राफेल सौदा विवाद: मोदी सरकार की तरफ से दिए कीमत के ब्यौरे पर सुप्रीम कोर्ट में आज होगी अहम सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट
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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने वायु सेना के लिए 36 राफेल लड़ाकू विमान सौदे की कीमत का जो ब्योरा सील बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपा हैं, उसकी जांच आज यानी बुधवार (14 नवंबर) को की जाएगी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसके कौल एवं न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ इस मामले में अहम सुनवाई करेगी, जिसमें याचिकाकर्ता भी दलीलें देंगे। याचिकाकर्ताओं ने सौदे की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की है।

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आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए मोदी सरकार ने राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की कीमत का ब्योरा सोमवार (12 नवंबर) को सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिया। राफेल की कीमतों का खुलासा करने से इनकार करने के बाद केंद्र सरकार ने सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को इस बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने राफेल की खरीद प्रक्रिया में उठाए गए कदमों के विवरण संबंधी दस्तावेज याचिकाकर्ताओं को भी सौंपे थे।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट समेत सभी याचिकाकर्ताओं को यह भी बताया कि यह पूरा सौदा कैसे हुआ। सरकार ने विमान की कीमतों का ब्योरा सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपा था। याचिकाकर्ता दस्तावेजों में दर्ज बातों पर अपनी दलील दे सकते हैं। इससे पहले, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक 36 राफेल विमानों की खरीद के संबंध में किए गए फैसले के ब्योरे वाले दस्तावेज याचिकाकर्ताओं को सौंप दिए।

समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के मुताबिक दस्तावेजों के अनुसार राफेल विमानों की खरीद में रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया है। विमान के लिये रक्षा खरीद परिषद की मंजूरी ली गई और भारतीय दल ने फ्रांसीसी पक्ष के साथ बातचीत की। पीटीआई के मुताबिक दस्तावेजों में कहा गया है कि फ्रांसीसी पक्ष के साथ बातचीत तकरीबन एक साल चली और समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति की मंजूरी ली गई।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्टूबर के सुनवाई को दौरान फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद पर केंद्र सरकार से ब्योरा मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने एनडीए सरकार से कहा था कि वह 10 दिनों के भीतर राफेल लड़ाकू विमानों से जुड़े ब्यौरे बंद लिफाफे में सौपें। तब सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अदालत से कहा था कि सरकार के लिए अदालत को कीमतों की जानकारी उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा क्योंकि यह जानकारी संसद को भी नहीं दी गई है।

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