कोविंद बोले- ‘सरकार मजबूत, सुरक्षित और समावेशी भारत बनाने की दिशा में बढ़ रही है आगे’, जानें राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में और क्या कहा?

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हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव के नतीजों को ‘‘भारत की विकास यात्रा जारी रखने के लिए जनादेश’’ करार देते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को कहा कि सरकार ने किसान, व्यापारियों समेत समाज के सभी वर्गों के लिये कई अहम फैसले किये और उन पर अमल शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार एक मजबूत, सुरक्षित और समावेशी भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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सत्रहवीं लोकसभा के पहले सत्र में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए 61 करोड़ से अधिक लोगों ने मतदान कर रिकॉर्ड बनाया और पहले की तुलना में महिलाओं की मतदान में सर्वाधिक हिस्सेदारी रही। अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति ने आधी आबादी की चर्चा करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में राज्यों के सहयोग से कई कदम उठाए गए हैं।

तीन तलाक का किया जिक्र

राष्ट्रपति ने तीन तलाक प्रथा का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘देश में हर बहन-बेटी के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने हेतु ‘तीन तलाक’ और ‘निकाह-हलाला’ जैसी कुप्रथाओं का उन्मूलन जरूरी है। मैं सभी सदस्यों से अनुरोध करूंगा कि हमारी बहनों और बेटियों के जीवन को और अधिक सम्मानजनक एवं बेहतर बनाने वाले इन सभी प्रयासों में अपना सहयोग दें।’’ राष्ट्रपति ने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव के नतीजों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘लोगों ने 2014 में शुरू हुई भारत की विकास यात्रा को जारी रखने के लिए जनादेश दिया है।’’

उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले 21 दिनों में किसान, व्यापारियों समेत समाज के सभी वर्गों के लिए कई फैसले किये और उन पर अमल शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार एक मजबूत, सुरक्षित और समावेशी भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कोविंद ने कहा कि जल संकट की समस्या है। जल स्रोत लुप्त हो रहे हैं। आने वाले समय में इस संकट के और अधिक गहराने की आशंका है इसलिए स्वच्छ भारत की तरह जल संरक्षण के लिये भी गंभीरता दिखानी होगी।

कृषि क्षेत्र में 25 लाख करोड़ रुपये का किया निवेश

राष्ट्रपति ने कहा कि कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों के लिए उच्च अधिकार प्राप्त समिति गठित करने का निर्णय किया गया है तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिये 25 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कोविंद ने कहा कि ‘राष्ट्रीय रक्षा कोष’ से वीर जवानों के बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति की राशि बढ़ा दी गई है। इसमें पहली बार राज्य पुलिस के जवानों के बेटे-बेटियों को भी शामिल किया गया है।

स्वच्छता अभियान की तरह ही जल संरक्षण पर गंभीरता समय की मांग

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आने वाले समय में जल संकट के और गहराने की आशंका जताते हुए कहा कि ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की तरह ही ‘जल संरक्षण एवं प्रबंधन’ के बारे में गंभीरता दिखाना समय की मांग बन गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गंगा की तरह ही कावेरी, पेरियार, नर्मदा, यमुना, महानदी और गोदावरी जैसी अन्य नदियों को भी प्रदूषण से मुक्त कराने की दिशा में सरकार प्रयास कर रही है।

राष्ट्रपति कोविंद ने जल संरक्षण की परंपरागत भारतीय व्यवस्था के धीरे-धीरे लुप्त होने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जल-स्रोतों के लुप्त होने से गरीबों के लिए पानी का संकट बढ़ता गया। कोविंद ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।

उन्होंने कहा, ‘‘21वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है- बढ़ता हुआ जल-संकट। हमारे देश में जल संरक्षण की परंपरागत और प्रभावी व्यवस्थाएं समय के साथ लुप्त होती जा रही हैं। तालाबों और झीलों पर घर बन गए और जल-स्रोतों के लुप्त होने से गरीबों के लिए पानी का संकट बढ़ता गया।’’

जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग पर जताई चिंता

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग के बढ़ते प्रभावों के कारण आने वाले समय में, जलसंकट के और गहराने की आशंका है। आज समय की मांग है कि जिस तरह देश ने ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को लेकर गंभीरता दिखाई, वैसी ही गंभीरता ‘जल संरक्षण एवं प्रबंधन’ के विषय में भी दिखानी होगी।’’ कोविंद ने कहा, ‘‘हमें अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाना ही होगा। नए ‘जलशक्ति मंत्रालय’ का गठन, इस दिशा में एक निर्णायक कदम है जिसके दूरगामी लाभ होंगे।’’

उन्होंने कहा कि सरकार सूखे की चपेट में आए क्षेत्रों की समस्याओं के प्रति सचेत है और हर प्रभावित देशवासी के साथ खड़ी है। राज्य सरकारों और गांव के स्तर पर सरपंचों के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पीने के पानी की कम से कम दिक्कत हो, और किसानों को भी मदद मिल सके। राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों से अन्य देशवासी काफी कुछ सीख सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पर्यावरण एवं प्रकृति के अनुकूल जीवन-यापन करने वाले आदिवासी भाई-बहन विकास और परंपरा का सुंदर संतुलन बनाए रखते हैं।’’

वन्य जीवों और पर्यावरण के संरक्षण के लिए सरकार के गंभीर होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ हाल के वर्षों में वन और वृक्ष आवरण विस्तार में 1 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है। पिछले पांच साल में देश के संरक्षित क्षेत्र का दायरा बढ़ाया गया है। वर्ष 2014 में देश में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या 692 थी जो अब बढ़कर 868 हो गई है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वायु प्रदूषण से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए, देश के 102 शहरों में ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ शुरू किया गया है।’’

कोविंद ने जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग के प्रभावों को कम करने में सौर ऊर्जा की भूमिका को भी रेखांकित किया। इस क्रम में उन्होंने कहा, ‘‘भारत के सक्रिय प्रयासों से इंटरनेशनल सोलर अलायंस का गठन हुआ है। इस संगठन के माध्यम से दुनिया के विकासशील देशों में सौर ऊर्जा के विकास में भारत अहम योगदान कर रहा है।’’ (इनपुट- भाषा के साथ)

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