DHFL द्वारा 31,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले पर बोले प्रशांत भूषण- ‘राहुल गांधी ने सही कहा चौकीदार ही चोर है’

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सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने मंगलवार (29 जनवरी) को कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘चोर’ कहना सही था। कोबरापोस्ट वेबसाइट द्वारा भारतीय इतिहास के सबसे बड़े कथित वित्तीय घोटाले के खुलासे के दौरान प्रेस कॉन्फेंस में बोलते हुए प्रशांत भूषण ने कहा, “राहुल गांधी बिल्कुल ठीक कह रहे हैं कि चौकीदार ही चोर बन गया। यह तो बिल्कुल साफ है कि चौकीदार ही चोर है।”

भूषण ने कहा कि प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि ना खाऊंगा ना खाने दूंगा…लेकिन यह सब क्या हो रहा है? उन्होंने कहा आपकी (पीएम मोदी) नाक के नीच से 31 हजार करोड़ रुपये का हेराफेरी हो गया, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साथ ही इसकी भी जांच होनी चाहिए कि डीएचएफएल के प्रमोटर वाधवन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कितनी बार मुलाकात की। बता दें कि कोबरापोस्ट द्वारा सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, डीएचएफएल समूह ने बीजेपी को 19.6 करोड़ रुपये का चंदा दिया था।

यशवंत सिन्हा ने भी की जांच की मांग

वहीं, पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने मंगलवार (29 जनवरी) को गैर-बैंकिंग वित्तीय सेवा कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनेंस कारपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) द्वारा 31,000 करोड़ रुपये के कर्ज के कथित हेरफेर मामले में जांच की मांग की। डीएचएफएल ने यह राशि सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा से जुटाई थी। हालांकि, डीएचएफएल ने सिन्हा के आरोप को दुर्भावनापूर्ण बताया है। वहीं, कोबरापोस्ट का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाले इस बड़े घोटाले की जांच बेहद जरूरी है ताकि इसमें लिप्त लोगो को सजा मिल सके और सार्वजनिक धन की उगाही उनसे की जा सके।

क्या है मामला?

मशहूर खोजी वेबसाइट कोबरापोस्ट ने मंगलवार (29 जनवरी) को 31,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का खुलासा कर सनसनी फैला दी है। कोबरापोस्ट के खुलासे में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के प्रमोटरों पर कथित तौर पर आम जनता के करोड़ों रुपये घपला करने का आरोप लगा है। दावा है कि ये संभवत: देश का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला हो सकता है। डीएचएफसीएल वधावन ग्लोबल कैपिटल के स्वामित्व वाली एक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी है। कपिल वाधवन, अरुणा वाधवन और धीरज वाधवन डीएचएफएल के मुख्य साझेदार हैं।

29 जनवरी को कोबरापोस्ट ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर ‘द एनाटॉमी ऑफ इंडियाज बिगेस्ट फाइनेंशियल स्कैम’ नाम से अपनी ये रिपोर्ट जारी की। इस दौरान कोबरापोस्ट के संपादक अनिरुद्ध बहल, पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा, पत्रकार जोसी जोसेफ, परंजॉय गुहा ठाकुरता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण मौजूद थे। कोबरापोस्ट ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचना और सरकारी वेबसाइट से मिली जानकारी के आधार पर इस कथित घोटाले का खुलासा हुआ है।

डीएचएफएल पर लगा 31,000 करोड़ के घोटाले का आरोप

मशहूर खोजी वेबसाइट कोबरापोस्ट के स्टिंग के अनुसार, डीएचएफएल ने बैंकों से कुल 97,000 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाया। बाद में कई फर्जी कंपनियों के माध्यम से उसने इसमें से कथित तौर पर 31,000 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। कोबरापोस्ट ने दावा किया है कि डीएचएफएल समूह द्वारा बीजेपी को 19.5 करोड़ रुपए का कथित तौर पर चंदा दिया गया था।

कोबरापोस्ट का दावा है कि डीएचएफएल ने कथित तौर पर कई शैल कंपनियों को करोडों रुपए का लोन दिया और फिर वही रुपया घूम फिर कर उन कंपनीयों के पास आ गया जिनके मालिक डीएचएफ़एल के प्रमोटर हैं। इस तरह 31 हज़ार करोड़ से ज्यादा की कथित हेराफेरी DHFL ने खुल्लम खुल्ला की है। कोबरापोस्ट के मुताबिक, सबसे हैरानी की बात ये है कि इतने बड़े घोटाले पर भारतीय रिजर्व बैंक, सेबी सहित फाइनैन्स मिनिस्टरी की किसी भी इकाई की नज़र नहीं पड़ी है जिनका दायित्व ऐसी अनियमित्ता को रोकना है।

कोबरापोस्ट ने खुलासा किया है कि डीएचएफ़एल की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने कुल मिलाकर 36 बैंको से उपरोक्त धनराशि कर्ज में जुटाई थी। इन बैंको में 32 सरकारी और निजी के अलावा 6 विदेशी बैंक शामिल है। यह कर्ज अलग-अलग तरीके से हासिल किया गया है। इस कर्ज की धनराशि से डीएचएफ़एल ने 84,982 करोड़ रुपए की धनराशि कर्ज के रूप में दे दी है। कोबरापोस्ट के मुताबिक, इसके जरिए डीएचएफ़एल के मालिकों ने देश और विदेश में बड़ी-बड़ी कंपनियों के शेयर और assets खरीदी है। ये assets भारत के अलावा इंग्लैंड, दुबई, श्रीलंका और मॉरीशस में खरीदी गई है।

डीएचएफ़एल के मामले में एक बात और खुल के सामने आ रही है कि इन संदिग्ध कंपनीयों को डीएचएफ़एल के मुख्य हिस्सेदारों ने अपनी खुद की प्रमोटर कंपनियों, उनकी सहयोगी कंपनियों और अन्य शैल कंपनियों के जरिए बनाया है। कपिल वाधवन, अरुणा वाधवन और धीरज वाधवन डीएचएफ़एल के मुख्य साझेदार है। कोबरापोस्ट के मुताबिक, इसके अलावा कंपनी ने खुद की ऋण नीति और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पॉलिसी दोनों को ताक पर रखकर ये सारे काम किए है।

डीएचएफएल के शेयर में गिरावट जारी

यह आरोप लगने के बाद से डीएचएफएल के शेयर में गिरावट जारी है। बीएसई पर कंपनी का शेयर मंगलवार को 8.01 प्रतिशत गिरकर 170.05 रुपये पर बंद हुआ। वहीं एनएसई पर यह 8.22 प्रतिशत घटकर 169.70 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ। पिछले दो दिन में कंपनी का शेयर 18.71 प्रतिशत घटा है। डीएचएफएल ने एक बयान में बताया कि वह एक सूचीबद्ध कंपनी है। यह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, राष्ट्रीय आवास बैंक और अन्य नियामकों की निगरानी में काम करती है। बयान में कहा गया है कि कोबरापोस्ट द्वारा की गई यह कार्रवाई कंपनी की छवि को नुकसान पहुंचाने की दुर्भावना से प्रेरित है जिससे कंपनी के शेयरों की कीमत प्रभावित होती है।

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