राकेश अस्थाना की नियुक्ति पर मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट की नोटिस

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सीबीआई इंचार्ज डायरेक्टर की अस्थाई नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी। इंचार्ज डायरेक्टर राकेश अस्थाना की नियुक्ति को वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती थी। प्रशांत भूषण ने एक याचिका में कहा था कि केंद्र सरकार ने राकेश अस्थाना को इंचार्ज डायरेक्टर गैरकानूनी तरीके से बनाया है।

Rakesh Asthana

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र से दो मुद्दों पर जवाब मांगा कि पूर्व स्पेशल डायरेक्‍टर आरके दत्ता का सीबीआई में टेन्योर कम करके गृह मंत्रालय में बिना कमेटी की सिफारिश के कैसे भेजा गया। दत्ता कोल और 2G घोटाले की जांच में शामिल थे और सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इससे जुड़े अफसरों का ट्रांसफर करने से पहले कोर्ट की अनुमति लेनी होगी।

मीडिया रिपोट्स के अनुसार, इस पर केंद्र की ओर से एडीशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) तुषार मेहता ने कहा कि फिलहाल इसके लिए केंद्र से जरूरी निर्देश लेने होंगे। अब केंद्र इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 16 दिसंबर तक अपना जवाब दाखिल करेगा।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में एनजीओ की ओर से एडवोकेट प्रशांत भूषण ने अर्जी में कहा है कि सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति पीएम, नेता प्रतिपक्ष और सीजेआई करते हैं जबकि इस मामले में ऐसा नहीं किया गया है। जिन्हें नियुक्त किया जाना था उनका ट्रांसफर कर दिया गया।

प्रशांत भूषण ने अपनी याचिका में दावा किया था कि सरकार का यह निर्णय पहले से ही तय था। सीबीआई की नियुक्ति के लिए जो कॉलेजियम गठित की गई थी, उसकी एक भी बैठक सरकार ने अभी तक नहीं बुलाई है। सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति देश के प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और नेता विपक्ष की सहमति से होती है।

आपको बता दे कि 1 दिसंबर की रात को एक चौंकाने वाला निर्णय करते हुए सीबीआई में नंबर 2 रहे स्पेशल डायरेक्टर रूपक कुमार दत्ता को गृहमंत्रालय में ट्रांसफर कर दिया गया था। एडिशनल डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे नंबर तीन की पोजिशन वाले आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना को प्रमोशन दे कर इंचार्च डायरेक्टर बना दिया गया था।

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