देश भर में कई शहरों में सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, लेखकों, वकीलों और पत्रकारों के घरों पर छापेमारी, 5 गिरफ्तार

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भीमा कोरेगांव में हिंसा की जांच में जुटी पुणे पुलिस ने मंगलवार (28 अगस्त) सुबह देश के कई शहरों में एक साथ लेखकों, विचारकों, प्रोफेसरों, आदिवासी व समाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और वकीलों के घरों पर छापेमारी की है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह छापेमारी हैदराबाद, दिल्ली, हरियाणा, मुंबई और रांची में हुई है। सूत्रों के मुताबिक ये छापेमारी भीमा कोरेगांव मामले में की जा रही है।

Photo: The Hindu

इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने कईयों को गिरफ्तार और हिरासत में लिया है। पांच महीने में दूसरी बार मंगलवार को पुणे पुलिस ने देशभर के कथित नक्सल समर्थकों के घरों व कार्यालयों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। सूत्रों के मुताबिक भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में जांच के मद्देनजर छापे के बाद अब तक वरवरा राव, अरुण पेरेरा, गौतम नवलखा, वेरनोन गोन्जाल्विस और सुधा भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपियों को सेक्शंस 153 A, 505 (1) B,117,120 B, 13, 16, 18, 20, 38, 39, 40 और UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम ऐक्ट) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि हैदराबाद में वामपंथी कार्यकर्ता और कवि वरवरा राव, मुंबई में कार्यकर्ता वेरनोन गोन्जाल्विस और अरुण फरेरा, छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और दिल्ली में रहने वाले गौतम नवलखा के घरों की तलाशी ली गई। वर्ष 1818 में हुई भीमा-कोरेगांव लड़ाई के 200 साल होने पर पिछले साल 31 दिसंबर को यलगार परिषद घटनाक्रम के सिलसिले में जून में गिरफ्तार पांच लोगों में से एक के घर पर पुलिस की तलाशी के दौरान जब्त पत्र में राव का नाम आया था।

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बता दें कि साल 1818 में हुई कोरेगांव-भीमा लड़ाई के 200 साल पूरे होने के मौके पर पिछले साल 31 दिसंबर को हुए एल्गार परिषद कार्यक्रम के सिलसिले में जून में गिरफ्तार पांच लोगों में एक के घर पुलिस की तलाशी के दौरान कथित तौर पर जब्त एक पत्र में राव के नाम का जिक्र था। विश्रामबाग थाना में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, कार्यक्रम में कथित तौर पर भड़काऊ टिप्पणी करने के बाद जिले के कोरेगांव भीमा गांव में हिंसा हुई थी।

इसके बाद माओवादियों से संपर्क रखने के आरोप में जून में पांच लोगों की गिरफ्तारी हुयी थी। जून में छापा मारे जाने के बाद दलित कार्यकर्ता सुधीर धावले को मुंबई में उनके घर से गिरफ्तार किया गया, जबकि वकील सुरेंद्र गाडलिंग, कार्यकर्ता महेश राऊत और शोमा सेन को नागपुर से और रोना विल्सन को दिल्ली में मुनिरका स्थित उनके फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था।

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पुलिस अधिकारी ने बताया, एल्गार कार्यक्रम के मामले में हमारी छानबीन के दौरान प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों के बारे में कुछ सबूत मिले थे जिसके बाद पुलिस ने छत्तीसगढ़, मुंबई और हैदराबाद में छापे मारे। अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किये गए पांचों लोगों और उनके साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों के घरों में तलाशी ली गयी थी।पुलिस ने बताया, हम इन लोगों के वित्तीय लेन-देन, संवाद के उनके तरीके की भी छानबीन कर रहे हैं और तकनीकी साक्ष्य भी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

देखिए, लाइव अपडेट्स:-

  • दिल्ली हाई कोर्ट ने गौतम नवलखा की ट्रांजिट रिमांड पर लगाई रोक, कल केस की सुनवाई होने तक हाउस अरेस्ट का आदेश
  • मशहूर लेखक अरुंधति रॉय ने बीबीसी तेलुगू सेवा से बात करते हुए कहा है, “सरेआम लोगों की हत्या करने वालों और लिंचिंग करने वालों की जगह वकीलों, कवियों, लेखकों, दलित अधिकारों के लिए लड़ने वालों और बुद्धिजीवियों के यहां छापेमारी की जा रही हैं। इससे पता चलता है कि भारत किस ओर जा रहा है। हत्यारों को सम्मानित किया जाएगा, लेकिन न्याय और हिंदू बहुसंख्यकवाद के खिलाफ बोलने वालों को अपराधी बनाया जा रहा है। क्या ये आने वाले चुनावों की तैयारी है?”

पुणे पुलिस के निवर्तमान संयुक्त आयुक्त रवींद्र कदम ने दो अगस्त को कहा था कि भीमा कोरेगांव हिंसा से माओवादियों के तार जुड़े होने का पता नहीं चला है। हालांकि, उन्होंने कहा था कि पुणे में एल्गार परिषद के आयोजन में ‘फासीवाद विरोधी मोर्चा की भूमिका थी। मौजूदा सरकार की नीतियों के विरोध में माओवादियों ने इस संगठन की स्थापना की थी।

इससे पहले, पुलिस ने गिरफ्तार किये गए लोगों पर गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के तहत मामला दर्ज किया था। आईपीसी की धाराओं, 153 ए (दो समुदायों के बीच वैमनस्य, रंजिश बढ़ाने), 505 (एक समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ भड़काने), 117 (सामान्य लोगों या दस से ज्यादा लोगों द्वारा किया गया अपराध) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत भी उन पर मामले दर्ज किये गए थे।

वर्ष 1818 में हुई कोरेगांव

भीमा लड़ाई के 200 साल पूरे होने के मौके पर पिछले साल 31 दिसंबर को हुए एल्गार परिषद कार्यक्रम के सिलसिले में जून में गिरफ्तार पांच लोगों में एक के घर पुलिस की तलाशी के दौरान कथित तौर पर जब्त एक पत्र में राव के नाम का जिक्र था। विश्रामबाग थाना में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, कार्यक्रम में कथित तौर पर ‘‘भड़काऊ’’ टिप्पणी करने के बाद जिले के कोरेगांव भीमा गांव में हिंसा हुयी थी। इसके बाद माओवादियों से संपर्क रखने के आरोप में जून में पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।

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