EXCLUSIVE: राहुल गांधी ने चुनाव आयोग, EVM, राफेल, प्रियंका इफेक्ट, PM के डिजिटल कैमरा सहित सभी मुद्दों पर ‘जनता का रिपोर्टर’ से खुलकर की बातचीत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे नेता के खिलाफ देश की राजनीति में विपक्षी खेमा जब गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा था उस वक्त भी अपना संघर्ष जारी रखने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वास्तव में एक लंबा सफर तय किया है। प्रधानमंत्री के विपरीत राहुल गांधी पिछले कुछ समय से मीडिया के कठिन से कठिन सवालों का जवाब देकर खुद को एक फुल टाइम नेता के रूप में स्थापित करने में सफल रहे हैं क्योंकि उनके ऊपर हमेशा से ही ‘पार्ट टाइम’ राजनीति का आरोप लगता रहा है। पिछले साल तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद और इस लोकसभा चुनाव में देश भर की जनता से मिले भारी समर्थन से उत्साहित राहुल का आत्मविश्वास पहले से और बढ़ गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष राफेल से लेकर सीबीआई विवाद और लगभग हर मुद्दे पर ट्विटर पर पीएम मोदी पर निशाना साधने से कभी चुके नहीं है और उनकी बातें मीडिया की हेडलाइन भी बनती रही हैं। राहुल गांधी जब से राजनीति में आए हैं, संभवत: ऐसा पहली बार रहा होगा जब उन्होंने किसी बड़े नेता को सीधे बहस की चुनौती दी हो। पिछले एक साल में वो राफेल, जीएसटी और किसानों जैसे कई मुद्दों पर पीएम मोदी को सीधे बहस की चुनौती दे चुके हैं, हालांकि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष की चुनौती को अभी तक स्वीकार नहीं किया है।

इस बीच लोकसभा चुनाव 2019 के सातवें और अंतिम चरण के लिए चुनाव प्रचार समाप्त होने के एक दिन पहले गुरुवार (16 मई) को राहुल गांधी ने ‘जनता का रिपोर्टर’ के प्रधान संपादक रिफत जावेद से चुनाव आयोग, ईवीएम, राफेल, अभिनेता अक्षय कुमार के साथ पीएम मोदी के इंटरव्यू, बहन प्रियंका गांधी के राजनीति में आने से होने वाले असर और मीडिया सहित सभी मुद्दों पर खुलकर बात की।  

(नीचे चुनावी अभियान के दौरान रिफत के सवालों पर राहुल का जवाब पढ़िए:)

अभी तक का चुनाव प्रचार कैसा रहा? क्या आप राहत महसूस कर रहे हैं कि आखिरकार यह प्रचार अभियान अब समाप्त हो गया?

बहुत अच्छा अभियान (चुनाव प्रचार) रहा है। श्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रचार करना आसान है, क्योंकि वह इतने झूठ बोलते हैं कि वे आपको कई विकल्प दे देते हैं। आप उन पर नौकरियां, भ्रष्टाचार, कृषि, अर्थव्यवस्था सहित कई अन्य मुद्दों पर हमला कर सकते हैं। हम पिछले 90 दिनों से अधिक समय से चुनाव प्रचार कर रहे हैं। मैंने इस दौरान हर मिनट का भरपूर आनंद लिया है। मैं कहना चाहता हूं कि इस दौरान (प्रचार) मुझे थकावट महसूस नहीं हुई । मैंने काफी कुछ सीखा है, मेरे पास एक अच्छा समय था। मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी के अभियान पर मुझे गर्व है, हमने एक अच्छा काम किया, एक ठोस काम किया। लेकिन यह काम जारी है।

क्या आपके आत्मविश्वास को तोड़ने के लिए आपके प्रतिद्वंद्वियों द्वारा आपके पिता और आपकी मां पर निम्न स्तर का हमला किया गया?

मैं बिल्कुल ठीक हूं। अगर लोग मेरे पिता, मेरी मां या यहां तक कि मेरी दादी और मेरे परदादा पर हमला करते हैं तो मैं वास्तव में बुरा नहीं मानता। यह उनका विशेषाधिकार है, लेकिन मैं ऐसा नहीं करता। जब आप वर्तमान में नहीं लड़ सकते हैं, तो आप अतीत को लेकर लड़ रहे हैं। हम वर्तमान और भारत के भविष्य के बारे में लड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हम न्याय (NYAY) के बारे में बात कर रहे हैं, भारतीय अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के बारे में बात कर रहे हैं, उन चुनौतियों के बारे में जो देश के सामने हैं। एक तरफ जहां बेरोजगारी का सवाल है, वहीं श्री नरेंद्र मोदी आम खाने की बात कर रहे हैं। चुनाव के अंत में अब हम जान गए हैं कि कैसे वह एक पेड़ पर चढ़कर आम खाते हैं और जब आप इसे सीधे पेड़ से तोड़कर खाते हैं तो इसका स्वाद कैसा होता है। उन्होंने हमें यह भी बताया कि वे आधी बांह के कुर्ते क्यों पहनते हैं और उन्हें काटते क्यों हैं। दरअसल, वह सभी मुद्दों को दरकिनार कर अब बादलों, आम और कुर्तों के बारे में बात कर रहे हैं।

और डिजिटल कैमरे के बारे में भी …

हां, डिजिटल कैमरे के बारे में भी, मैं आश्चर्यचकित हूं कि उन्होंने (पीएम मोदी) यह नहीं कहा कि उन्होंने ही इसका (डिजिटल कैमरा) आविष्कार किया था और उन्होंने ही केवल इसका उपयोग किया। अपनी अगली बातचीत में, वह शायद कहेंगे कि डिजिटल कैमरा और इंटरनेट के पीछे उनका दिमाग था।

मेरे पहले सवाल पर वापस आते हैं, यह तो एक मानव का स्वभाव होता है कि अगर कोई निरंतर व्यक्तिगत हमला कर रहा है तो…

(बीच में रोकते हुए) नहीं, यह मानव का स्वभाव नहीं है…यह मानव का स्वभाव बिल्कुल नहीं है। मानव का स्वभाव मन को नियंत्रित करना होता है। यदि आप ऐसा करते हैं, तो आपको नफरत फैलाने की निरर्थकता का एहसास होगा, आपको नफरत का जवाब नफरत से देने की निरर्थकता का एहसास होगा। मैं श्री नरेंद्र मोदी से नफरत नहीं कर सकता, वह मुझे इसमें हर बार हरा देंगे। लेकिन मुझे लोगों से नफरत नहीं है। मैं पलटकर श्री नरेंद्र मोदी के बारे में घृणा से बात करूं, यह नहीं हो सकता। यह मानव का स्वभाव नहीं है। मैं श्री मोदी से नफरत नहीं कर सकता, क्योंकि मुझे लगता है कि उनके प्रति मेरे अंदर कोई घृणा नहीं है।

आपने कहा कि इस वर्ष के चुनाव अभियान ने एक नया मुकाम हासिल किया और यह मेरे लिए चुनौतीपूर्ण रहा होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। क्योंकि जब कोई आपसे घृणा करता है, तो यदि आप इसे नजरअंदाज करना जानते हैं तो यह कोई चुनौती नहीं है। यह आसान है। दुनिया को देखने का हर किसी का अपना तरीका होता है। पीएम को पता है कि वह हार रहे हैं, वह घबराए हुए और चिंतित हैं। वास्तव में, मुझे उन पर तरस आता है।

क्या आपको उन पर तरस आता है? आपके कहने का यह अर्थ है?

हां, मुझे बुरा लगता है कि जिस व्यक्ति को इतना बड़ा जनादेश दिया गया, वह वास्तव में उद्धार नहीं कर सकता। यदि श्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा, रोजगार, कृषि और अर्थव्यवस्था का उद्धार किया होता, तो यह पूरी तरह से एक अलग अभियान होता। लेकिन श्री मोदी ने ऐसा नहीं किया इसलिए उन्हें अब अन्य मुद्दों के बारे में बात करनी होगी। आम की तरह। यह मुझे दिखाता है कि वह दहशत में है। यह मुझे दिखाता है कि वह जो चल रहा है उसके संपर्क में नहीं है। यह मुझे दिखाता है कि वह जानते हैं कि वह चुनाव हार रहे हैं।

नफरत की राजनीति के कारण आज हमारे समाज में नकारात्मकता बहुत अधिक हो गई है, जिसे हमने पिछले पांच वर्षों में देखा है। यदि आप सत्ता में आते हैं, तो आप इसे कैसे समाप्त करेंगे?

यह आपकी सोच से जल्दी समाप्त होगा। क्योंकि वास्तव में नफरत की एक बड़ी मात्रा शीर्ष द्वारा संचालित की जा रही है। आप देखेंगे कि जिस क्षण ये सरकार (एनडीए) बदलकर यूपीए सरकार आएगी तो तुरंत घृणा में एक नाटकीय कमी देखने को मिलेगा। लगभग स्वाभाविक रूप से।

Photo: Janta Ka Reporter

मैं ऐसा कह रहा हूं, इसका कारण यह है कि मेरे पास डेटा है जिसके मुताबिक, 2010 में केवल 3 भारतीय थे जिन्होंने अपनी नागरिकता (भारतीय) का त्याग (किसी अन्य देश का नागरिकता ले लेना) किया था। जबकि 2010 से 2018 के बीच यह संख्या 290 हो गई, जिसमें से 2018 में अकेले 207 भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी। यह आंकड़ा भारत में रहने की स्थिति के बारे में क्या कहता है?

इसमें वे लोग शामिल नहीं हैं जो भारत छोड़ रहे हैं। आप नागरिकता त्याग करने के बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन हजारों-हजारों लोग जो भारत में रहते हैं, जो अब विदेश में रहना चाहते हैं क्योंकि वे भारत में अपना आत्मविश्वास और उम्मीद खो रहे हैं। इसके दोषी मोदी जी हैं।

मैं आपसे अमेठी के बारे में पूछना चाहता हूं। आपकी प्रतिद्वंद्वी स्मृति ईरानी बार-बार आप पर हमला कर रही हैं। आपने उन्हें नजरअंदाज करने का फैसला क्यों किया है? क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि वह एक प्रतिक्रिया के योग्य है? क्योंकि 2014 में, जब प्रियंका से उनके बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि ‘कौन स्मृति’?

यह योग्यता का सवाल नहीं है। अमेठी के लोगों से मेरा सीधा रिश्ता है। यह एक लंबा रिश्ता है, वे जानते हैं कि मैंने उनके लिए क्या किया है? वे समझते हैं कि मैं क्या कर रहा हूं, और मैं श्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूं। मेरा चुनाव अमेठी के लोगों के साथ मेरे संबंधों के बारे में है। इससे स्मृति ईरानी का क्यावहत सम्बन्ध है ? स्मृति ईरानी अमेठी में अपना पक्ष रख सकती हैं, मैं उन्हें अपना पक्ष रखने से नहीं रोक रहा हूँ।

(प्रियंका गांधी का आम चुनाव में प्रभाव)

क्या इस चुनाव में प्रियंका का प्रभाव काम किया है?

(मुस्कुराते हुए) आपको यह उन्हीं से पूछना चाहिए।

Photo: Janta Ka Reporter

…लेकिन आप क्या सोचते हैं?

उन्होंने और श्री (ज्योतिरादित्य) सिंधिया ने एक बड़ा बदलाव लाया है। उनका मुख्य लक्ष्य कांग्रेस की विचारधारा का बचाव करना और भाजपा को हराने के लिए (2022 में) कांग्रेस के विधानसभा चुनाव (यूपी) जीतने में मदद करना है। हम इस लोकसभा चुनाव में भी अच्छे परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन असली लक्ष्य अगला विधानसभा (विधानसभा चुनाव) है।

क्या आपको लगता है कि उन्हें पहले लाया जाना चाहिए था? ना कि इस साल मार्च में?

नहीं, मैंने अपनी बहन से बात की और हम इस बात पर सहमत थे कि जब तक उनके बच्चे घर पर हैं और स्कूल जा रहे हैं, तब तक वह राजनीति में शामिल नहीं होगी। वह ऐसा करने में सक्षम नहीं थी, मैंने उनसे एक दो बार पूछा और फिर मैंने सोचा कि उन पर दबाव डालना और बच्चों के लिए उनके जीवन को कठिन बनाना मेरे लिए अनुचित था।

कानपुर में उनसे साथ का आपका वीडियो वायरल हो गया था। वह भाई-बहन का एक मधुर पल था। अभियान के दौरान आपने अपनी बहन के साथ कितनी बार बातचीत की और नोट्स का आदान-प्रदान किया?

हर समय, और हम वास्तव में एक दूसरे से टकराते नहीं हैं। हम एक दूसरे को अपने दिलों में रखकर चलते हैं। इसलिए हम एक साथ बहुत कुछ कर चुके हैं और हम एक दूसरे से प्यार करते हैं। और हम कई मायनों में एक समान हैं।

वह आपके प्रति बहुत रक्षात्मक हैं और हमें यह पता चल गया है।

मुझे ऐसा नहीं लगता।

उन्होंने वायनाड में यह स्पष्ट कर दिया, जब उन्होंने कहा कि कृपया मेरे भाई की देखभाल करना।

(मुस्कुराते हुए) मुझे लगता है कि आप कह सकते हैं कि हम एक दूसरे से बहुत करीब हैं।

(चुनाव आयोग और EVM विवाद पर कांग्रेस अध्यक्ष की प्रतिक्रिया)

चुनाव आयोग के बारे में बात करते हैं। चुनाव आयोग के आचरण और कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। बंगाल एक उत्कृष्ट उदाहरण है। हमने कई अन्य उदाहरण देखे हैं, जिसमें पीएम मोदी को लगभग 7 मौकों पर क्लीन चिट मिल चुकी है। आप इसे कैसे देखते हैं?

सभी संवैधानिक संस्थाओं पर सुनियोजित ढंग से होल मे किये गए हैं। मीडिया पर हमला हो रहा है, सुप्रीम कोर्ट पर हमला हो रहा है, आपके 4 जज सामने आ रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है। यह स्पष्ट है कि चुनाव आयोग दबाव में है, यह स्पष्ट है कि पूरा कार्यक्रम श्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था। आप देख सकते हैं कि बंगाल में क्या चल रहा है। आप श्री मोदी द्वारा हर संस्था पर डाले जा रहे दबाव को देख सकते हैं और लोगों में डर है।

लेकिन अगर आप सत्ता में आते हैं, तो यह बहुत बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि अगर संस्थानों को ध्वस्त किया जा रहा है, तो उनका पुनर्निर्माण आसान नहीं होगा। क्या ऐसा मानते हैं?

नहीं, यह पुनर्निर्माण नहीं है। इसका दबाव उन संस्थानों पर है जो वर्तमान में है। बेशक कुछ काम करने पड़ेंगे, जिन्हें करने की जरूरत है, लेकिन एक बड़ा असर सिर्फ पीएम और उनके साथी के डर से है। कांग्रेस के किसी भी पीएम ने कभी संस्थानों को भयभीत नहीं किया।

बुधवार की रात, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की असाधारण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, उन्होंने कहा कि RSS के लोगों ने चुनाव आयोग में घुसपैठ कर ली है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

मुझे लगता है कि उनके कहने में कुछ सच्चाई है। मुझे लगता है कि RSS के लोग हर सरकारी संस्थानों में व्यवस्थित रूप से बड़ी संख्या में प्रवेश कर चुके हैं।

बंगाल मामले में मायावती और अखिलेश की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, लेकिन आपकी ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। क्या आप अभी प्रतिक्रिया देना चाहेंगे?

नहीं, मेरी प्रतिक्रिया बहुत स्पष्ट है। मैं बस आपको बता रहा हूं। मुझे लगता है कि बंगाल में जो हो रहा है वह बिल्कुल गलत है। मुझे लगता है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है। उदाहरण के लिए, श्री नरेंद्र मोदी को प्रचार करने की अनुमति है और उनकी रैली के बाद चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध है? यह अनुचित है।

आपको लगता है कि इससे फर्क पड़ेगा?

नहीं, मुझे नहीं लगता कि इससे कोई फर्क पड़ने वाला है। श्री नरेंद्र मोदी चुनाव जीतने वाले नहीं हैं। वह जा रहे हैं। वह निश्चित रूप से बंगाल में सीटें जीतने वाले नहीं हैं। तो कोई बात नहीं।

ईवीएम विवाद पर आप क्या सोचते हैं? चुनावों के दौरान मशीन में आ रही खराबी और अन्य शिकायतों को देखते हुए क्या भारत में बैलेट पेपर को वापस नहीं लाना चाहिए?

मुझे लगता है कि यह एक वार्तालाप का विषय है जिसे भारत के लोगों को जल्द ही करना होगा। चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं या नहीं, इसमें कोई संदेह नहीं है। चुनाव किसी भी लोकतंत्र की आधारशिला होती हैं और इस प्रक्रिया और परिणाम के बारे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए। वर्तमान में गंभीर चिंताएं हैं जिन्हें दूर नहीं किया गया है। भारत में चारों ओर, हजारों EVM की खराबी की खबरें आई हैं। EVM के गुम होने की भी सूचना आई! कहीं मतदान पूरा होने के 24 घंटे से अधिक समय बाद भी ईवीएम को ले जाने वाला ट्रक स्ट्रांग रूप में दिखाई दे रहा है। ये क्या चल रहा है? मुझे यकीन है कि यह बहस में शामिल प्रमुख मुद्दों में से एक होगा और नई लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति बनेगी।

(राफेल को लेकर ‘जनता का रिपोर्टर’ की खबर पर क्या बोले राहुल?)

अब राफेल के बारे में बात करते हैं, एक स्टोरी जो हमने 2017 में प्रकाशित की थी। आपने इस स्टोरी पर अपना चुनावी नारा ‘चौकीदार चोर है’ दिया।

यह एक प्रत्यक्ष मामला है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि श्री नरेंद्र मोदी और श्री अनिल अंबानी ने राफेल सौदे में पैसा चुराया है। इसके बारे में कोई संदेह नहीं है। यह बिल्कुल स्पष्ट है। तीन बार श्री पर्रिकर ने नए सौदे के बारे में जानकारी से इनकार किया था। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा कि वह श्री मोदी थे जिन्होंने उन्हें श्री अनिल अंबानी को कॉन्ट्रेक्ट देने के लिए कहा था। आपको और क्या चाहिए? और पूरा भारतीय मीडिया चुप है? किसी में कोई सवाल पूछने की हिम्मत नहीं है? राफेल पर, कुछ अपवादों के साथ, भारतीय मीडिया ने खुद को शर्मिंदा किया है।

और श्री हॉलैंड जब कनाडा गए तो जब उनसे वही सवाल किया गया तो उन्होंने इसे फिर दोहराया। यह स्पष्ट है। और यह मेरे लिए आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला है कि भारतीय मीडिया ने राफेल पर कैसी प्रतिक्रिया दी। ये अविश्वसनीय है। मैंने उन्हें प्रोत्साहित किया, लेकिन मैं आपको बताऊंगा कि मीडिया में बड़े पैमाने पर प्रतिरोध हुआ था। और मुझे खुशी है कि आप नहीं डर रहे थे, और आपने स्टोरी (राफेल) को प्रकाशित कर दिया।

अगर आप सत्ता में आए तो क्या करेंगे? क्या सौदा होगा?

कानून अपना काम करेगा। यह कोई जटिल मामला नहीं है। सभी प्रक्रियाओं को तोड़ दिया गया है, रक्षा मंत्रालय ने खुद इसे ब्लैक एंड व्हाइट में डाल दिया है कि पीएम सीधे फ्रांस के साथ बातचीत कर रहे हैं, उन्हें दरकिनार कर रहे हैं। इसमें ब्लैक एंड व्हाइट है, यह बहुत सीधा है।

क्या आप यूपीए शासन के दौरान डासौ एविएशन के साथ चर्चा में आए नियमों और शर्तों को वापस लाना चाहेंगे?

अभी यह कहना मेरे लिए ठीक नहीं है। मुझे जानकारी नहीं है। मुझे यह पता है कि ऐसा लगता है कि राफेल में भ्रष्टाचार हुआ है और इसकी जांच होनी चाहिए। मैंने कई बार पीएम से पूछा कि आप भ्रष्टाचार के बारे में बात करते हैं, आइए और मेरे साथ बहस करिए, आप जहां चाहो। किसी भी समय, किसी भी जगह, और मैं यह बात 30-40 बार कह चुका हूं। उसके पास हिम्मत नहीं है, क्योंकि वह जानते हैं कि वह जिस क्षण मेरे साथ आकर राफेल पर बहस करते हैं, श्री नरेंद्र मोदी का वह अंत होगा।

अल्पसंख्यकों और दलितों के बीच एक भयानक डर है। सत्ता में आने पर क्या आप उनके अंदर भरोसा जगाएंगे?

पहली बात जो समझने की जरूरत है वह यह कि कि ये दर बहुत हद तक श्री मोदी द्वारा बनाया गया है। । ये भारत नहीं है। यह भाजपा और आरएसएस की राजनीतिक मशीन द्वारा डिजायन किया गया है। हम उन्हें चुनाव में हराने जा रहे हैं, और यह पहला कदम होगा। भारत में हर कोई यह देखेगा कि श्री नरेंद्र मोदी को उनकी जगह पर रखा गया है, न केवल कांग्रेस पार्टी द्वारा, बल्कि भारत के लोगों द्वारा। क्योंकि उन्होंने पिछले 5 वर्षों में भारत के साथ कैसा व्यवहार किया है। जहां तक मेरा सवाल है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस धर्म के हैं, आप किस समुदाय से हैं, किस भाषा में बोलते हैं या किस राज्य से आते हैं, अगर आप भारतीय हैं, तो आप भी वही हैं और आप के साथ सामान सलूक किया जाएगा।

(कांग्रेस का लक्ष्य)

भाजपा का कहना है कि उनका 300 से अधिक का लक्ष्य है। आपका लक्ष्य क्या है?

300 प्लस क्या? आपका मतबल बूथ है? (हंसते हुए)

सीटें! लोकसभा सीटें

मेरा ऐसा लक्ष्य नहीं हैं। मेरा लक्ष्य भारतीय लोगों की आवाज़ को व्यक्त करना है, मेरा लक्ष्य उन्हें ध्यान से सुनना, कोशिश करना और समझना है कि वे क्या चाहते हैं और हम उनकी मदद करना चाहते हैं और जो उन्हें पसंद है उसे हासिल करना है। मैं भारतीय लोगों की इच्छा पर निर्भर हूं। वे 23 तारीख को जो फैसला करेंगे, मैं उसका सम्मान करूंगा।

क्या आप इस बारे में कुछ बताएंगे कि आपने इस चुनावी अभियान दौरान एक व्यक्ति के रूप में  क्या सीखा ? क्या आप खुद को एक बेहतर नेता के रूप में देखते हैं?

मेरे बारे में ये निष्कर्ष दूसरे निकालें तो बेहतर है। मैं क्या नोटिस करता हूं कि मैं लगातार बदल रहा हूं। मैं कहूंगा कि मैं अब बहुत ध्यान से सुनता हूं और इसका श्रेय भारत के लोगों को दिया जा सकता है और आप जैसे मीडिया वालों को।

आप अपनी मां के साथ चुनावों के बारे में कितनी बार बात कर पाए हैं, वह एक पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं?

मैं अपनी मां और बहन दोनों के साथ रोज चैट करने की कोशिश करता हूं।

चुनावों के बारे में?

नहीं… नहीं, बस नमस्ते, आप कैसे हैं? क्या चल रहा है? इस तरह की बातें।

क्या वह आपके चुनावी अभियान, आपकी रैलियों के बारे में पूछताछ करती हैं कि वे कैसे गए?

हां, वह सोचती है कि मैं कहां हूं। उन्हें मेरी सुरक्षा की चिंता ज़्यादा रहती है। वह मुख्य रूप से मेरे विमानों और हेलीकॉप्टरों में सफर को लेकर ज़्यादा चिंतित रहती हैं।

पीएम मोदी ने चुनावी रैलियों के दौरान इंटरव्यू भी देना शुरू कर दिया है। आप उनके इस क़दम के बारे में क्या कहेंगे?

यह अच्छा है कि मेरी तरह श्री नरेंद्र मोदी भी इसे कर रहे हैं। लेकिन, जहाँ तक उनके इंटरव्यूज का सवाल है तो मैंने पाया कि आम का बयान विचित्र था। हम इस दौरान चुनाव के मैदान में हैं, और नौकरियों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, हिंसा और देश के भविष्य पर चर्चा कर रहे हैं! और जब हम देश के भविष्य के बारे में चर्चा कर रहे हैं, पीएम देश को बता रहे हैं कि वह आम कैसे खाते हैं? मुझे लगा कि यह बड़ा अजीब था, उसी दिन मुझे ये एहसास हो गया कि हम चुनाव जीत गए हैं मोदी की कहानी ख़त्म हो गयी है।

आखिरी सवाल, आपने मीडिया के बारे में बात की। क्या इसे  निगरानी की आवश्यकता है? 23 मई के बाद अगर आप सत्ता में आते हैं तो आपकी सरकार क्या कदम उठाएगी?

हमें मीडिया में अपने दोस्तों के साथ वार्तालाप करना होगा। मैं मीडिया की आवाज़ को दबाने या उनकी आवाज़ को कुचलने में विश्वास नहीं करता। मुझे लगता है कि आप इस देश में एक बहुत महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, और किसी भी आधुनिक लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र मीडिया की अति आवश्यकता है। लेकिन मुझे लगता है कि ऐसी चीजें हैं जिन्हें हम सुधार सकते हैं, और मैं बातचीत के माध्यम से ऐसा करूंगा।

 

 

 

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