राफेल मामले में पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से 4 मई तक मांगा जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (30 अप्रैल) को राफेल मामले में अपने 14 दिसंबर को दिए गए पूर्व के फैसले के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिका पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को औपचारिक नोटिस भेजकर शनिवार यानी चार मई तक जवाब देने को कहा है। मामले में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते की मोहलत मांगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्‍हें चार मई तक जवाब दाखिल करना होगा। सर्वोच्‍च अदालत अब इस मामले में छह मई को सुनवाई करेगी।

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सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के.एम. जोसेफ की पीठ ने यह निर्देश तब दिया, जब मोदी सरकार ने राफेल समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित करने की मांग की। सर्वोच्च न्यायालय ने राफेल मामले की समीक्षा याचिका पर केंद्र से शनिवार तक जवाब देने को कहा, और अगली सुनवाई की तिथि छह मई तय कर दी। महान्यायवादी ने हालांकि कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दाखिल नए दस्तावेजों पर जवाब देने के लिए केंद्र को कम से कम चार सप्ताह का समय चाहिए।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष 14 दिसंबर को फ्रांस से 36 राफेल फाइटर प्लेन खरीद प्रक्रिया की जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया था। न्यायालय ने अपने फैसले में मोदी सरकार को क्लीन चिट देते हुए कहा था कि देश के लिए लड़ाकू विमान जरूरी हैं और उसके बगैर काम नहीं चलेगा। सौदे में कथित अनियमितताओं के लिए सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने कहा था कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है। ऑफसेट साझेदार के मामले पर तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि किसी भी निजी फर्म को व्यावसायिक लाभ पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। इस आदेश के खिलाफ पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी।

सुप्रीम कोर्ट 10 अप्रैल दोबारा सुनवाई करने के लिए राजी हुआ था। तब मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने लीक हुए दस्तावेजों को वैध माना था। हालांकि, सरकार ने दलील दी थी कि इन दस्तावेजों को खारिज किया जाना चाहिए। न्यायालय ने गत 10 अप्रैल को केंद्र सरकार की प्रारम्भिक आपत्तियों को खारिज करते हुए पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर करने का फैसला दिया था।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने देश की सुरक्षा का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की याचिका खारिज करने की मांग की थी। दलील दी गई थी कि तीनों याचिकाओं में जिन दस्तावेजों का प्रयोग हुआ है, उस पर सरकार का विशेषाधिकार है। लिहाजा उन दस्तावेजों को याचिका से हटाया जाना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को नहीं माना था।

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