फिल्म समीक्षा: दमदार अभिनय दिखाकर शाहरुख खान पर भारी पड़े नवाजुद्दीन, असरदार डायलॉग्स का हेवी डोज है ‘रईस’

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रईस की शुरुवात होती है गुजरात के छोटे से शहर से जहां शराब बंद होने के बावजूद भी कारोबार जोर शोर से चल रहा है। यहीं गरीबी में पला-बढ़ा रईस (शाहरुख खान) अपनी मां के साथ रहता है लेकिन अपनी माँ की बात ‘कोई धंधा छोटा नहीं होता और धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है’ को गांठ बांध कर आगे बढ़ता है और अवैध शराब के कारोबार में घुस जाता है। ‘बनिए का दिमाग और मियां भाई की डेरिंग’ की बदौलत रईस एक बाद एक कामयाबी की सीढ़ियां अपने करियर में चढ़ता चला जाता हैं।

 शाहरुख खान

परेशानी तब शुरू होती है जब पुलिस ऑफिसर जयदीप मजमुदार (नवाजुद्दीन सिद्धिकी) आता है। जो अवैध शराब कारोबारियों के सख्त खिलाफ है। फिर दोनों के बीच चुहे-बिल्ली का खेल शुरू हो जाता है।

इसी बीच रईस कोमोहसिना (माहिरा खान) से प्यार है और वो उससे शादी कर लेता है। फिल्म अपने अंत मंे अच्छाई और बुराई के बीच फंसे नायक को सहानुभूति से जोड़कर दर्शकों से बांधकर फिल्म का अंत किया जाता है। यहीं रईस की कहानी है।

फिल्म के डायरेक्टर राहुल ढोलकिया कंफ्यूज हो गए हैं, कि वो अपनी पुरानी इमेज को बचाएं या शाहरुख के लिए फिल्म बनाएं। बहरहाल इन सबके बीच अगर किसी ने फिल्म को बचाया है तो वो हैं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी। सनी लियोनी का ड्रीमी आइटम नंबर फिल्म में अच्छा पैकेज है।

फिल्म का फर्स्ट हाफ बेहद ही दमदार है। बाद में पकड़ ढीली होती जाती है।फिल्म का बजट काफी तगड़ा था लेकिन देखते वक्त कहीं ना कहीं कुछ कमी रह जाती है। ऐसा कुछ भी नहीं था जो नया हो।

डायरेक्टर: राहुल ढोलकिया प्रोड्यूसर- फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी, गौरी खान
लेखक- राहुल ढोलकिया, हरित मेहता, आशिष वाशी, नीरज शुक्ला
स्टार कास्ट: शाहरुख खान, माहिरा खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी,  अतुल कुलकर्णी, आर्यन बब्बर
अवधि: 2 घंटा 22 मिनट
सर्टिफिकेट: U/A

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