5 सालों में पहली बार गिरी बाबा रामदेव की पतंजलि की बिक्री

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पतंजलि आयुर्वेद कंपनी के संस्थापक और योग गुरु बाबा रामदेव ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रोलआउट को पिछले साल ‘ऐतिहासिक और सकारात्मक’ कदम कहा था। लेकिन उसके एक साल बाद ही जीएसटी और कमजोर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के चलते आई मुश्किलों की वजह से पांच साल में पहली बार पतंजलि की बिक्री गिर गई है।

रामदेव
फाइल फोटो

केयर रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच साल में पहली बार ऐसा है जब पतंजलि कंपनी का मुनाफा कम हुआ है और बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी की बिक्री में 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद कंपनी की बिक्री 8148 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। 2013 के बाद पहली बार यह गिरावट आई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि पतंजलि आयुर्वेद की बिक्री में गिरावट की मुख्य वजहें, जीएसटी को अपनाने में आई बाधा और सप्लाइ चेन की कमजोरी थीं।

हालांकि, कंपनी के संस्थापक बाबा रामदेव इसे 3 से 5 सालों में 20,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंचाना चाहते थे। पतंजलि का रेवेन्यू 2016 में 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जबकि 2012 में यह 500 करोड़ रुपये से भी कम था। रिपोर्ट के मुताबिक, पतंजलि से जुड़े एक सूत्र बताया कि पतंजलि की टेक्नोलॉजी GST के लिए तैयार नहीं थी। इन्वेंट्री और बिल बनाने का सिस्टम पटरी पर नहीं आ पाया।

हालांकि पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने ब्लूमबर्ग क्विंट को फोन पर अपने सिस्टम में कमी की इन खबरों का खंडन किया। लेकिन उन्होंने माना कि ड्रिस्ट्रीब्यूटर्स ने GST को अपनाने में ढिलाई दिखाई। अब कंपनी नए सिस्टम के मुताबिक ढलने की कोशिश कर रही है, लेकिन दिक्कत अभी भी है।

पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक पतंजलि ने कहा था कि इस वित्त वर्ष के अंत तक परिधान के लगभग 100 आउटलेट खोलने की योजना है और मार्च 2020 तक ज्यादातर 500 स्टोर्स का नेटवर्क होगा।

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