राफेल सौदा: ‘अनिल अंबानी के रिलायंस को दलाली के रूप में मिले 21 हजार करोड़ रुपये’, प्रशांत भूषण का सनसनीखेज दावा

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‘जनता का रिपोर्टर’ द्वारा राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे को लेकर किए गए खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है। कांग्रेस राफेल डील पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को बख्शने के मूड में नहीं हैं। ‘जनता का रिपोर्टर’ द्वारा उठाए गए सवाल के बाद सरकार और विपक्ष के बीच सौदे को लेकर घमासान जारी है। एक ओर जहां केंद्र सरकार इस सौदे को गोपनीयता का हवाला देकर सार्वजनिक करने से बच रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इसमें घोटाले का आरोप लगा रही है।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने शनिवार (8 सितंबर) को दावा किया कि राफेल लड़ाकू विमान सौदा ‘‘इतना बड़ा घोटाला है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते’’। उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाया कि ऑफसेट करार के जरिए अनिल अम्बानी के रिलायंस समूह को ‘‘दलाली (कमीशन)’’ के रूप में 21,000 करोड़ रुपये मिले। उन्होंने इस सौदे से जुड़ी कथित दलाली की 1980 के दशक के बोफोर्स तोप सौदे में दी गई दलाली से तुलना की। बता दें कि अंबानी ने इससे पहले आरोप से इनकार किया था।

NDTV के मुताबिक, भूषण ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार ने केवल सौदे में अनिल अंबानी की कंपनी को जगह देने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से ‘समझौता’ किया, भारतीय वायु सेना को ‘बेबस’ छोड़ दिया। उन्होंने कहा, ‘‘राफेल सौदा इतना बड़ा घोटाला है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। बोफोर्स 64 करोड़ रुपये का घोटाला था जिसमें चार प्रतिशत कमीशन दिया गया था। इस घोटाले में कमीशन कम से कम 30 प्रतिशत है। अनिल अम्बानी को दिए गए 21,000 करोड़ रुपये केवल कमीशन हैं, कुछ और नहीं।’’

राफेल सौदे के बाद लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसाल्ट ने भारतीय कंपनियों के लिए व्यापार के सृजन के दायित्वों का पालन करने के लिए रिलायंस ग्रुप के साथ एक संयुक्त उद्यम शुरू किया। भूषण ने पूछा कि वायुसेना को 126 विमानों की जरूरत थी और उसने किस तरह अपनी जरूरत ‘कम की’ और नए सौदे से तकनीक वाली उपधारा ‘गायब’ होने पर सवाल किए।

रिलायंस समूह ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पिछले माह अंबानी द्वारा भेजे गए पत्र का उल्लेख करते हुए एक बयान में कहा, ‘‘रिलायंस को करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाने के आरोप कल्पना की उपज हैं जिन्हें निहित स्वार्थों द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है।’’ उन्होंने केंद्र पर गोपनीयता सबंधी उपधारा के नाम पर जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सौदे की एक संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की विपक्ष की मांग ‘‘पूरी तरह जायज है।’’

बता दें कि ‘जनता का रिपोर्टर’ ने राफेल विमान सौदे को लेकर दो भागों (पढ़िए पार्टी 1 और पार्टी 2 में क्या हुआ था खुलासा) में बड़ा खुलासा किया था। जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में भुचाल आ गया। कांग्रेस राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर सीधे तौर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है। खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘जनता का रिपोर्टर’ की खबर को शेयर कर कई बार मोदी सरकार पर हमला बोल चुके हैं।

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