फिल्म समीक्षा: इश्क में बेवफाई, जलन और तड़प की कहानी है ‘रंगून’

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विशाल भारद्वाज की ‘रंगून’ आज सिनेमाघरों में प्रर्दशित कर दी गई है। रंगून में प्यार में धोखा, बदला, जलन और तड़प को दर्शान वाली कहानी है जिसे आजादी से पहले के दशक में दिखाया गया हैं। गुलाम भारत के दौर में और विश्वयुद्ध के परिदृश्य में चलने वाली ‘रंगून’ की कहानी प्रेम त्रिकोण पर आधारित है।

आजादी से पूर्व का भारत दो अलग तरह की विचाारधाराओं से बंधा हुआ था जिनमें से एक महात्मा गांधी की अंहिसा और दूसरे सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा जिसके अनुसार दुश्मन के हाथ से मरने से अच्छा है कि उन्हें मार डालो। इसी बीच तीन किरदार फिल्म में नुमाया होते है। मिस जुलिा (कंगना रनौत) 40 के दशक की शानदार एक्ट्रेस जिनके पीछे लोग पागल हैं। एक पारसी प्रोड्यूसर जिसकी खुद की शादी खतरे में है और फौजी नवाब मलिक।

प्रेम के त्रिकोण में फंसी कहानी भावनाओं के ज्वारभाटे के साथ खेलती रहती है। विशाल भारद्वाज इस बार जो कहानी लेकर हमारे सामने आए हैं वो शेक्सपीयर की कहानी पर आधारित नहीं है। विशाल अधिकांशत शेक्सपीयर की कहानियों पर की बेस होकर अपनी फिल्म का निर्माण करते है। विशाल ने बहुत सोच-समझकर स्टारकास्ट का चयन इस फिल्म के लिए किया है। जो अपनी पूरी ईमानदारी के साथ अपने रोल से न्याय करते नज़र आते है। तीनों किरदारों में कंगना रनौत ही फिल्म की असली हीरो हैं। आपको इस कैरेक्टर से प्यार हो जाएगा।

फिल्म – रंगून
स्टारकास्ट – शाहिद कपूर, कंगना रनौत, सैफ अली खान
डायरेक्टर – विशाल भारद्वाज
प्रोड्यूसर – साजिद नाडियाडवाला, विशाल भारद्वाज, वायाकॉम 18
लेखक – मैथ्यू रॉबिन्स, विशाल भारद्वाज, सबरीन धवन

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