रघुराम राजन का अपने आलोचकों को करारा जवाब, कहा बताएँ महंगाई कहाँ कम हुई है, कहा उनके खिलाफ आलोचनाएं महज़ डायलागबाज़ी है

0

रिज़र्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने अपने आलोचकों पर हमला करते हुए कहा कि वह बताएं कि मंगाई कहाँ कम हुई है।

पीटीआई भाषा की एक report ke अनुसार राजन ने आपने आलोचकों को चुनौती दी कि वो उन पर नीतिगत ब्याज दर में कटौती का कदम उठाने में समय से पीछे रहने का आरोप लगाने से पहले यह साबित करें कि मुद्रास्फीति कहां कम हुई है। उन्होंने ऐसी आलोचनाओं को महज ‘डायलागबाजी’ करार देते हुए उसे खारिज किया। आरबीआई गवर्नर राजन ने कहा कि वह ऐसे ‘डायलागों’ पर ध्यान नहीं देते क्योंकि ऐसी बातों का कोई ‘आर्थिक सिर-पैर’ नहीं है।

Also Read:  क्या वाकई इस गुजराती अखबार को नोटबंदी पर सरकार के कदम की जानकारी थी ?

राजन को अक्सर सरकार और उसकी नीतियों के आलोचक के रूप में देखा जाता रहा है।

जनसत्ता की एक खबर के अनुसार, आर्थिक वृद्धि के संबंध में उन्होंने कहा कि आर्थिक हालात में सुधार की रफ्तार को लेकर जरूर ”बहुत अधिक निराशा है लेकिन रफ्तार में यह कमी देश में लगातार दो साल के सूखे, वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमजोरी और ब्रेक्जिट जैसे बाह्य झटकों के कारण है।” राजन ऊंची ब्‍याज दरों को लेकर हो रही आलोचना पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति की दिशा का उल्लेख किया, जो लगातार चौथे महीने बढते हुए जून में 5.77 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि इन बातों को देखते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन ‘बहुत सराहनीय’ है।

Also Read:  हम चाहे जहाँ रहे जैसे रहे हमें अपना मुश्किल दौर और विगत समय नहीं भूलना चाहिए: लालू प्रसाद यादव

राजन ने कहा कि किसी खास परिस्थिति में किये गये निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ”जब तक कोई व्यक्ति सही निर्णय लेने के लिये प्रयास करता है, उन्हें उस निर्णय की परिणिति के आधार पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिये … आप जानते हैं कि कई बार अनिश्चितता की वजह से यह संभावना बन जाती है कि वह फैसला गलत हो जाता है।”

वित्तीय समावेश के बारे में गवर्नर ने कहा कि हर गांव में बैंक की शाखा नहीं खोली जा सकती है क्योंकि यह काफी खर्चीला होगा। इस मामले में एक संभावना मोबाइल शाखा है और कुछ बैंक एसी शाखायें शुरू कर रहे हैं जो कि एक गांव से दूसरे गाव घूमेगी और किसी एक गांव में तय समय पर उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ऐसी शाखाओं के बारे में एक परिभाषा की तलाश में है कि इन्हें मिनी शाखा, सूक्ष्म शाखा और मोबाइल शाखा क्या नाम दिया जा सकता है। उन्होंने नये संस्थानों और नई प्रौद्योगिकी के साथ काम करने की जरूरत भी बताई।

Also Read:  एंबुलेंस से ‘समाजवादी’ शब्द हटाने पर बिफरीं डिंपल, पूछा- 2000 के नोट पर हाथी और कमल क्यों?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here