सारदा घोटाला: सम्मन किए जाने के बावजूद CBI के सामने पेश नहीं हुए कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार, बोले- छुट्टी पर हूं

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कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त राजीव कुमार सारदा चिटफंड मामले में पूछताछ के लिए सीबीआई द्वारा सम्मन किए जाने के बावजूद सोमवार (27 मई) को एजेंसी के अधिकारियों के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। अधिकारियों ने बताया कि कुमार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को एक पत्र भेजकर मामले में उसके अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए और समय मांगा है।

(Arijit Sen/HT Photo)

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सीआईडी के एक अधिकारी साल्ट लेक सिटी में सीबीआई कार्यालय पहुंचे और एक पत्र सौंपा। इस पत्र में कुमार ने कहा है कि वह तीन दिन की छुट्टी पर हैं, इसलिए नहीं आ पाएंगे। सीबीआई सूत्रों ने कहा कि एजेंसी को पूछताछ से रोकने के लिए कुमार कोई कानूनी कदम नहीं उठा पाएं, इसके लिए अधिकारी बारासात अदालत में मौजूद थे।

सीबीआई ने रविवार को आईपीएस अधिकारी को सोमवार को एजेंसी के साल्ट लेक कार्यालय में सम्मन किया था। सारदा मामले की जांच के सिलसिले में आवास पर कुमार से मुलाकात नहीं होने के बाद यह कदम उठाया गया था। सीबीआई ने राजीव कुमार को तलब कर आज यानी सोमवार को सारदा घोटाले के मामले में पूछताछ के लिए एजेंसी के समक्ष पेश होने को कहा था।

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी कुमार को सोमवार को एजेंसी के साल्टलेक स्थित कार्यालय में उपस्थित रहने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि सीबीआई ने कुमार के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त देश छोड़कर कहीं ना जाए, इसे रोकने के लिए उनके खिलाफ यह कदम उठाया गया है।

दरअसल, एजेंसी 2500 करोड़ रुपये के सारदा पोंजी घोटाले में 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी कुमार से हिरासत में पूछताछ करना चाहती है। वह इस मामले की जांच सीबीआई के संभालने से पहले पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष जांच दल की अगुवाई कर रहे थे। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि कुमार से हिरासत में पूछताछ जरूरी है, क्योंकि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे और वह एजेंसी द्वारा पूछे गए सवालों पर टालमटोल तथा अड़ियल रवैया अपना रहे हैं।

सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि कुमार एसआईटी की जांच के प्रभारी थे और उन्होंने आरोपियों से जब्त मोबाइल फोन तथा लैपटॉप को जब्ती से मुक्त करने की अनुमति दी थी जिनमें घोटाले में राजनीतिक पदाधिकारियों की कथित संलिप्तता का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड था।

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