RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन बोले- आलोचनाएं स्‍वीकार नहीं करने के कारण नीतियां बनाने में गलतियां करती है सरकार

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अपने एक ब्लॉग में कहा कि शक्तिशाली पदों पर बैठे लोगों को आलोचनाओं को सहना ही पड़ता है और आलोचनाओं को दबाना नीतिगत गलतियों का कारण बनती हैं। इसके बाद खराब परिणाम आने तक सरकार अपने फैसले को लेकर खुशफहमी में रह सकती है।

रघुराम राजन
File photo

लिंक्डइन पेज पर साझा की गई एक सार्वजनिक पोस्ट में राजन ने कहा कि सरकारें जो सार्वजनिक आलोचनाओं को दबाती हैं, वह स्वयं एक घोर असंतोष है। राजन ने अपने निबंध में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के साथ साथ न्यायविद नानी पालखीवाला को भी याद करते हैं, जिनकी जन्म शताब्दी करीब आ रही है। वह लिखते हैं, “वर्तमान समय में हमें यह याद रखना चाहिए कि भारत को जो चीज महान बनाती है, वह इसकी विविधता, वाद-विवाद और सहिष्णुता है। जो इसको कमजोर बनाती है वह संकीर्ण मानसिकता, अश्लीलता और विभाजन है। मैं इस निबंध में तर्क देता हूं कि राजनीतिक रूप से जो सच है वह आर्थिक दृष्टिकोण से भी उतना ही सच है।”

आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने लिखा, “शासन में बैठे के लोगों को आलोचना को सहन करना पड़ता है। बेशक मीडिया में आलोचना सहित कुछ गलत सूचनाएं और व्यक्तिगत हमले हो जाते हैं। मैंने इन सब चीजों को अपने पूर्व के काम में देखा है। हालांकि, आलोचना को दबा देना नीतिगत गलतियों के लिए एक सुनिश्चित वाला नुस्खा है। यदि सभी आलोचकों को सरकारी अधिकारी की तरफ से फोन आए और उन्हें उन्हें चुप रहने को कहा जाए या फिर सत्ताधारी पार्टी के ट्रोल आर्मी उन्हें अपना निशाना बनाए, तो कई लोग आलोचना कम करते हैं। जब तक कि सरकार को कटु-सत्य से सामना नहीं होता, वह बेहद ही सुखद माहौल में रहती है।”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सत्ता में शक्तिशाली पदों पर बैठे लोगों को आलोचना को बर्दाश्त करना ही होगा। रघुराम राजन ने कहा, “निस्संदेह, कुछ आलोचनाएं, जिनमें मीडिया में की जा रही आलोचनाएं भी शामिल हैं, गलत जानकारी पर आधारित होती हैं, खास मकसद से की जाती हैं, पद के स्थान पर व्यक्ति के खिलाफ होती हैं। निश्चित रूप से पिछली नौकरियों के दौरान मेरे खिलाफ भी ऐसा हुआ है। हालांकि,आलोचनाओं को दबाते रहना नीतिगत गलतियों का रामबाण नुस्खा है।”

अपने निंबध में पूर्व गवर्नर ने विदेशी विचारों और विदेशियों के संदर्भ में संदेह भी व्यक्त किया है। रघुराम राजन के इन विचारों की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद से रतिन रॉय तथा शमिका रवि को मोदी सरकार द्वारा हटाया जाना है, जिन्हें कथित रूप से इसलिए हटाया गया, क्योंकि वे सरकार की नीतियों की आलोचना किया करते थे।

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