VHP नेता प्रवीण तोगड़िया का बीजेपी पर हमला, कहा- लोगों ने राम मंदिर बनाने के लिए मोदी सरकार को चुना था, तीन तलाक कानून के लिए नहीं

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पिछले कुछ दिनों से विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया मीडिया की सुर्खियों में बने हुए है। इसी बीच, प्रवीण तोगड़िया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सत्ताधारी बीजेपी सरकार पर हमला बोला है।

प्रवीण तोगड़िया
File Photo: The Indian Express

एबीपी न्यूज़ के मुताबिक, प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि लोगों ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए मोदी सरकार को चुना था, तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए नहीं। तोगड़िया ने कहा कि सरकार को राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने के लिए एक कानून बनाना चाहिए।

प्रवीण तोगड़िया ने ये भी कहा कि, ‘राम मंदिर निर्माण के लिए एक कानून पारित करना चाहिए, ताकि इसका निर्माण जल्द हो सके। तीन तलाक पर कानून बनाना है कि नहीं बनाना है, यह सरकार पर निर्भर है, लेकिन उन्हें राम मंदिर पर एक कानून बनाना चाहिए।

तोगड़िया ने कहा कि हमें न्यायपालिका पर भरोसा है, लेकिन चूंकि मंदिर नहीं बनाया गया है, इसलिए इस बाबत एक कानून पारित करना चाहिए ताकि इसका निर्माण हो सके और इसके बगल में मस्जिद नहीं हो।’

ख़बर के मुताबिक, साथ ही प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई स्थगित कर दी है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने गुरुवार को कहा था कि वह बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद पर दायर अपीलों की सुनवाई 14 मार्च को करेगी। तोगड़िया ने कहा, ‘लंबे समय से हिंदू समुदाय मंदिर का इंतजार करता रहा है, इसलिए इसका निर्माण होना चाहिए।’

बता दें कि, अभी कुछ पहले ही ऐसी ख़बर आई थी कि प्रवीण तोगड़िया के द्वारा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर लगाए गए आरोपों के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) VHP नेता प्रवीण तोगड़िया और भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के महासचिव बृजेश उपाध्याय सहित वीएचपी के इंटरनैशनल प्रेजिडेंट राघव रेड्डी को उनके पद से हटाने की तैयारी में जुटा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि इन तीनों नेताओं की कार्यप्रणाली से सरकार को शर्मिंदगी उठानी पड़ी है और इस वजह से संघ का वरिष्ठ नेतृत्व इनसे नाराज चल रहा है। यह भी माना जा रहा है कि इन दो संगठनों के कार्यकर्ताओं के विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल भी संघ की विचारधारा के प्रसार के लिए नहीं किया जा रहा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट मुताबिक, विश्व हिंदू परिषद की कार्यकारी बैठक फरवरी के अंत तक आयोजित की जाएगी, जहां पर आरएसएस परिषद के फिर से चुनाव करने को लेकर दवाब बनाएगा ताकि प्रवीण तोगड़िया सहित राघव रेड्डी और उनके समर्थकों की जगह किसी और को चुना जा सके। आरएसएस ने उन सभी लोगों को संघ से बाहर का रास्ता दिखाने का निर्णय लिया है, जो कि बीजेपी सरकार और पीएम मोदी के खिलाफ सामने आए हैं।

1 COMMENT

  1. तानाशाही से कुछ समय के लिए आवाज़ बेशक दबा जड़ी जाए मगर वो बार बार बहुत ज़ल्दी उठने लगती है. आर.एस.एस. अगर ये सोचता है कि काठ की हांडी दोबारा चढ़ सकती है तो ये उसकी नादानी ही कही जाएगी.

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