कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद शिवसेना में शामिल हुईं प्रियंका चतुर्वेदी

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कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी शुक्रवार को शिवसेना में शामिल हो गई। उनके साथ इस मौके पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी मौजूद थे। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री में प्रियंका चतुर्वेदी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मैं मुंबई में पली बढ़ी हूं। पिछले कुछ दिनों से मुंबई से कट गई थी, लेकिन अब मैं वापस यहां जुड़ना चाहती हूं। प्रियंका ने कहा कि मैंने लौटने का मन बनाया तो इस संगठन के अलावा कोई और संगठन ध्यान में नहीं आया। इस मौके पर शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘शिवसेना प्रियंकाजी का स्वागत करती है। प्रियंकाजी आप पूरे देश में शिवसेना के लिए काम करेंगी।’

Photo: ANI

प्रियंका ने कहा कि मेरी जिम्मेदारी मुद्दों को लेकर है। मैंने टिकट की वजह से पार्टी (कांग्रेस) नहीं छोड़ी। मथुरा से मेरे माता-पिता आते हैं, लेकिन मैंने वहां से टिकट नहीं मांगी थी। मैंने आत्मसम्मान की लड़ाई लड़ी है। मैंने पार्टी को बताया था कि मेरी क्या तकलीफ है। महिला सम्मान बड़ा मुद्दा है। शिवसेना में ही क्यों शामिल होने पर उन्होंने कहा कि मेरा कभी भी शिवसेना को लेकर मन परिवर्तन नहीं हुआ। शिवसेना से मेरा बचपन से जुड़ाव रहा है। महाराष्ट्र वालों के दिल में शिवसेना राज करता है।

उन्होंने अपने साथ हुई अभद्रता का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे दुख हुआ। बता दें कि मथुरा में अपने साथ कथित तौर पर बदसलूकी करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई को निरस्त किए जाने से नाराज चल रहीं प्रियंका चतुर्वेदी ने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पार्टी के प्रवक्ता होने का उल्लेख हटा दिया।

राहुल गांधी को भेजा इस्तीफा

मथुरा प्रकरण को लेकर बीते 17 अप्रैल को खुलकर नाराजगी जताने वाली प्रियंका ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने इस्तीफे के बाद ट्वीट कर कहा, ‘पिछले तीन दिनों से मुझे देशभर से जो समर्थन मिला है, उससे मैं अभिभूत हूं। इस सफर का हिस्सा रहे सभी लोगों का धन्यवाद।’ प्रियंका ने अपने त्यागपत्र में कहा, ‘मैं 10 साल पहले युवा कांग्रेस के सदस्य के तौर पर कांग्रेस में शामिल हुई थी, क्योंकि मुझे पार्टी की विचारधारा और आपकी (राहुल गांधी की) समावेशी, उदारवादी एवं प्रगतिशील राजनीति में विश्वास था। इन दस वर्षों में मुझे जो भी जिम्मेदारी सौंपी गई, उसका मैंने पूरे समर्पण और प्रतिबद्धता से निर्वहन किया।’

पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ‘मैंने पार्टी से कुछ इनाम या रिटर्न नहीं मांगा क्योंकि मुझे उम्मीद थी कि पार्टी नेतृत्व मेरी आकांक्षाओं का ख्याल रखेगा। पिछले कुछ सप्ताह में ऐसी चीजें हुईं जिनसे मुझे इसका एहसास हो गया कि संगठन को मेरी सेवा का कोई मूल्य नहीं है। मुझे यह भी लगा कि मैं जितना समय संगठन में रहूंगी, मुझे उतना अपने आत्मसम्मान और स्वाभिमान की कीमत चुकानी पड़ेगी।’ उन्होंने मथुरा की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने चीजों की जिस तरह से उपेक्षा की उससे स्पष्ट हो गया है कि अब मुझे कांग्रेस के बाहर जाना होगा।

दर्ज कराया था विरोध

मथुरा में कथित तौर पर बदसलूकी करने वाले कार्यकर्ताओं को फिर से पार्टी में वापस लिए जाने पर प्रियंका ने खुलकर विरोध दर्ज कराया था। प्रियंका ने गत 17 अप्रैल को ट्वीट कर कहा था, ‘‘बड़े ही दुख की बात है कि पार्टी खून-पसीना देकर काम करने वालों की बजाय मारपीट करने वाले गुंडों को अधिक वरीयता देती है। पार्टी के लिए मैंने अभद्र भाषा से लेकर हाथापाई तक झेली, लेकिन फिर भी जिन लोगों ने मुझे पार्टी के अंदर धमकी दी, उनके खिलाफ कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं।’’

दरअसल, पिछले दिनों प्रियंका राफेल मामले पर संवाददाता सम्मेलन करने के लिए मथुरा में थीं जहां पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी थी। उनकी शिकायत पर इन कार्यकर्ताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। बाद में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कार्यकर्ताओं द्वारा खेद प्रकट करने के बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को निरस्त किया जा रहा है। (इनपुट भाषा के साथ)

 

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