पंजाब स्थित भारत की सर्व्वोच एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में एससी/एसटी वर्ग को नहीं मिल रहा उनका हक़

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प्रीति महावर, लुधियाना

भारत की सर्वोच्च एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी और देश में हरित क्रांति की प्रणेता पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में टीचिंग की पोस्ट्स में रिजर्वेशन पालिसी लागू न होने पर अनुसूचित जाति/ जनजाति वर्ग खासे परेशान हैं। 2 अगस्त को लुधियाना के फिरोजपुर रोड स्थित सर्किट हाउस में पंजाब एससीबीसी एग्रीकल्चरल स्टूडेंट्स एसोसिएशन की मीटिंग हुई। जिसमे पीएससीबीसीएएसए और आल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटी कम्युनिटीज एम्प्ल्योईज़ फेडरेशन की ऑफशूट विंग भारतीय विद्यार्थी मोर्चा के स्टेट प्रेसिडेंट, पंजाब डॉ निर्मल सिंह ने जेकेआर से हुई बातचीत में कहा की पिछले आठ सालों से उनके सीनियर्स और वो मिलकर पीएयू में इस पालिसी को लागू करवाने के पक्ष में कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन यूनिवर्सिटी अपना पक्ष स्पष्ट नहीं कर रही।

अब तक उन्होंने प्रेसिडेंट, वाईस प्रेसिडेंट, प्राइम मिनिस्टर, लोक सभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, चीफ सेक्रेटरी (भारत सरकार), इंडियन कौंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन, चीफ सेक्रेटरी (पंजाब), एग्रीकल्चरल सेक्रेटरी (पंजाब) और पीएयू बोर्ड ऑफ़ मैनेजमेंट को इसे लागू करवाए जाने के लिए कई लैटर्स भी भेजे हैं। निर्मल सिंह पीएयू के हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट में पीएचडी स्कॉलर भी हैं, उनका मानना है की हर बार यूनिवर्सिटी अपना बयान बदलती है।

उन्होंने कहा , “कभी वो खुद को केंद्र सरकार के अधीन मानती है, कभी राज्य सरकार तो कभी खुद को ऑटोनोमस बॉडी कह कर अपना पल्ला झाड लेती है। जबकि तथ्यों के आधार यह कहना लाज़मी है की प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया, लोक सभा, आईसीएआर, यूजीसी, आदि सभी पीएयू को रिजर्वेशन पालिसी लागू करने का निर्देश दे रही है। बावजूद इसके आज तक यूनिवर्सिटी में इस पालिसी को अपनाया नहीं गया।”

बामसेफ के पंजाब स्टेट प्रेसिडेंट प्रोफेसर हरनेक सिंह का कहना है की उन्होंने पीएयू तथा उसकी नीतियों से सम्बंधित 15 सवालों की एक आरटीआई डाली है जिसका जवाब 30 दिनों के अन्दर उन्हें मिलेगा। वहीँ दूसरी तरफ पीएयू के वाईस चांसलर डॉ बलदेव सिंह ढिल्लों ने जेकेआर के सवालों का जवाब रजिस्ट्रार से मांगने का निर्देश दिया और रजिस्ट्रार पीके खन्ना के आउट ऑफ़ इंडिया होने के कारण पीएयू का पक्ष स्पष्ट नहीं हो पाया।

पीएससीबीसीएएसए के प्रेसिडेंट निर्मल सिंह ने कहा, “अपने इस कारवां को पूरे पंजाब में फैलाने के लिए हमने आज बामसेफ की ऑफशूट विंग भारतीय विद्यार्थी मोर्चा को ज्वाइन किया है, जिसमे तकरीबन 1000 स्टूडेंट्स है और इस तरह हम पूरे पंजाब में अपनी आवाज़ बुलंद कर अपने उचित अधिकारों को ले कर रहेंगे”

बामसेफ के स्टेट प्रेसिडेंट हरनेक सिंह का कहना था कि पीएयू केंद्र द्वारा स्थापित रिजर्वेशन पालिसी का सरे आम उलंघन कर रही है।

उन्होंने कहा, “यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर डॉ बलदेव सिंह ने बोर्ड ऑफ़ मैनेजमेंट की मीटिंग में इस एजेंडा को उठाने की हवाहवाई बात तो कह दी लेकिन नतीजा आज तक नहीं निकला। हम संवैधानिक, कानूनी तथा शान्तिपूर्ण तरीके से अपने हक़ के लिए लड़ रहे हैं|

यह काबिलेजिक्र है की पीएयू का मदर लॉ पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी एक्ट 1961 है न की 1966 का कानून जो की संसद ने पारित किया था। इस सन्दर्भ में पंजाब एक्ट २००६ तथा मुख्यतः इसके सेक्शन 4 (2) न्यायसंगत है।

क़ानून के  विशेषज्ञ मानते हैँ कि यूनिवर्सिटी को “ऑटोनोमस बॉडी” के डिफेंस को लेकर पंजाब तथा भारत सरकार की घोषित नीतियों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। अगर यूनिवर्सिटी ऐसा करती है तो ऐसे कई प्रिसीडेंट्स है जिससे ऑटोनोमस बॉडीज को ऐसी घोषित नीतियों का पालन करवाने के लिए बाध्य किया जा सकता है।

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