पूर्व CJI दीपक मिश्रा को लेकर जस्टिस जोसेफ के सनसनीखेज दावे पर राहुल गांधी का PM मोदी पर निशाना, बोले- “चौकीदार ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति को बना लिया था कोर्ट-पुतली”

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सुप्रीम कोर्ट से हाल ही रिटायर हुए जस्टिस कुरियन जोसेफ ने 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर सनसनीखेज बयान दिया है। जस्टिस जोसेफ ने दावा किया है कि 12 जनवरी की सबसे विवादित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों के साथ मिलकर उन्होंने इसलिए हिस्सा लिया, क्योंकि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था कि तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को कोई बाहर से कंट्रोल कर रहा था। साथ ही जस्टिस कुरियन ने कहा कि उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का कोई खेद नहीं है।

न्यायमूर्ति जोसेफ ने सेवानिवृत्त होने के कुछ दिनों बाद सोमवार को सनसनीखेज दावे में कहा कि पूर्ववर्ती प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा किसी ‘‘बाहरी ताकत’’ के प्रभाव में काम कर रहे थे जिससे न्यायिक प्रशासन प्रभावित हुआ। आपको बता दें कि न्यायमूर्ति जोसेफ सुप्रीम कोर्ट के उन चार न्यायाधीशों में शामिल थे जिन्होंने गत जनवरी में एक अभूतपूर्व संवाददाता सम्मेलन किया था।

न्यायमूर्ति जोसेफ ने सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य न्यायाधीशों न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर (अब सेवानिवृत्त), न्यायमूर्ति रंजन गोगोई (वर्तमान में प्रधान न्यायाधीश) और न्यायमूर्ति मदन लोकुर के साथ 12 जनवरी को एक संवाददाता सम्मेलन कर न्यायमूर्ति मिश्रा के खिलाफ खुलेआम बगावत का बिगुल बजा दिया था। चारों न्यायाधीशों ने उक्त संवाददाता सम्मेलन में संवेदनशील मामलों के तरजीही आवंटन को लेकर अपनी चिंता जताई थी।

राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना

जस्टिस कुरियन जोसेफ के इस सनसनीखेज दावे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिना नाम लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि चौकीदार ने सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायमूर्ति को ‘कोर्ट-पुतली’ बना लिया था। आपको बता दें कि पीएम मोदी कई बार अपने आप को देश का चौकीदार बता चुके हैं और राहुल गांधी प्रधानमंत्री पर हमला बोलने के लिए चौकीदार शब्द का ही इस्तेमाल करते हैं।

“चौकीदार ने सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायमूर्ति को कोर्ट-पुतली बना लिया था। चौकीदार का दुर्भाग्य है कि देश में ईमानदार जजों की कमी नहीं है। जिनके लिए सत्य हमेशा सत्ता से बड़ा होता है। वे सत्ता के दंभ को सत्य पर हावी होने नहीं देते। देश को ऐसे जजों पर गर्व है।”

‘पूर्व CJI दीपक मिश्रा को कोई बाहरी कर रहा था कंट्रोल’

पिछले महीने 29 नवंबर को सेवानिवृत्त हो चुके न्यायमूर्ति जोसेफ ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ‘‘तत्कालीन सीजेआई किसी ‘‘बाहरी ताकत’’ के प्रभाव में काम कर रहे थे। वह किसी बाहरी ताकत द्वारा रिमोट से नियंत्रित थे। किसी बाहरी ताकत का कुछ प्रभाव था जो न्यायिक प्रशासन को प्रभावित कर रहा था।’’ यह पूछे जाने पर कि वह यह दावा किस आधार पर कर रहे हैं, न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि उन न्यायाधीशों की ऐसी धारणा थी जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उत्पन्न मुद्दों को लेकर संवाददाता सम्मेलन किया था। ऐसी ही धारणा अदालत के कुछ अन्य न्यायाधीशों के बीच भी थी।

उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया कि वह ‘‘बाहरी ताकत’’ कौन थी और वे कौन से मामले थे जिसमें पक्षपात हुआ और न्यायिक प्रशासन प्रभावित हुआ। यह पूछे जाने पर कि क्या कथित प्रभाव किसी राजनीतिक पार्टी या सरकार द्वारा किसी विशेष मामले में डाला गया, न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि न्यायाधीशों का विचार था कि संबंधित न्यायाधीश द्वारा कुछ पक्षपात किया गया था। उन्होंने कहा कि किसी विशेष मामले का उल्लेख करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे माफ करिए। मैं इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहता।’’

सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने यद्यपि कहा कि उस दबाव का असर हुआ और न्यायमूर्ति मिश्रा के सीजेआई के तौर पर बाकी के कार्यकाल के दौरान चीजें अच्छे के लिए बदलनी शुरू हो गई और वह न्यायमूर्ति गोगोई के नेतृत्व में जारी हैं। न्यायमूर्ति मिश्रा दो अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने कहा कि अदालत के कामकाज की गुणवत्ता और संस्थान की स्वतंत्रता संबंधी धारणा में एक सुधार आया है। उन्होंने कहा कि संवाददाता सम्मेलन से पहले चारों न्यायाधीशों ने न्यायमूर्ति मिश्रा से उनके ऊपर ‘‘बाहरी ताकत’’ के कथित प्रभाव के बारे में बात की थी। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीशों ने इसके साथ ही कुछ मामलों में पक्षपात के साथ निर्णय किये जाने का भी उल्लेख किया था।

‘सीजेआई को करा दिया था अवगत’

न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर हमारे पास उस समय जो भी तथ्य थे हमने उससे तत्कालीन सीजेआई को अवगत करा दिया था।’’ उन्होंने एक निजी टेलीविजन चैनल से कहा कि पूर्व सीजेआई स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा,‘‘हम इसको लेकर आश्वस्त हैं कि तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश निर्णय स्वयं नहीं कर रहे थे।’’ न्यायाधीश बी एच लोया मामले के बारे में पूछे जाने पर न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि वह अब उस पर टिप्पणी नहीं कर सकते, वह मामला अब बंद हो चुका है।

यह पूछे जाने पर कि न्यायमूर्ति मिश्रा को रिमोट कंट्रोल से कौन नियंत्रित कर रहा था, न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि वे ‘‘किसी पर उंगली रखकर नहीं बता सकते कि इसके पीछे कौन था।’’ उन्होंने कहा कि संवाददाता सम्मेलन के दौरान भी एक उदाहरण का उल्लेख किया गया, वह था सुप्रीम कोर्ट में मामलों का आवंटन। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश लोया की मृत्यु की फिर से जांच के अनुरोध वाली याचिकाओं का आवंटन…संवाददाता सम्मेलन के आयोजन का एकमात्र कारण नहीं था, जैसा कि आमतौर पर माना जाता है।

आपको बता दें कि न्यायमूर्ति लोया सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे। एक दिसंबर 2014 को उनकी दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई थी। उस समय वह अपने एक सहयोगी की पुत्री के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए गए हुए थे। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री के नाते इस मामले के आरोपियों में शामिल थे। हालांकि बाद में एक निचली अदालत ने शाह को मामले में बरी कर दिया था।

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