मध्यप्रदेश रिजल्ट घोटाला: बिना परिक्षा दिए ही पास हो गए 1200 छात्र

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मध्य प्रदेश के चर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल(व्यापमं) के बाद अब वहां पर रिजल्ट घोटाला सामने आया है जो व्यापम घोटाले से भी बड़ा माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी(आप) ने मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयीन शिक्षण संस्थान(एनआईओएस) नें रिजल्ट को लेकर खुलासा किया है।

रिजल्ट घोटाला

आप ने एनआईओएस द्वारा आयोजित हायर सेकेंडरी की परीक्षा में तीन केंद्रों से 12 सौ छात्रों को बगैर परीक्षा दिए ही उत्तीर्ण कर दिए जाने का दावा किया है साथ ही इस घोटाले को व्यापमं से भी बड़ा घोटाला करार दिया है।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने इस पर कहा है कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में घोटाले लगातार जारी हैं। अभी हाल में एनआईओएस द्वारा आयोजित हाइयर सेकेंडरी परीक्षा का घोटाला सामने आया है, जिसमें तीन परीक्षा केंद्र ऐसे हैं, जहां 12 सौ विद्यार्थी परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए और उन्हें उत्तीर्ण कर दिया गया।

दस्तावेजों को आधार बताते हुए उन्होंने दावा किया है कि इसमें 1200 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए, पर जब परिणाम आया तो सभी पास थे। इससे साफ जाहिर होता है कि मिलीभगत कर अरबों रुपये देकर फर्जी परीक्षा परिणाम बनवाए गए हैं। साथ ही अग्रवाल ने कहा कि उनके पास वे सारे दस्तावेज उपलब्ध हैं, जो इन गड़बड़ियों को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।

 

दिल्ली में सत्तारूढ़ पार्टी के नेता ने बताया कि राज्य में एनआईओएस के 280 केंद्र हैं, यह घोटाला इन्हीं तीन केंद्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार पूरे प्रदेश में होने की आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवराज सरकार का भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिलने के कारण ही इस तरह के घोटाले संभव हैं। साथ ही आप ने सभी केंद्रों की विस्तृत जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल(एसआईटी) से कराने की मांग की है।

बता दें कि, व्यावसायिक परीक्षा मंडल(व्यापमं) घोटाले का खुलासा होने के बाद बड़ी संख्या में पीएमटी में गड़बड़ियां सामने आई थीं। इस मामले की एसटीएफ(विशेष कार्य बल), एसआईटी(विशेष जांच दल) की जांच के बाद वर्तमान में सीबीआई(केंद्रीय जांच दल) जांच चल रही है। इस घोटाले में मध्य प्रदेश के कई बड़े नेताओं का नाम सामने आया था, यहां तक कि एमपी के राज्यपाल रहे रामनरेश यादव का भी नाम आया था।

ख़बरों के मुताबिक, इस मामले में अब तक करीब 40 से ज्यादा लोगों की संदिग्ध हालत में मौत हो चुकी है। घोटाले में घिरे गांधी मेडिकल कॉलेज के 47 छात्रों को बर्खास्त कर दिया गया था। इन सभी छात्रों पर 2008 से 2012 के बीच पीएमटी के जरिये गड़बड़ी कर दाखिला लेने का आरोप है।

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