पद्मावत विवाद: राजपूतों ने देखी फिल्म, कहा- इसमें राजपूत समाज के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है, अब हम संतुष्ट हैं

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सुप्रीम कोर्ट से संजय लीला भंसाली की विवादास्पद फिल्म ‘पद्मावत’ को रिलीज करने की हरी झंडी मिलने के बावजूद बुधवार (24 जनवरी) को राजधानी दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रुप ले लिया।

करणी सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा अहमदाबाद, जयपुर, मथुरा, भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, रतलाम और मुरैना में प्रदर्शन किया गया। करणी सेना के भारी विरोध और प्रदर्शन के बीच गुरुवार (25 जनवरी) को ‘पद्मावत’ सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। हालांकि, हिंसक प्रदर्शनों के बीच मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा है कि उसके सदस्य ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म का प्रदर्शन राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और गोवा में नहीं करेंगे।

वहीं, दूसरी ओर पंजाब के राजपूत महासभा ने फिल्म पद्मावत का विरोध वापस ले लिया है। जनसत्ता.कॉम की ख़बर के मुताबिक, बुधवार (24 जनवरी) को राजपूत समाज से जुड़े कुछ लोगों ने पठानकोट में एक स्पेशल स्क्रीनिंग में फिल्म पद्मावत देखी। फिल्म देखने के बाद राजपूत महासभा के अध्यक्ष दविन्दर दर्शी ने कहा कि हम पहले इसका विरोध कर रहे थे, जिसकी वजह से सिनेमा बनाने वालों को इसमें 300 कट लगाने पड़े। उन्होंने कहा, ‘हमने फिल्म देखी, इसमें राजपूत समाज के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है, अब हम संतुष्ट हैं और फिल्म के रिलीज होने से हमें कोई परेशानी नहीं है।’

रिपोर्ट के मुताबिक, दविन्दर दर्शी ने कहा कि राजपूत समुदाय के 30 नेताओं ने प्रशासन के अनुरोध पर फिल्म देखी है और इसमें अब कोई विवाद नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के ज्यादातर सिख और हिन्दू राजपूत पठानकोट, होशियारपुर और गुरदास पुर जिले में बसे है। दविन्दर दर्शी के मुताबिक उनके संगठन की शाखाएं और पदाधिकारी दूसरे जिलों में भी है और अब इसमें विवाद नहीं रह गया है। राजपूत समुदाय से जुड़े कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं ने भी इस विवाद को सुलझाने में भूमिका निभाई।

जनसत्ता.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, पठानकोट के एसएसपी विशाल सोनी ने कहा कि पद्मावत जिले के चार थियेटर में दिखाई जाएगी। उन्होंने बताया था कि वह भरोसा दिला सकते हैं कि यहां पर कोई दिक्कत नहीं होगी। विशाल सोनी ने कहा कि, ‘किसी ने फिल्म का विरोध नहीं किया है, ना ही हमें किसी हंगामे की आशंका है, यहां तक कि राजपूत समुदाय के नेताओं ने इसे देखने के बाद फिल्म की तारीफ की है।

जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, पठानकोट के कांग्रेस से जुड़े एक स्थानीय पार्षद योगेन्दर ठाकुर प्रसाद ने कहा कि प्रशासन ने राजपूत समुदाय को फिल्म दिखाकर उनका विश्वास जीत लिया है। अब सभी गलत धारणाएं दूर हो गईं हैं। उन्होंने कहा, ‘हम सुझाव देते हैं कि देश भर के राजपूत सदस्यों को यह फिल्म देखनी चाहिए क्योंकि इसमें राजपूताना गर्व को दिखाया गया है, फिल्म में रानी पद्मावती के चरित्र से किसी किस्म की छेड़छाड़ नहीं की गई है उन्हें और भी गौरवान्वित किया गया है।

बता दें कि, बुधवार(24 जनवरी) को देश की राजधानी दिल्ली से सटे गुरुग्राम में करणी सेना के कथित कार्यकर्ताओं ने एक स्कूल बस पर हमला कर दिया था। गुरुग्राम के भोंडसी क्षेत्र में दोपहर बाद उपद्रवियों ने स्कूल बस में तोड़फोड़ की। इस दौरान सहमे बच्चों ने सीट के पीछे छिपकर खुद को बचाया। गुरुग्राम के जीडी गोयनका स्कूल की इस बस पर उपद्रवियों ने तब पथराव किया, जब उसमें बच्चे भी मौजूद थे।

बस के अंदर बैठे बच्चों को देखकर भी उपद्रवियों का दिल नहीं पसीजा और उन्होंने बस में आग लगाने की भी कोशिश की। हालांकि बाद में पुलिस और भीड़ से निकले कुछ युवाओं के विरोध के बाद उपद्रवी वहां से फरार हो गए। इस दौरान बस में कुछ बच्चों को मामूली चोटें भी आई हैं।

बता दें कि, करणी सेना के भारी विरोध और प्रदर्शन के बीच गुरुवार (25 जनवरी) को ‘पद्मावत’ सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। हालांकि, हिंसक प्रदर्शनों के बीच मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा है कि उसके सदस्य ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म का प्रदर्शन राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और गोवा में नहीं करेंगे।

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