज होती है।

राष्ट्रीय सुरक्षा भी कोई चीज है। उन्होंने कहा कि जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की आती है तो उनका निजी तौर पर मानना है कि राष्ट्रीय हित सबसे चीजों से ऊपर है। रिजीजू ने कहा कि जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना है, आधार के जरिए लाभ लोगों तक पहुंच सकती है, अगर भारतीय अर्थव्यवस्था को डिजिटल अर्थव्यवस्था में परिर्वितत कर दिया जाए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल या साइबर मंच द्विपक्षीय समझौतों का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि साइबर सुरक्षा की चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने हम जितना खुलते जा रहे हैं, हम उतने ही संवेदनशील हो रहे हैं।

गौरतलब है कि, इससे पहले 7 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच कहा था कि आधार से जुड़े जितने भी मुद्दे आ रहे हैं, उनका फैसला 9 जजों की बेंच ही कर सकती है। बेंच की अगुआई कर रहे जस्टिस जे. चेलामेश्वर ने साफ किया था कि जजों की संख्या का फैसला चीफ जस्टिस ही करेंगे। पिछले महीने सोशल वेलफेयर स्कीम्स के लिए आधार जरूरी किए जाने के मामले में भी दो जजों की बेंच ने फैसले पर रोक लगाने से मना कर दिया था।

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