VIDEO: रिफत जावेद का सवाल- ‘आखिर भ्रष्टाचार के मामले में दोहरा मापदंड क्यों अपना रही है BJP?’

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सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को सारदा चिटफंड मामले की जांच में सहयोग का निर्देश देते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के समक्ष शिलांग में पेश होने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि कुमार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई फिलहाल नहीं की जाएगी, न ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। अब मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। बता दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रविवार की रात साढ़े आठ बजे से ही धरने पर बैठी हुई हैं।

ममता का आरोप है कि मोदी सरकार सीबीआई का दुरुपयोग कर विपक्ष को डराने की कोशिश कर रही है। ममता की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार जानबूझकर उन्हें निशाना बना रही है। टीएमसी का आरोप है कि अगर केंद्र सरकार अगर इतनी निष्पक्ष है तो टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले सारदा चिट फंड घोटाले के दो मुख्य आरोपियों मुकुल रॉय और हेमंत बिस्वा शर्मा के खिलाफ जांच क्यों नहीं हो रही है?

रिफत जावेद ने बीजेपी पर लगाया भ्रष्टाचार पर दोहरे मापदंड का आरोप

न्यूज 18 उर्दू पर इसी मुद्दे को लेकर चर्चा के दौरान ‘जनता का रिपोर्टर’ के प्रधान संपादक और वरिष्ठ पत्रकार रिफत जावेद ने भी केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर भ्रष्टाचार को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर सारदा घोटाले के दो मुख्य आरोपियों पूर्व टीएमसी नेता मुकुल रॉय और असम के मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा के बीजेपी में शामिल होते ही एक महीने के भीतर सीबीआई जांच की आंच कैसे कम हो गई?

उन्होंने कहा कि रविवार रात को सीबीआई ने कोलकाता में कार्रवाई कर ममता बनर्जी को अगले चुनाव के लिए संजीवनी दे दी है, जिसके उनकी पार्टी को बड़ा फायदा होगा। रिफत ने कहा कि मुकुल रॉय पर बहुत बड़ी बहस होनी चाहिए, क्योंकि सीबीआई उनसे सारदा मामले में पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा उन्होंने पश्चिम बंगाल की पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष के बीजेपी में शामिल होने पर भी सवाल उठाया, जिनपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।

बता दें कि भारती घोष वही आईपीएस अफसर हैं, जिनके घर पिछले साल फरवरी महीने में सीआईडी ने 2.5 करोड़ कैश बरामद किया था। रिफत ने कहा कि यह कहां का नियम है कि जो भी बीजेपी में आता है वह पूरी तरफ से साफ सुथरा हो जाता है। मेरा ख्याल है कि बीजेपी का नाम किसी डिटर्जेंट पाउडर के नाम पर रख देना चाहिए और ऐलान कर दिया जाए कि कोई कितना भी भ्रष्ट हो लेकिन बीजेपी में शामिल होने के बाद साफ सुधरा हो जाएगा।

मुकुल रॉय और हेमंत शर्मा से हो चुकी है पूछताछ

बता दें कि वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुकुल रॉय और हेमंत बिस्वा शर्मा के खिलाफ सीबीआई की जांच शुरू हुई। रॉय से 30 जनवरी 2015 को पूछताछ भी की गई। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सारदा चिट-फंड घोटाले में मुकुल रॉय पर कंपनी के चेयरमैन सुदीप्त सेन के साथ कथित तौर पर मिलीभगत का आरोप था। लेकिन रॉय नवंबर 2017 में बीजेपी में शामिल हो गए, इसके बाद रॉय पर लगे आरोपों को लेकर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी नरम पड़ गई।

वहीं, हेमंत बिस्वा शर्मा से भी सीबीआई ने 26 नवंबर, 2014 को पूछताछ की थी। इसके ठीक दो महीने पहले ही सीबीआई ने गुवाहाटी स्थित उनकी पत्नी के न्यूज चैनल और उनके घर पर छापेमारी की थी। आरोपों के मुताबिक, हेमंत शर्मा पर सारदा कंपनी से हर महीने 20 लाख रुपये लेने के आरोप लगे। हालांकि, जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की। अगस्त, 2015 में असम में कांग्रेस के विधायक रहे हेमंत बिस्वा शर्मा भी बीजेपी में शामिल हो गए और उसके बाद से आज तक उन्हें भी सीबीआई ने पूछताछ के लिए नहीं बुलाया।

 

 

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