“बोलने की बीमारी है क्या?”: ‘रिपब्लिक भारत’ पर ‘पूछता है भारत’ कार्यक्रम के दौरान लाइव टीवी डिबेट में अर्नब गोस्वामी से बोले किसान नेता राकेश टिकैत

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मोदी सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर किसान पिछले 55 दिनों से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर डटे हुए हैं तो वहीं सरकार भी नरम पड़ती नहीं दिख रही। किसान आंदोलन को लेकर लगभग हर टीवी चैनल पर डिबेट शो का भी आयोजन किया जा रहा है। ऐसा ही एक शो अर्नब गोस्वामी ने रिपब्लिक भारत पर आयोजित किया गया, जिसमें किसान नेता राकेश टिकैत भी शामिल थे। इस लाइव शो के दौरान टिकैत एंकर पर निशाना साधते हुए उनसे पूछते है कि, आपको बोलने की बीमारी है क्या?

अर्नब गोस्वामी

दरअसल, पूछता है भारत के लाइव डिबेट के दौरान अर्नब गोस्वामी चीखते हुए किसान नेता से पूछते हैं, “राकेश टिकैत जी, आपसे मेरा एक सवाल है। ये बताइए, ये क्या हो गया, मुझे बताया गया कि अब कनाडा से, सूरत से नहीं कनाडा से, गुवाहाटी से नहीं कनाडा से, कलकत्ता से नहीं कनाडा से। कनाडा के मंत्री आकर बैठ गए। अरे टिकैत जी ये क्या हो रहा है, पूछता है भारत? क्या ये सच है कि कनाडा के मंत्री आकर बैठ गए वहां पर? क्या हमारे देश के मंत्री भी अब जाकर कनाडा में प्रदर्शन करेंगे? पूछता है भारत? बताइए, राकेश टिकैत जी देखिए। नरेंद्र मोदी से सीधी लड़ाई में मुंह की खाते हैं ये लोग। मुझे, बताइए कनाडा का नेता इधर कैसे आया? उसकी हिम्मत कैसे हुई? बताइए वो है कौन? कौन है कनाडा का वो मंत्री जो हमारे देश में आकर राजनीति कर रहा है?”

इस पर राकेश टिकैत रिपब्लिक टीवी के संस्थापक से कहते हैं, “वकील बन गया। मैं बता रहा हूं। बात तो सुन, अरे बोलूं। अच्छा सुनो तो सही तभी तो बताऊंगा ना। अरे बीमारी है बोलने की?” इसपर अर्नब टोकते हुए बोलते हैं, “बीमारी नहीं टिकैत जी, आदत है आदत।” तभी राकेश टिकैत कहते हैं, “अरे मुझसे पूछा है तो मैं ही बताऊंगा, बोलने दो। पहले तो भाजपा सरकार बड़ी कमजोर रही है हमारी। हर मुद्दे पर देश के प्रधानमंत्री को सामने ले आए, प्रधानमंत्री को इनको बचाना था। इनकी जो एडवाइजरी कमेटी है, प्रधानमंत्री की वो गलत है, गलत सलत बुलवाती है।”

वह आगे कहते हैं, “भाई प्रधानमंत्री जी से गलत बयानबाजी क्यों करवाते हो आप? एक देश के प्रधानमंत्री की ऐसे इमेज खराब होती है। वो भाजपा के प्रधानमंत्री नहीं हैं वो देश के प्रधानमंत्री हैं। आपने उनसे दो-तीन चीजें गलत करवाईं। पहली स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू कर दिया, फिर वो लागू नहीं हुई, तो भाई इस तरह का दस्तावेज मत दो उनको। ये शर्म की बात है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री से आप झूठ बुलवाते हो।”

किसान नेता ने आगे कहा, “आप तो बहस करते हो कागज लेकर। अरे कनाडा वाले मंत्री से हमारा क्या मतलब है, कनाडा वाला आ गया होगा। हमारे देश के मंत्री कमजोर हो गए होंगे। पंजाब के हैं ना वो, आ गया होगा। बैन है उनपर तो रोको उनको।”

वीडियो 20 मिनट के बाद से देखें:

गौरतलब है कि, केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के अंदरूनी इलाकों से आए हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर से विरोध प्रदर्शन पर बैठे हैं। वे हरियाणा की सिंघु, टिकरी सीमा और उत्तर प्रदेश की गाजीपुर और चिल्ला सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। किसानों के इस आंदोलन को कई संगठनों और राजनितिक दलों का समर्थन मिल चुका है।

कड़ाके की ठंड के बाद भी विरोध-प्रदर्शन कर रहें प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि जब तक तीनों काले कानून वापस नहीं लिए जाते हम यहीं बैठे रहेंगे। उनकी मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी जाए। किसानों ने 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को दिल्ली में किसान परेड निकालने की चेतावनी दी है।

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