अर्थव्यवस्था में सुस्ती पर बोलीं प्रियंका गांधी, “बीजेपी सरकार को ये स्वीकार करना चाहिए कि अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक मंदी है”

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अर्थव्यवस्था में सुस्ती और वाहनों की बिक्री में गिरावट को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि देश में ‘ऐतिहासिक मंदी’ है, लेकिन सरकार कब तक ‘खबरों की सुर्खियों’ से काम चलाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार को अर्थव्यवस्था में मंदी को स्वीकार करना चाहिए।

प्रियंका गांधी
फाइल फोटो: प्रियंका गांधी वाड्रा

प्रियंका गांधी ने मंगलवार(3 सितंबर) को ट्वीट कर लिखा, “किसी झूठ को सौ बार कहने से झूठ सच नहीं हो जाता। भाजपा सरकार को ये स्वीकार करना चाहिए कि अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक मंदी है और उन्हें इसे हल करने के उपायों की तरफ बढ़ना चाहिए। मंदी का हाल सबके सामने है। सरकार कब तक हेडलाइन मैनेजमेंट से काम चलाएगी?”

बता दें प्रियंका गांधी लगातार अर्थव्यवस्था की खस्ताहाल को लेकर ट्वीट कर रही हैं। 1 सितंबर को भी उन्होंने ट्वीट कर वित्त मंत्री से पूछा था कि वे बताएं देश में आर्थिक मंदी है कि नहीं। उन्होंने लिखा था वित्तमंत्री को सियासत से ऊपर उठाकर वित्त मंत्री को देश की अर्थव्यवस्था के बारे में देश की जनता को बताना चाहिए। इतनी बड़ी समस्या को खड़ा करने के बाद बिना उसे स्वीकार किए कैसे उसका हल निकाला जा सकता है।

प्रियंका गांधी ने 31 अगस्त को भी ट्वीट कर देश की जीडीपी पर सरकार पर हमला किया था। उन्होंने लिखा था, “GDP विकास दर से साफ है कि अच्छे दिन का भोंपू बजाने वाली भाजपा सरकार ने अर्थव्यवस्था की हालत पंचर कर दी है। न GDP ग्रोथ है न रुपए की मजबूती। रोजगार गायब हैं। अब तो साफ करो कि अर्थव्यवस्था को नष्ट कर देने की ये किसकी करतूत है?”

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी बेपटरी होती अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साध चुके हैं। मनमोहन सिंह ने देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था पर चिंता जताते हुए रविवार को कहा था कि अर्थव्यवस्था की स्थिति आज बहुत चिंताजनक है। जीडीपी का पांच फीसदी पर पहुंच जाना इस बात का संकेत है कि हम एक लंबी मंदी के भंवर में फंस चुके हैं। मनमोहन सिंह का कहना था कि भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी से आगे बढ़ने की क्षमता है, लेकिन मोदी सरकार के कुप्रबंधन ने देश की अर्थव्यवस्था को मंदी में ढकेल दिया है। मनमोहन सिंह ने कहा कि अर्थव्यवस्था अब तक नोटबंदी और जीएसटी जैसे मानवीय कुप्रबंधन से उबर नहीं पाई है।

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