कश्मीर: श्रीनगर में प्रदर्शन, हिंसा की घटनाओं के बाद फिर से पाबंदियां लागू

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आर्टिकल 370 हटाने के बाद से कश्मीर के श्रीनगर में एक दिन पहले हिंसा की घटनाओं के बाद रविवार को कुछ इलाकों में पाबंदियां कड़ी कर दी गईं। इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि सऊदी अरब से हज तीर्थयात्रियों का पहला बैच कश्मीर लौट आया है। उन्होंने बताया कि रविवार को 14वें दिन घाटी के कई हिस्सों में पाबंदियां जारी हैं।

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अधिकारियों ने बताया कि उन इलाकों में फिर से पाबंदियां लगा दी गई है जहां शनिवार को हालात बिगड़ गए। शहर में कई स्थानों पर और घाटी में अन्य जगहों पर पाबंदियों में ढील दी गई थी जिसके बाद परेशानी पैदा हो गई थी। उन्होंने बताया कि करीब 12 स्थानों पर प्रदर्शन हुए जिसमें कई प्रदर्शनकारी जख्मी हो गए। बहरहाल, अभी यह पता नहीं चला है कि कितने लोग घायल हुए। अधिकारियों ने बताया कि करीब 300 तीर्थयात्रियों के साथ आ रहे विमान सुबह श्रीनगर हवाईअड्डे पहुंचे। उन्होंने बताया कि तीर्थयात्रियों की सुचारू आवाजाही के लिए व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया, ‘‘हाजियों का स्वागत करने के लिए हवाईअड्डे पर परिवार के केवल एक सदस्य को अनुमति दी गई है। हाजियों और उनके रिश्तेदारों की आवाजाही के लिए सभी जिला प्रशासनों के समन्वय के साथ राज्य सड़क परिवहन प्राधिकरण (एसआरटीसी) की बसों को तैनात किया गया है।’’ उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों को तीर्थयात्रियों और उनके रिश्तेदारों को उन इलाकों से गुजरने देने की अनुमति देने के निर्देश दिए गए है जहां पाबंदियां लागू हैं। सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने शनिवार को बताया था कि घाटी में 35 पुलिस थाना इलाकों में प्रतिबंधों में ढील दी गई।

हालांकि, कई स्थानों पर युवाओं और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें देखने को मिली जिसके बाद पाबंदियों को फिर से लागू कर दिया गया। शनिवार शाम को कंसल ने कहा कि घाटी में छह स्थानों पर प्रदर्शन हुए जिनमें आठ लोगों को चोटें आई। अधिकारियों ने बताया कि शहर के कई इलाकों में लैंडलाइन टेलीफोन सेवाएं बहाल कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि शहर के सिविल लाइंस इलाकों और घाटी में अन्य जिला मुख्यालयों में कुछ निजी वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन इलाकों में कुछ दुकानें भी खुली हैं।

गौरतलब है कि, केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख नाम से दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने के फैसले से पहले चार अगस्त की आधी रात से ही राज्य में मोबाइल फोन, इंटरनेट, लैंडलाइन सेवाओं सहित टेलीफोन सेवाएं स्थगित कर दी गई थीं। (इंपुट: भाषा के साथ)

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