राष्ट्रपति चुनाव: मीरा कुमार ने कहा, यह चुनाव दो दलित प्रत्याशियों का नहीं बल्कि विचारधाराओं का है

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राष्ट्रपति चुनाव के लिए 17 विपक्षी दलों की उम्मीदवार मीरा कुमार ने मंगलवार (27 जून) को कहा कि वह महात्मा गांधी के गुजरात स्थित साबरमती आश्रम से अपना प्रचार अभियान शुरू करेंगी। साथ ही उन्होंने कहा कि यह चुनाव दो दलित प्रत्याशियों का नहीं बल्कि विचारधाराओं का है।

फाइल फोटो- मीरा कुमार

पीटीआई की ख़बर के मुताबिक, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा उनके लोकसभा अध्यक्ष के रूप में कामकाज की शैली पर उठाये गये सवाल के बारे में पूछे जाने पर मीरा ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं से कहा, ”जब मैं लोकसभा अध्यक्ष थी तो सभी सांसदों ने मेरे कामकाज की शैली की सराहना की थी। किसी ने भी यह आरोप नहीं लगाया था कि मैं पक्षपातपूर्ण ढंग से काम करती हूं।”

सुषमा ने एक ट्वीट कर वह वीडियो जारी किया था जिसमें लोकसभा में उनके एक भाषण के दौरान लोकसभा अध्यक्ष के रूप में मीरा कुमार ने बीच में काफी टोकाटाकी की थी। मीरा ने कहा कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों, सर्व समावेशी, गरीबी उन्मूलन और जाति व्यवस्था का विनाश जैसे मूल्यों के आधार पर चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने कहा कि यह विचार मेरे हृदय के बहुत समीप हैं।

विपक्षी दलों ने इसी विचारधारा के आधार पर उन्हें सर्वसम्मति से राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाने का निर्णय किया है।
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने निर्वाचक मण्डल के सभी सदस्यों को एक पत्र लिखकर यह अपील की है कि उनके समक्ष यह ”अद्वितीय अवसर है कि वे राष्ट्र के इस शीर्ष पद के लिए संविधान के इन मूल्यों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से अंतरात्मा की आवाज पर वोट दें।”

यह पूछे जाने पर कि क्या वह जदयू प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनको समर्थन देने के बारे में उनके फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करेंगी, मीरा ने कहा कि उन्होंने दो दिन पहले एक पत्र लिखकर निर्वाचक मण्डल के सभी सदस्यों को पत्र लिखा है। ”मेरी अपील सभी से है और सभी को इस पर विचार करना चाहिए।”

नीतीश ने मीरा कुमार के बजाय राजग के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का ऐलान किया है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस ने ”बिहार की बेटी” को राष्ट्रपति चुनाव में हारने के लिए जानबूझकर उतारा है।

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