राजस्थान के सरकारी स्कूलों में आवारा कुत्तों के साथ खाना खाने को मजबूर हैं छात्र

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देश के अन्य हिस्सों की तरह राजस्थान में भी प्राथमिक स्कूलों में मिड डे मिल की स्थिति कोई बेहतर नहीं है। लेकिन भले ही मिडे डे मील को लेकर राजस्थान की वसुंधरा सरकार कितने ही दावे क्यों ने करे, लेकिन यहां के सावाई माधोपुर के खाट कलां सरकारी स्कूल में इसकी पोल खुल रही है। जरा आप इस तस्वीर को खुद देख लीजिए खुद व खुद आपको पता चल जाएंगा कि इस स्कूल के बच्चें मिडे डे मील का खाना खा के कितना सुरक्षित है।

राजस्थान के सरकारी स्कूल
फोटो- न्यूज़ 24

न्यूज़ 24 कि ख़बर के मुताबिक, स्कूल में जैसे ही बच्चों के खाने का वक्त होता है यहां आवारा कुत्तों का हूजूम उमड़ पड़ता है और ये कुत्ते बच्चों की थाली से उनका निवाला छिन लेते हैं। इस स्कूल में पढने वाले ज्यादातर बच्चों की उमर 7 से 8 साल के बीच है, जिसके चलते ये छोटे बच्चे झुण्ड में आने वाले इन आवारा कूत्तों से अपना खाना नही बचा पाते है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल के हैडमास्टर की माने तो स्कूल में बाउन्ड्री नहीं होने की वजह से आवारा कुत्तों का खौफ है। बाउन्ड्री बनाने के लिए तकरीबन 10 लाख रुपये की जरूरत है और इसके लिए कई बार स्थानीय शिक्षा विभाग को वो लिख भी चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है। इससे परेशान स्कूल के हेडमास्टर ने बाउन्ड्री बनाने के लिए गांव वालों से दान देने की अपील की है।

जिस कारण यहां के ज्यादातर बच्चों को इस स्कूल में बिना खाने के ही पढाई करनी पड़ती है। आप इस फोटो में साफ देख सकते है कि, जिस बर्तन में ये बच्चें खाना खा रहे है कैसे वहां पर आवारा कुत्तें उनका खाना ले लेते है। इस स्कूल मे बच्चों की हालत देखकर साफ पता चलता है कि प्रदेश में शिक्षा विभाग में दावों की जगह प्रयासों की जरूरत हैं।

अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं कि वहां पर शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार मिलेंगे। बच्चों को अच्छी आदतें सिखाई जाएंगी। यहां पर मिलने वाले मध्यान्ह भोजन से बच्चे तंदुरुस्त होंगे। मध्यान भोजन में बरती जा रही इस तरह की लापरवाही से माता-पिता की मंशा और शिक्षा विभाग की मंशा पर पानी फिर रहा है।

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