#JKRImpact: फ्रांसीसी राष्ट्रपति के भारत पहुंचते ही राफेल को लेकर एक बार फिर घिरी मोदी सरकार, ट्विटर पर ट्रेंड हुआ #RafaleScamExposed

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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों शुक्रवार (9 मार्च) देर रात चार दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ खुद एयरपोर्ट पहुंचकर इमैनुएल की अगवानी की। इमैनुएल के साथ उनकी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों भी भारत आई हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के विमान से उतरते ही पीएम मोदी ने गले लगाकर उनका स्वागत किया। इस बीच मैक्रों के भारत पहुंचते ही एक बार फिर राफेल लड़ाकू विमान सौदा चर्चा में आ गया है।बता दें कि ‘जनता का रिपोर्टर’ द्वारा राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे को लेकर किए गए खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है। कांग्रेस राफेल डील पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को बख्शने के मूड में नहीं हैं। सरकार और विपक्ष के बीच राफेल सौदे को लेकर घमासान जारी है। एक ओर जहां केंद्र सरकार इस सौदे को गोपनीयता का हवाला देकर सार्वजनिक करने से बच रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इसमें घोटाले का आरोप लगा रही है।

शनिवार (10 मार्च) को जैसे ही फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत पहुंचे मोदी सरकार एक बार फिर राफेल विमान सौदे को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। ट्विटर पर शनिवार सुबह से ही #RafaleScamExposed नंबर वन पर ट्रेंड कर रहा है। इस हैशटैग के जरिए लोग फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के उस बयान वाली खबर को जमकर शेयर कर रहे हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार अगर विपक्ष के साथ राफेल डील का ब्योरा साझा करे तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

दरअसल, मैक्रों ने समाचार चैनल इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा है कि अगर मोदी सरकार विपक्ष के साथ राफेल सौदे का विवरण साझा करना चाहती है तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। बता दें कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद मोदी सरकार इसलिए सवालों के घेरे में आ गई है, क्योंकि पिछले दिनों रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्रांस के साथ गोपनीयता का हवाला देते हुए विपक्ष द्वारा राफेल डील की राशि सार्वजनिक किए जाने की मांग को खारिज कर दिया था।

मोदी सरकार विपक्ष के साथ साझा कर सकती है राफेल डील का ब्योरा 

मैक्रों ने कहा कि, ‘अगर मोदी सरकार राफेल डील के बारे में विपक्ष के साथ कोई बारीक जानकारी साझा करना चाहती है, तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। फ्रांस इसका विरोध नहीं करेगा।’ उन्होंने कहा कि राफेल डील से दोनों देशों को फायदा हुआ है। ऐसी डील में दोनों देशों के संवेदनशील हित छिपे होते हैं। इसलिए कई बातें गोपनीय रखी जाती हैं। अगर भारत सरकार इस डील पर उठ रहे विवादों के बीच विपक्ष के सामने कुछ बारीकियों पर से पर्दा उठाना चाहती है, तो उनकी सरकार को इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी।

दरअसल, पिछले दिनों राफेल की कीमत का खुलासा करने से रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण के इनकार कर दिया था। कांग्रेस सांसद राजीव गौड़ा के सवाल के लिखित जवाब में रक्षामंत्री ने एक रॉफेल विमान कितने में खरीदी गई है इसका ब्यौरा नहीं दिया था। सीतारमण ने संसद में कहा था कि अंतर्देशीय सरकारों के बीच हुए करार में गोपनीय सूचना होने के कारण फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान सौदे के ब्यौरे का खुलासा नहीं किया जा सकता।

रक्षा मंत्री ने कहा था कि, ”भारत और फ्रांस के बीच राफेल विमान की खरीद को लेकर हुए अंतर-सरकार समझौता के अनुच्छेद 10 के अनुसार, 2008 में भारत और फ्रांस के बीच किए गए सुरक्षा समझौते के प्रावधान विमानों की खरीद, गुप्त सूचनाओं की सुरक्षा व सामग्री के आदान-प्रदान पर लागू हैं।” बता दें जनता का रिपोर्टर ने राफेल विमान सौदे को लेकर दो भागों (पढ़िए पार्टी 1 और पार्टी 2 में क्या हुआ था खुलासा) में बड़ा खुलासा किया था। जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में भुचाल आ गया।

कांग्रेस ने एक बार फिर साधा निशाना

कांग्रेस ने एक बार फिर राफेल लड़ाकू विमान सौदे का मुद्दा उठाते हुए मोदी सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता करने का आरोप लगाया है। बता दें कि ‘जनता का रिपोर्टर’ द्वारा किए गए खुलासे के बाद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल सौदे को ‘पर्सनल डील’ करार दे चुके हैं। कांग्रेस ने राफेल लड़ाकू विमानों का मुद्दा ऐसे वक्त उठाया है, जब अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो भारत आए हैं।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार (9 मार्च) को कहा कि सरकार भले ही राफेल की कीमत को छुपा रही हो, लेकिन राफेल ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कीमत बता दी है। आजाद ने कहा कि राफेल ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि कतर और मिस्र ने 2015 में 48 विमान 1,319 करोड़ रुपये प्रति राफेल खरीदे हैं।

वहीं, 2016 में भारत ने 36 लडाकू विमान 1,671 करोड़ रुपये प्रति विमान की दर से खरीदे हैं। यानी भारत ने हर विमान की 350 करोड़ रुपये अधिक कीमत दी। इससे 36 विमानों के लिए सरकार ने कतर और मिस्र से 12,632 करोड़ रुपये अधिक दिए हैं। राफेल लड़ाकू विमान मामले पर कांग्रेस ने सरकार से नौ सवाल पूछे हैं।

इनमें कहा कि यूपीए सरकार के वक्त 2012 में एक विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये थी। जबकि 2015 में इस सौदे को रद्द कर एनडीए सरकार ने 1,670 करोड़ रुपये में क्यों खरीदा था। इस सौदे में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर क्यों नहीं है। जबकि यूपीए के वक्त की गई डील में यह शामिल थी। सरकार जांच कराने से क्यों बच रही है।

 

 

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