विदेश में संपत्ति छिपाकर रखने वालों पर होगी कार्रवाई, जेटली

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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को कहा कि सरकार द्वारा विदेश में अघोषित संपत्ति के बारे में जानकारी देने के लिए तय की गई 90 दिन की समय सीमा में 638 लोगों ने जानकारी दी है और ये अब चैन की नींद सो सकते हैं। लेकिन, जिन लोगों ने जानकारी नहीं दी है उन्हें अब कानून का सामना करना होगा जो उन्हें जुर्माना और 10 साल की कैद तक पहुंचा सकता है।

अपने फेसबुक पेज पर जेटली ने “काले धन के खिलाफ राजग सरकार का अभियान” शीर्षक से लेख लिखा है। उन्होंने लिखा है कि विदेश में अपनी अवैध संपत्ति की जानकारी न देने वालों के लिए इस बात का खतरा बना हुआ है कि उनके बारे में जानकारी सरकार के उठाए कई कदमों के जरिए मिल ही जाएगी।

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जेटली ने लिखा है, “(राजग) सरकार ने उन तमाम लोगों के आयकर के आकलन को गति दे दी जिनके बारे में जानकारी थी कि उन्होंने विदेश में लिचटेन्सटिन और एचएसबीसी बैंकों में अवैध संपत्ति रखी हुई है।”

उन्होंने लिखा है कि कर आकलन के बाद इन खातों में करीब 6500 करोड़ रुपये होने का पता चला था।

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उन्होंने लिखा कि सरकार ने एक नया कानून बनाया। विदेश में अघोषित संपत्ति की जानकारी देने के लिए 90 दिन का समय दिया गया जो 30 सितंबर को समाप्त हो गया। जिन लोगों ने जानकारी दी है उन्हें 30 फीसदी कर देना होगा। उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

जेटली ने लिखा, “अघोषित संपत्ति की जानकारी देने वाले अब चैन से सो सकते हैं। जिन्होंने जानकारी नहीं दी है, उन्हें अब कानून का सामना करना होगा। उन्हें 30 फीसदी कर देना होगा और 90 फीसदी जुर्माना भरना होगा। मतलब उनकी संपत्ति जब्त होगी। उन्हें 10 साल की जेल भी हो सकती है। यह कानून अब भविष्य में धन को भारत से विदेश ले जाने की राह में बाधक बनेगा।”

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उन्होंने कहा कि घरेलू कालेधन के लिए सरकार अलग से कार्रवाई कर रही है। इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जी-20 में अवैध संपत्ति के बारे में देशों में सहयोग बढ़ाने की पहल का भी जिक्र किया। इस दिशा में अमेरिका से हुए एक समझौते का भी जेटली ने अपने लेख में जिक्र किया है।

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