कर्नाटक में जारी सियासी घटनाक्रम पर लोकसभा में जमकर हुआ हंगामा, राहुल गांधी ने भी की नारेबाजी

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कर्नाटक में जारी सियासी घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को लोकसभा में नारे लगाए। राहुल गांधी सदन में अपने स्थान से बैठे-बैठे ही नारा लगाते देखे गए। 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी ने पहली बार नारेबाजी की। सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कर्नाटक में जारी सियासी घटनाक्रम का विषय उठाया और केंद्र में सत्तारूढ पार्टी पर राज्य में कांग्रेस सदस्यों का ‘शिकार’ करने का आरोप लगाया।

(Indian Express photo by Anil Sharma)

उन्होंने कहा कि शिकार की राजनीति लोकतंत्र के लिए खतरा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कांग्रेस सदस्यों को कल भी इस विषय को उठाने का मौका दिया गया था। इस बारे में कार्यस्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया है। इस पर कांग्रेस सदस्य अपने स्थान से ही नारेबाजी करने लगे। कुछ देर बाद कांग्रेस सदस्य आसन के पास आकर नारेबाजी करने लगे।

कांग्रेस सदस्यों के साथ द्रमुक सदस्य भी आसन के पास आकर नारेबाजी कर रहे थे। इस दौरान संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी सदन में मौजूद थीं। राहुल गांधी को भी अपने स्थान पर बैठकर ‘वी वांट जस्टिस (हमें न्याय चाहिए)’ कहते सुना गया। सदन में कांग्रेस सदस्य ‘वी वांट जस्टिस’, ‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’, ‘शिकार की राजनीति बंद करो’ के नारे लगा रहे हैं।

लोकसभाध्यक्ष ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि सभी को सदन की गरिमा और मर्यादा को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सदन में वाद विवाद करें, संवाद करें, चर्चा करे लेकिन नारेबाजी और तख्ती लेकर आना बंद होना चाहिए। बिरला ने कहा कि “उन्होंने सदस्यों को बिना बारी भी बोलने की अनुमति दी है, सदन को नगर निगम जैसा बनाना ठीक नहीं है।’’

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि “नियम में स्पष्ट है कि अगर किसी विषय पर चर्चा हो चुकी है तब उस पर फिर चर्चा नहीं हो सकती है। इस विषय को कर्नाटक मे उठाया जा चुका है, रक्षा मंत्री जवाब दे चुके हैं। कर्नाटक के मुद्दे से हमारा कोई लेना देना नहीं है, यह राहुल गांधी के इस्तीफा देने के आह्वान के कारण हो रहा है । सदन में महत्वपूर्ण विधेयक आने हैं, चर्चा होनी है। यह पहला सत्र है और इस तरह से इसे बाधित करना ठीक नहीं है।”

गौरतलब है कि कर्नाटक में जद(एस)-कांग्रेस सरकार गठबंधन के 13 विधायकों द्वारा राज्य विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय को इस्तीफा सौंपने के बाद प्रदेश सरकार संकट का सामना कर रही है। राज्यसभा में भी कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम के मुद्दे पर कांग्रेस सदस्यों ने हंगामा किया। इसके कारण मंगलवार को राज्यसभा की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

कांग्रेस, जद (एस) के मंत्रियों ने दिए इस्तीफे  

बता दें कि कर्नाटक की जद (एस)-कांग्रेस गठबंधन सरकार के 13 विधायकों के इस्तीफे से संकट में फंसी राज्य सरकार को बचाने के प्रयास के तहत मंत्रिमंडल में फेरबदल करने और असंतुष्ट विधायकों को उसमें जगह देने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए दोनों पार्टियों के मंत्रियों ने सोमवार को ‘‘स्वेच्छा’’ से इस्तीफे दे दिए। कांग्रेस के सभी 21 मंत्रियों और जद (एस) के नौ मंत्रियों ने 13 वर्ष पुरानी गठबंधन सरकार से अपने इस्तीफे सौंपे।

दो दिन पहले 13 विधायकों (कांग्रेस के 10 और जद (एस) के तीन विधायकों) के विधानसभा की सदस्यता से अपने इस्तीफे सौंपे जाने के बाद यह निर्णय लिया गया। विधायकों के विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफों से राज्य सरकार गंभीर संकट में आ गई। जिन 13 विधायकों ने इस्तीफा दिए है, वे मुम्बई के एक होटल में ठहरे हुए हैं। राज्य में गठबंधन सरकार के सहयोगी कांग्रेस के 21 मंत्रियों के मंत्रिमंडल से इस्तीफे के तुरन्त बाद जद (एस) के मंत्रियों ने इस्तीफे दिए।

12 जुलाई को होने वाले विधानसभा सत्र से पहले इस्तीफा पत्रों पर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले की काफी अहमियत है क्योंकि यह एच डी कुमारस्वीमी के नेतृत्व वाली डांवाडोल गठबंधन सरकार का भविष्य तय करेगी। 224 सदस्यीय विधानसभा में दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन के साथ भाजपा के पास 107 विधायक हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 113 है। अगर इन 13 विधायकों का इस्तीफे स्वीकार कर लिया जाता है तो गठबंधन का आंकड़ा घटकर 103 हो जायेगा। इसमें विधानसभा अध्यक्ष का भी एक वोट शामिल है। (इनपुट- भाषा के साथ)

 

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