92 साल पुरानी परंपरा खत्म, अब आम बजट में शामिल होगा रेल बजट

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सरकार ने अलग रेल बजट के 92 साल पुराने चलन को खत्म करने का फैसला किया है। यह तय हुआ है कि अब रेल बजट को आम बजट में ही शामिल किया जाएगा। लेकिन आम बजट में रेल बजट के विलय के बावजूद रेलवे की कामकाजी स्वायत्तता बनी रहेगी।

रेल बजट अलग से पेश करने की व्यवस्था 1924 में शुरू की गई थी। मंत्रिमंडल ने आम बजट को फरवरी के आखिरी कार्यदिवस के बजाय उससे पहले पेश करने के प्रस्ताव को भी मंजूर कर लिया।

भाषा की खबर के अनुसार,वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए पत्रकारों को बताया कि नीति आयोग के सदस्य बिवेक देबराय की अध्यक्षता वाली समिति का मानना था कि अलग से रेल बजट पेश करना केवल रस्मी है क्योंकि आम बजट के मुकाबले इसका आकार बहुत छोटा है। समिति ने सुझाव दिया था कि रेल बजट सरकार के बजट के राजकोषीय अनुशासन और विकासात्मक रुख का हिस्सा होना चाहिए।

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इसलिए रेल बजट और आम बजट को मिलाने का फैसला किया गया है। अब केवल एक आम बजट होगा। रेलवे से जुड़े प्रस्ताव आम बजट का हिस्सा होंगे। इससे केवल एक विनियोग विधेयक होगा। उन्होंने कहा कि सरकार रेलवे की अलग पहचान और उसके कामकाज में स्वायत्तता बनाए रखेगी।

सरकार सुनिश्चित करेगी कि रेलवे खर्च पर हर साल अलग से चर्चा हो ताकि विस्तृत संसदीय समीक्षा और जवाबदेही बनी रहे। यात्री किराए और मालभाड़ा दरों के बारे में फैसला रेलवे ही लेता रहेगा। लेकिन रेलवे के आय-व्यय के ब्योरे को संसद में वित्त मंत्रालय पेश करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट पहले पेश किए जाने को भी मंजूरी दी है ताकि बजट से संबंधित पूरी प्रक्रिया 31 मार्च तक पूरी हो जाए और कर व व्यय एक अप्रैल से लागू हो सके।

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उन्होंने कहा कि बजट की निश्चित तारीख के बारे में फैसला विधानसभा चुनावों की तारीख देखने के बाद विचार-विमर्श कर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए 2017-18 के बजट सत्र की तारीख के बारे में फैसला अलग से करेगी।

मंत्रिमंडल ने 2017-18 के बजट में योजना और गैर-योजना व्यय में अंतर को खत्म करने का फैसला किया है। जेटली ने कहा कि सरकार बजट पेश करने की तारीख पहले करने और वित्त विधेयक समेत बजट संबंधी पूरी प्रक्रिया 31 मार्च से पहले खत्म करने के पक्ष में है ताकि सार्वजनिक वित्त पर आधारित योजनाओं पर व्यय एक अप्रैल से शुरू हो सके।

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आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि रेलवे वेतन व पेंशन समेत अपना व्यय, आय से पूरा करता है। बजट को आम बजट में मिलाने से कोई बदलाव नहीं होगा। केंद्र सबसिडी देना जारी रखेगा जो वह रेलवे को दे रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे का राजस्व अब भारत की संचित निधि में आएगा और व्यय को इस कोष से पूरा किया जाएगा। इसलिए यह आम बजट के वित्त को प्रभावित नहीं करेगा।

रेलवे अपनी आय से कर्मचारियों को वेतन देता है। रेलवे जो कर्ज लेता है, वह पहले से सरकार का कर्ज है। इसलिए विलय से सरकार का कर्ज नहीं बढ़ेगा।

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