राफेल मामला: राहुल गांधी ने दाखिल किया जवाब, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था अवमानना का नोटिस

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल मुद्दे पर अदालत की अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी नोटिस पर सोमवार (29 अप्रैल) को अपना जवाब दाखिल किया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सांसद मीनाक्षी लेखी ने राफेल मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा दायर किया है। न्यायालय ने राहुल गांधी की टिप्पणी ‘चौकीदार चोर है’ को लेकर उनके खिलाफ 23 अप्रैल को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया था।

राहुल गांधी

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष राहुल गांधी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सुनील फर्नांडिस ने नोटिस पर जवाब दाखिल करने की अनुमति मांगी। पीठ ने इस संबंध में उन्हें जवाबी हलफनामा दायर करने की अनुमति दे दी है। गांधी की टिप्पणियों के बारे में शीर्ष अदालत ने कहा था कि इसे ‘‘गलत तरीके से उसके हवाले से बताया गया’’ है।

राहुल गांधी जता चुके हैं खेद

इससे पहले 22 अप्रैल को राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर राफेल मामले में शीर्ष अदालत के फैसले पर की गई अपनी टिप्पणी के लिए खेद जताया था। शीर्ष अदालत ने 15 अप्रैल को स्पष्ट किया था कि राफेल पर उसके फैसले में ऐसा कुछ भी नहीं था जिसके हवाले से यह कहा जा सके कि ‘चौकीदार नरेंद्र मोदी चोर हैं’। राहुल गांधी ने न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि अब शीर्ष अदालत भी मानती है कि ‘चौकीदार चोर है।’’

शीर्ष अदालत ने इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी की सांसद और वकील मीनाक्षी लेखी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर गांधी से स्पष्टीकरण मांगा था। शीर्ष अदालत के निर्देश पर दायर हलफनामे में गांधी ने कहा था कि उन्होंने चुनाव प्रचार के जोश में वह टिप्पणी की जिसका प्रतिद्वंद्वियों ने दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि उनकी मंशा न्यायालय का सम्मान कम करने की कत्तई नहीं थी।

हालांकि, गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राफेल पर कोर्ट के फैसले का इस्तेमाल कर उनकी सरकार को क्लीन चिट मिलने का दावा किया है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने स्पष्ट किया था कि राफेल फैसले पर मीडिया में आई गांधी की टिप्पणी में गलत तरीके से सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया गया था। पीठ ने कहा था कि किसी भी नेता को अदालती फैसले या उसके आदेश को अपने भाषण में शामिल नहीं करना चाहिए। (इनपुट- भाषा के साथ)

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